महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह हुए विमान हादसे में उप मुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हुई। विमान ने सुबह 8:10 बजे सकाली से उड़ान भरी थी और यह बारामती हवाई अड्डे पर उतरते समय 8:50 पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। हादसे में कुल पांच लोगों की मौत हुई। विमान में सवार अजित पवार आधिकारिक कार्यक्रम के सिलसिले में यात्रा कर रहे थे। विमान का संचालन कर रहे कैप्टन सुमित कपूर एक अनुभवी पायलट थे, जबकि कैप्टन शांभवी पाठक को-पायलट के रूप में कॉकपिट क्रू का हिस्सा थीं और लैंडिंग प्रक्रिया में सक्रिय थीं। इसके अलावा, एक निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) वीवीआईपी सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे और एक स्टाफ/अटेंडेंट यात्रा सहायता के लिए साथ मौजूद था। दुर्घटना के समय विमान में सवार सभी लोग भीषण आग के कारण बच नहीं पाए।
सामान्य उड़ान से भीषण त्रासदी तक: लैंडिंग के आख़िरी 7 मिनटों में क्या-क्या हुआ
मंगलवार की सुबह बारामती के आसमान में जो हुआ, उसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। मुंबई से बारामती आ रहा चार्टर्ड जेट विमान, जिसमें राज्य के शीर्ष नेता अजीत पवार और उनका स्टाफ सवार था, लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अजीत पवार समेत विमान में सवार सभी की दर्दनाक मौत हो गई। शुरुआती तौर पर यह एक सामान्य घरेलू उड़ान मानी जा रही थी, लेकिन लैंडिंग के अंतिम कुछ मिनटों में हालात तेज़ी से बिगड़ते चले गए। प्रारंभिक जांच, प्रत्यक्षदर्शियों और विमानन विशेषज्ञों की शुरुआती टिप्पणियों के आधार पर हादसे से पहले की विस्तृत टाइम-लाइन सामने आई है।
मिनट-दर-मिनट टाइम-लाइन
सुबह 8:00–8:10 बजे उड़ान की शुरुआत करते हुए चार्टर्ड Learjet श्रेणी का विमान मुंबई एयरपोर्ट से बारामती के लिए रवाना हुआ। विमान में दो पायलट, एक सुरक्षाकर्मी, एक स्टाफ सदस्य और वीवीआईपी यात्री यानि श्री अजीत पवार सवार थे।विमान का टेक-ऑफ सामान्य रहा, किसी तकनीकी चेतावनी या असामान्य स्थिति की सूचना नहीं मिली।
सुबह 8:20–8:35 बजे सामान्य क्रूज़ चरण– विमान निर्धारित ऊंचाई पर स्थिर गति से उड़ान भरता रहा। पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के बीच नियमित संपर्क बना रहा। मौसम को लेकर कोई गंभीर चेतावनी दर्ज नहीं की गई (प्रारंभिक जानकारी)।
सुबह 8:40 बजे बारामती एयरस्पेस में प्रवेश– विमान ने बारामती एयरपोर्ट के आसपास के हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया। पायलटों ने लैंडिंग की तैयारी शुरू की। गति कम की गई और विमान को नीचे लाया गया। रनवे विज़िबिलिटी सामान्य बताई जा रही है, हालांकि स्थानीय हवा की स्थिति की जांच की जा रही है।
पहला लैंडिंग प्रयास सुबह 8:43–8:44 बजे– विमान रनवे के ऊपर निर्धारित ऊंचाई पर पहुंचा। इसी दौरान पायलटों को लगा कि टच-डाउन सुरक्षित नहीं होगा। सुरक्षा मानकों के अनुसार पायलटों ने तुरंत गो-अराउंड (विमान को दोबारा ऊपर ले जाने) का फैसला लिया। विमान रनवे के ऊपर से आगे बढ़ गया और दोबारा चक्कर काटने लगा। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, गो-अराउंड एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया होती है और इसे असफलता नहीं माना जाता।
दूसरा लैंडिंग प्रयास सुबह 8:44–8:45 बजे- विमान ने दोबारा रनवे की ओर एप्रोच शुरू की। इस बार विमान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर जल्दी आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान कुछ क्षणों के लिए डगमगाता हुआ दिखा। इसी दौरान विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह रनवे से पहले ही नीचे आने लगा। गिरने से पहले विमान लड़खड़ाया, फिर 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा। चार से पांच विस्फोट भी हुए।
सुबह लगभग 8:45 बजे घटी अनहोनी दुर्घटना– विमान रनवे से कुछ ही दूरी पहले ज़मीन से टकरा गया। टक्कर के साथ ही तेज़ धमाका हुआ। कुछ ही सेकंड में विमान में आग लग गई और धुएं का घना गुबार उठने लगा। स्थानीय लोगों ने एक के बाद एक छोटे विस्फोटों की आवाज़ सुनने की बात कही।
हादसे के तुरंत बाद
आसपास के ग्रामीण और एयरपोर्ट कर्मचारी घटनास्थल की ओर दौड़े। पुलिस और दमकल विभाग को तुरंत सूचना दी गई। आग अत्यंत तीव्र थी, जिससे बचाव कार्य में भारी कठिनाई आई। विमान के भीतर सवार सभी लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने में काफी समय लगा। क्षेत्र को सील कर दिया गया और मलबे को सुरक्षित किया गया। राज्य और केंद्र स्तर पर उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए।
हादसे के संभावित कारण (प्रारंभिक आकलन)
जांच एजेंसियां फिलहाल इन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं-
1. दूसरे लैंडिंग प्रयास में नियंत्रण क्यों बिगड़ा?
2. क्या तकनीकी खराबी (फ्लाइट कंट्रोल या इंजन) अचानक सामने आई?
3. क्या कम ऊंचाई पर हवा के झोंके (विंड शियर) ने संतुलन बिगाड़ा?
4. क्या विमान की स्पीड और एंगल लैंडिंग के लिए उपयुक्त थे?
5. क्या कॉकपिट में वर्कलोड या समय की कमी ने निर्णय को प्रभावित किया?
विशेषज्ञों का कहना है कि लैंडिंग चरण किसी भी उड़ान का सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है।
बारामती विमान हादसे से ठीक पहले पायलट ने “ओह शिट… ओह शिट” (Oh sht… oh sht) कहा था। खबरों के मुताबिक, कैप्टन शांभवी पाठक के ये आखिरी शब्द थे, जब विजिबिलिटी कम होने के कारण दोबारा लैंडिंग का प्रयास विफल रहा और विमान का संतुलन बिगड़ गया। हादसे में पायलट कैप्टन सुमित कपूर, कैप्टन शांभवी पाठक, फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली, और दो अन्य यात्रियों की मौत हो गई। एएआईबी (Aircraft Accident Investigation Bureau) मामले की जांच कर रही है और ब्लैक बॉक्स मिल गया है।
पवार जिस विमान में सवार थे वो लियरजेट-45 (LJ45) एक मध्यम आकार का विमान है, जिसे बिज़नेस जेट या चार्टर फ्लाइट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। कनाडाई विमान कंपनी बॉम्बार्डियर के बनाए गए लियरजेट विमानों का इस्तेमाल कई चार्टर कंपनियां करती हैं। इस विमान में दो हनीवेल TFE731-20AR/BR टर्बोफैन इंजन लगे होते हैं और इसमें एक बार में लगभग आठ यात्री यात्रा कर सकते हैं। करीब तीन हजार किलोमीटर की रेंज में तेज़ी से उड़ान भरने की क्षमता के लिए यह जाना जाता है। बारामती में दुर्घटनाग्रस्त हुआ लियरजेट-45 विमान 2010 में बना था यानी यह लगभग सोलह साल पुराना था।
एक सामान्य उड़ान ने बदली महाराष्ट्र की राजनीतिक दिशा
बारामती विमान हादसा यह दर्शाता है कि कैसे एक सामान्य उड़ान, लैंडिंग के अंतिम कुछ मिनटों में, विनाशकारी त्रासदी में बदल सकती है! पहला गो-अराउंड सुरक्षित प्रक्रिया था, लेकिन दूसरे प्रयास में आई अस्थिरता ने पायलटों को संभलने का अवसर नहीं दिया। असली वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल पूरा देश इस हादसे से स्तब्ध है।
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