तुरंत रोकें प्रक्रिया, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से कम कुछ मंजूर नहीं… SIR को लेकर कांग्रेस का ECI पर बड़ा हमला

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को चुनाव आयोग के एक बयान के बाद एक नई मांग उठाई है। कांग्रेस का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए। इसके साथ ही, कांग्रेस का स्पष्ट बयान है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उनके खिलाफ कार्रवाई से कम कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग का बयान मतदाता सूची में गड़बड़ियों और मतदाताओं के नामों के हटाए जाने से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब नहीं देता।

गोवा की स्थिति पर उठे सवाल

जयराम रमेश ने गोवा में हुई एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां से 97 मतदाताओं में से 81 लोगों ने फिर से पंजीकरण के लिए आवेदन कर दिया है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब मतदाताओं को खराब व्यवस्था के कारण वोटिंग के अधिकार से वंचित किया गया, तो इसके लिए जिम्मेदारी कौन लेगा? इस मुद्दे ने एक बार फिर चुनाव आयोग की स्वच्छता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग द्वारा उच्चतम न्यायालय के 27 मई 2026 के आदेश का हवाला दिए जाने पर भी सवाल उठाया। रमेश ने कहा कि यह आदेश हालिया खुलासों से पहले आया था। उन्होंने कहा कि आयोग का तर्क उन मुद्दों का समाधान नहीं करता जो लक्षित मतदाताओं के नाम हटाए जाने और नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर किए जाने से जुड़े हैं।

मतदाता पंजीकरण की समयसीमा पर चिंता

दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाता पंजीकरण की समयसीमा बढ़ाए जाने का उल्लेख करते हुए रमेश ने कहा कि कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के मामले में क्या किया जाएगा? यह सवाल उठाता है कि क्या चुनाव आयोग सभी राज्यों में एक समान नियम लागू करने में असमर्थ है।
चुनाव आयोग के पोर्टल की समीक्षा के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के विशेषज्ञों को शामिल किए जाने पर रमेश ने कहा कि समस्या तकनीकी मजबूती की नहीं, बल्कि फैसलों के केंद्रीकरण की है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर मतदाताओं को जोड़ने में आयोग की नीतियों में खामियां हैं।

युवा मतदाताओं को लेकर सवाल उठाए

रमेश ने युवा मतदाताओं के मुद्दे पर भी ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि जुलाई 2026 से प्रपत्र-6 में हुए बदलाव ने युवाओं पर उनके माता-पिता या दादा-दादी का विवरण जुटाने का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। यह स्थिति न केवल युवा वोटरों के लिए, बल्कि चुनाव प्रणाली के लिए भी चिंताजनक है।

सीईसी को जवाब देने की है जरूरत

जयराम रमेश ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें एकतरफा फैसलों, विपक्ष के प्रति पूर्वाग्रह, सत्तारूढ़ दल के पक्ष में ‘वोट चोरी’ में कथित भागीदारी, युवा मतदाताओं को रोकने के प्रयास, और मतदाता सूची में लापरवाही से जुड़े आरोपों का जवाब देना चाहिए। यह मुद्दा चुनाव आयोग के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

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