धारावी में घर खाली करने में देरी पर घटेगा ट्रांजिट रेंट, सहयोग नहीं करने वालों पर कार्रवाई की तैयारी; पुनर्विकास परियोजना में तेज हुई हलचल
मुंबई की सबसे बड़ी और लंबे समय से प्रतीक्षित शहरी पुनर्विकास योजनाओं में शामिल धारावी पुनर्विकास परियोजना अब उस चरण में पहुंच गई है, जहां जमीन खाली कराने और पात्र परिवारों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इसी क्रम में परियोजना लागू करने वाली कंपनी अडानी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (ANDPL) ने उन निवासियों के लिए पारगमन किराये की राशि कम करने का निर्णय लिया है, जो परियोजना के लिए निर्धारित समय पर अपना घर या झोपड़ी खाली करने में जानबूझकर देरी करते हैं। कंपनी के मुताबिक, यह बदलाव उन मामलों में लागू होगा जहां निवासी बिना उचित कारण के स्थानांतरण में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
अब मिलेगी कम राशि
नए प्रावधान के अनुसार, जमीन खाली करने में जानबूझकर देरी करने वाले पात्र भूतल निवासियों को अब 18 हजार रुपये के बजाय 15 हजार रुपये प्रति माह पारगमन किराया दिया जाएगा। ऊपरी मंजिल के निवासियों के लिए यह राशि 15 हजार रुपये से घटाकर 12 हजार रुपये प्रति माह की जाएगी। व्यावसायिक और औद्योगिक इकाइयों के मामले में भी किराये की दर घटेगी। ऐसे प्रतिष्ठानों को पहले 175 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह की दर प्रस्तावित थी, जिसे घटाकर 145 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह किया गया है। इसके अलावा, जानबूझकर देरी करने वाले परिवारों को मिलने वाली एकमुश्त 5 हजार रुपये की स्थानांतरण सहायता भी नहीं दी जाएगी। हालांकि, यह बदलाव उन हजारों निवासियों के लिए नहीं है जो परियोजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं और स्वेच्छा से अपना घर खाली कर रहे हैं। परियोजना प्रबंधन का कहना है कि अधिकांश परिवारों के साथ बातचीत और समझाइश के जरिए स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। विवाद मुख्य रूप से उन मामलों में है, जहां किसी निर्माण स्थल का एक हिस्सा खाली हो जाने के बावजूद कुछ मकान खाली नहीं किए जाते और इसके कारण पूरे क्षेत्र में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाता।
3,000 से अधिक घरों वाले सेक्टर में सामने आया विवाद
धारावी के सेक्टर-6 में हाल के महीनों में घर खाली कराने की प्रक्रिया विशेष रूप से तेज हुई है। इस क्षेत्र में मेघवाड़ी, गणपत नगर और आजाद नगर जैसे इलाके आते हैं। अगस्त में भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सेक्टर-6 में करीब 3,300 घरों में से बड़ी संख्या में मकान खाली कराए जा चुके थे, जबकि कुछ परिवार स्थानांतरण के लिए तैयार नहीं थे। प्रशासन की ओर से ऐसे परिवारों को नोटिस दिए गए और बाद में कुछ मामलों में पुलिस की सहायता से कार्रवाई भी हुई। मेघवाड़ी में अगस्त में हुई कार्रवाई के दौरान 16 मकानों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 14 मकान बाद में गिरा दिए गए, जबकि दो परिवारों के मकान स्वेच्छा से खाली कराने की प्रक्रिया के लिए छोड़े गए थे। इससे पहले 123 निवासियों को घर खाली करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। बातचीत और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद अधिकांश परिवारों ने स्थानांतरण स्वीकार कर लिया था और केवल कुछ परिवार ही पीछे रह गए थे। यह घटनाक्रम बताता है कि धारावी पुनर्विकास अब केवल योजना, सर्वे और पात्रता तय करने के स्तर पर नहीं है, बल्कि वास्तविक जमीन खाली कराने और निर्माण शुरू करने के चरण में पहुंच चुका है।
क्यों कम किया गया किराया?
ANDPL का तर्क है कि किसी निर्माण स्थल को पूरी तरह खाली न किए जाने से पुनर्वास भवनों का निर्माण प्रभावित होता है। किसी भूखंड पर कुछ घर मौजूद रहने पर वहां निर्माण मशीनरी, श्रमिक और अन्य संसाधनों को पूरी तरह तैनात करना मुश्किल होता है। इससे परियोजना में देरी के साथ लागत भी बढ़ सकती है। कंपनी के अनुसार, बहुत कम संख्या में ऐसे मामले हैं जहां लोग जानबूझकर घर खाली करने में देरी कर रहे हैं। कंपनी का कहना है कि ऐसे मामलों के कारण बड़ी संख्या में दूसरे परिवारों को भी अपने नए पुनर्वास घरों के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। इसलिए पहले समझाइश और बातचीत का रास्ता अपनाया जा रहा है, लेकिन लगातार असहयोग की स्थिति में किराये और अन्य लाभों में कटौती का प्रावधान लागू किया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा है कि महाराष्ट्र स्लम क्षेत्र अधिनियम, 1971 की धारा 33 और 38 तथा डीसीपीआर 2034 के विनियम 33(10ए) से जुड़े प्रावधानों के तहत परियोजना में जानबूझकर बाधा डालने वाले मामलों में कार्रवाई की जा सकती है। कंपनी के अनुसार, कानूनी प्रावधानों में कुछ परिस्थितियों में किराये अथवा पारगमन आवास जैसे लाभों को रोकने की गुंजाइश भी है। इसके बावजूद फिलहाल ऐसे गैर-सहयोगी मामलों में पूरी तरह किराया बंद करने के बजाय कम दर पर किराया जारी रखने का रास्ता अपनाया गया है।
पहले क्या था किराये का प्रावधान?
इस बदलाव को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि धारावी के पात्र परिवारों को घर खाली करने के बाद वैकल्पिक आवास की व्यवस्था के दौरान किराये की सहायता देने की व्यवस्था क्यों की गई है। अगस्त में सामने आई जानकारी के मुताबिक, पात्र भूतल निवासियों को 18 हजार रुपये प्रतिमाह और पात्र ऊपरी मंजिल के निवासियों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से किराया देने की पेशकश की गई थी। पात्र व्यावसायिक इकाइयों के लिए यह राशि 175 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रतिमाह थी। इसके साथ दलाली और किराये में सालाना 5 प्रतिशत वृद्धि की व्यवस्था की जानकारी भी सामने आई थी। यही कारण है कि नए नियम में समय पर घर खाली करने और देरी करने वालों के बीच स्पष्ट आर्थिक अंतर पैदा किया गया है। प्रशासन और परियोजना प्रबंधन का उद्देश्य यह है कि जिस परिवार को घर खाली करने का नोटिस और निर्धारित समय मिल चुका है, वह समय पर स्थानांतरित हो ताकि निर्माण कार्य आगे बढ़ सके।
दूसरी ओर निवासियों की क्या चिंता है?
जहां परियोजना प्रबंधन समय पर घर खाली कराने को निर्माण की जरूरत बता रहा है, वहीं कई निवासियों की चिंता वैकल्पिक आवास की उपलब्धता और किराये की पर्याप्तता को लेकर है। अगस्त में मेघवाड़ी में हुई कार्रवाई के दौरान कुछ निवासियों ने कहा था कि वे पुनर्विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन वे यह चाहते हैं कि उन्हें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि भविष्य में उन्हें कौन-सा पुनर्वास भवन मिलेगा, वह कहां होगा और तब तक उन्हें मिलने वाला किराया कितने समय तक जारी रहेगा। कुछ निवासियों ने किराये के बजाय सीधे पारगमन आवास उपलब्ध कराने की मांग भी की थी। प्रशासन की ओर से बताया गया था कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए एक साथ पारगमन आवास उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए कई मामलों में किराये के जरिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने का रास्ता अपनाया गया है। यही मुद्दा अब नए किराया कटौती प्रावधान के बाद और महत्वपूर्ण हो गया है। जिन परिवारों को पहले ही वैकल्पिक घर तलाशने में कठिनाई हो रही है, उनके लिए 18 हजार रुपये के बजाय 15 हजार रुपये या 15 हजार के बजाय 12 हजार रुपये की मासिक सहायता का अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है।
धारावी परियोजना में कितने घरों का सर्वे हुआ?
धारावी पुनर्विकास परियोजना की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार, 99,068 घरों को क्रमांक दिया जा चुका है और 91,325 घरों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। सर्वेक्षण का उद्देश्य प्रत्येक संरचना और परिवार की स्थिति का दस्तावेजीकरण करना तथा पुनर्वास की पात्रता निर्धारित करने में मदद करना है। सर्वेक्षण प्रक्रिया में घरों को विशिष्ट पहचान संख्या देना, गलियों का लेजर मानचित्रण करना और प्रत्येक झोपड़ी या संरचना से संबंधित दस्तावेज जुटाना शामिल है। सरकारी परियोजना वेबसाइट के मुताबिक, सर्वे के आधार पर पात्रता तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
किसे मिलेगा 350 वर्ग फुट का घर?
धारावी पुनर्विकास परियोजना के आधिकारिक पात्रता विवरण के अनुसार, निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले पात्र आवासीय झोपड़ी निवासियों को 350 वर्ग फुट का घर देने का प्रावधान है। सरकारी वेबसाइट पर पात्रता की तारीख और श्रेणी के आधार पर अलग-अलग व्यवस्था भी बताई गई है। सरकारी जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2000 या उससे पहले अस्तित्व में आए पात्र भूतल आवासों को धारावी के भीतर 350 वर्ग फुट का घर देने की व्यवस्था है। वहीं बाद की विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग पात्रता और आवास व्यवस्था निर्धारित है। कुछ श्रेणियों में 300 वर्ग फुट के आवास और किफायती किराये के आवास की व्यवस्था लागू होती है। इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कोई व्यक्ति धारावी में रह रहा है या नहीं। वास्तविक पुनर्वास लाभ सर्वेक्षण, दस्तावेज और सरकारी निर्धारित पात्रता मानदंडों के आधार पर तय होंगे।
पुनर्विकास कौन कर रहा है?
धारावी पुनर्विकास परियोजना को महाराष्ट्र सरकार के अधीन धारावी पुनर्विकास परियोजना/स्लम पुनर्वास प्राधिकरण लागू कर रहा है। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए अडानी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है। आधिकारिक परियोजना वेबसाइट के अनुसार, यह विशेष उद्देश्य वाली कंपनी महाराष्ट्र सरकार और अडानी समूह की भागीदारी वाली संस्था है। सरकार ने धारावी को एक एकीकृत और योजनाबद्ध क्षेत्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से इस परियोजना को आगे बढ़ाया है। आधिकारिक विवरण के मुताबिक इसका उद्देश्य केवल पुराने मकानों को हटाकर नए भवन खड़े करना नहीं, बल्कि आवास, रोजगार, बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं को एकीकृत तरीके से विकसित करना है।
रेलवे की जमीन पर भी बन रहे पुनर्वास भवन
धारावी पुनर्विकास योजना के लिए उपलब्ध जमीन की कमी को देखते हुए रेलवे की जमीन का इस्तेमाल भी परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारतीय एक्सप्रेस की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, माटुंगा में रेलवे की जमीन पर पुनर्वास भवनों का निर्माण शुरू हो चुका था, जबकि धारावी के सेक्टर-6 में भी बड़ी संख्या में पुनर्वास भवन बनाए जाने हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि मौजूदा धारावी निवासियों के लिए पुनर्वास आवास तैयार किए जा सकें और अलग-अलग चरणों में जमीन खाली होने के साथ नए निर्माण को आगे बढ़ाया जा सके।
आगे क्या होगा?
अब परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती घर खाली कराने, पुनर्वास पात्रता स्पष्ट करने और निर्माण की गति को एक साथ बनाए रखने की है। परियोजना प्रबंधन के लिए समय पर जमीन खाली होना जरूरी है, जबकि निवासियों के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि घर छोड़ने के बाद उन्हें वैकल्पिक आवास और तय आर्थिक सहायता समय पर मिलती रहे। नए नियम से यह स्पष्ट संकेत गया है कि परियोजना प्रबंधन अब देरी को केवल बातचीत के जरिए सुलझाने के बजाय आर्थिक प्रोत्साहन और कटौती दोनों का इस्तेमाल करेगा। हालांकि, किसी भी व्यक्ति के मामले में वास्तविक कार्रवाई उसके नोटिस, पात्रता, सुनवाई और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
पुनर्विकास परियोजना कार्य रफ्तार पर
धारावी के पुनर्विकास की सफलता केवल निर्माण की गति से नहीं मापी जाएगी। करीब एक सदी से विकसित हुई यहां की आवासीय और कारोबारी बस्ती में लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है। इसलिए घर खाली कराने के साथ-साथ पुनर्वास, रोजगार, छोटे कारोबार, सामाजिक ढांचे और स्थानीय समुदाय के हितों को लेकर स्पष्टता भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल परियोजना के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि सर्वेक्षण बड़े स्तर पर आगे बढ़ चुका है और जमीन खाली कराने की प्रक्रिया भी कई क्षेत्रों में सक्रिय है। ऐसे में ट्रांजिट रेंट में कटौती का नया नियम धारावी पुनर्विकास के अगले चरण में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम बन गया है। अब यह देखना होगा कि इससे लंबित स्थानांतरण कितनी तेजी से पूरा होता है और निर्माण कार्य किस गति से आगे बढ़ता है।
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