अमेरिका ने चाबहार पोर्ट को क्यों उड़ाया? भारत के लिए क्यों बढ़ा बड़ा खतरा?

The CSR Journal Magazine

सीजफायर के बाद अमेरिका ने चाबहार पोर्ट को बनाया निशाना  

अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों का बदला लेने और ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने के लिए सीजफायर खत्म होने के बाद चाबहार पोर्ट को निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल 2026 में हुए सीजफायर की समाप्ति की घोषणा के बाद, अमेरिकी सेना ने ईरान के लगभग 90 सैन्य और बुनियादी ढांचा ठिकानों पर भीषण बमबारी की, जिसमें पहली बार ईरान के पूर्वी तट पर स्थित रणनीतिक चाबहार बंदरगाह भी शामिल है।

भारत के लिए चाबहार की रणनीतिक अहमियत

भारत की विदेश नीति में चाबहार पोर्ट एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह बंदरगाह ईरान में स्थित है और भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचने का एक प्रमुख रास्ता है। अमेरिका के सैन्य हमले के बाद इस पोर्ट पर तनाव बढ़ गया है, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ रही हैं। हाल ही में हुए हमलों में कई धमाकों की घटनाएं सामने आई हैं।

अमेरिका की ताजा सैन्य कार्रवाई

सीजफायर के बाद पहली बार अमेरिका ने चाबहार पोर्ट के आसपास ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने ऐसे ठिकानों को निशाना बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बने हुए थे। ईरान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे सीजफायर का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी है।

चाबहार पोर्ट को निशाना बनाने के मुख्य कारण

जहाजों पर हमलों का जवाब: अमेरिका का दावा है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे कमर्शियल जहाजों पर हमले करके सीजफायर का उल्लंघन किया था। इसी समुद्री खतरे को रोकने के लिए चाबहार के समुद्री बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया।
रणनीतिक दबाव बढ़ाना: वाशिंगटन ने अब तक केवल होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित ‘बंदर अब्बास’ जैसे सैन्य अड्डों को निशाना बनाया था। चाबहार पर हमला करके अमेरिका ने संदेश दिया है कि वह ईरान के सुदूर पूर्वी तटों तक सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ा सकता है।
आर्थिक लाइफलाइन को तोड़ना: चाबहार ओमान की खाड़ी में स्थित ईरान का एकमात्र डीप-वाटर महासागरीय बंदरगाह है। यह वैश्विक प्रतिबंधों के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख जीवन रेखा का काम करता है, जिसे अमेरिका पंगु बनाना चाहता है।

चाबहार पोर्ट का खास महत्व

भारत के लिए चाबहार पोर्ट की खासियत यह है कि यह पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। वर्तमान में भारत के पास पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान तक पहुंचने का कोई सीधा साधन नहीं है। इससे भारत को व्यापार और कनेक्टिविटी में बढ़त मिलती है।

भारत के लिए चाबहार की रणनीतिक अहमियत

भारत ने मई 2024 में ईरान के साथ चाबहार के शाहिद बेहश्ती टर्मिनल को 10 वर्षों के लिए संचालित करने का ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौता किया था। भारत के लिए इसकी अहमियत निम्नलिखित है-
पाकिस्तान को बायपास करना: चाबहार पोर्ट भारत को पाकिस्तान के जमीनी रास्ते का उपयोग किए बिना सीधे अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक व्यापार करने के लिए एक वैकल्पिक और सुरक्षित समुद्री मार्ग प्रदान करता है।
ग्वादर पोर्ट का मुकाबला: यह बंदरगाह पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित किए जा रहे ग्वादर पोर्ट से महज 170 किलोमीटर दूर स्थित है। यह अरब सागर और हिंद महासागर में चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (घेरने की रणनीति) को काउंटर करने के लिए भारत का एक मजबूत भू-राजनीतिक केंद्र है। पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर चीन का बड़ा निवेश भारत के लिए चिंता का विषय है।
भारी वित्तीय निवेश: भारत इस परियोजना में लगभग 120 मिलियन डॉलर का सीधा निवेश कर चुका है और करोड़ों डॉलर की क्रेडिट लाइन भी दी है। अमेरिकी हमलों के कारण भारत का यह बड़ा निवेश और बुनियादी ढांचा अब भारी जोखिम में आ गया है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारा (INSTC): चाबहार बंदरगाह 7,200 किलोमीटर लंबे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का एक अभिन्न हिस्सा है, जो मध्य एशिया और यूरोप के साथ भारत की भविष्य की व्यापारिक रीढ़ है।

इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का हिस्सा

चाबहार पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का एक मुख्य केंद्र है। यह भारत, ईरान, रूस और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार को सुगम बनाता है। इसके माध्यम से व्यापार तेज और किफायती होता है, जिससे भारत को यूरोप से जोड़ने में मदद मिलती है।

हिंद महासागर में भारत की मौजूदगी

चाबहार अरब सागर और हिंद महासागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के निकट है। इस बंदरगाह पर भारत की मौजूदगी क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए बेहद आवश्यक है। भारत और ईरान के बीच चाबहार पोर्ट के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। India Ports Global Limited (IPGL) इस पोर्ट के एक टर्मिनल का संचालन कर रही है, जिसका लक्ष्य चाबहार को एक प्रमुख ट्रेड और लॉजिस्टिक्स हब बनाना है।

भारत की बढ़ती चिंताएं

अगर चाबहार और उसके आसपास की स्थिति बिगड़ती है, तो इसका सीधा असर भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और कनेक्टिविटी योजनाओं पर पड़ेगा। इसके अलावा, भारतीय निवेश और चल रही परियोजनाओं पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत की नजरें चाबहार पोर्ट और वहां की परियोजनाओं की सुरक्षा पर हैं। भविष्य में क्षेत्र की स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

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