दिल्ली में मेडिकल वेस्ट का अनुचित निस्तारण गंभीर समस्या बन गया है। राजधानी के लगभग 10,400 स्वास्थ्य संस्थानों से प्रतिदिन 74 टन बायो-मेडिकल वेस्ट उत्पन्न होता है, जबकि मौजूदा निस्तारण क्षमता केवल 70 टन है। इसका मतलब यह है कि 4 टन कचरा रोज़ाना सामान्य कचरे के साथ सड़कों, नालियों और लैंडफिल साइट तक पहुंच रहा है।
घरों और छोटे स्वास्थ्य केंद्रों से खतरा
घरों में बची या एक्सपायर हो चुकी दवाओं को सही तरीके से निस्तारित नहीं किया जाता। अक्सर ये सामान्य कचरे में मिल जाती हैं या नालियों और सीवेज के माध्यम से भूजल और यमुना में पहुंच जाती हैं। इससे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का खतरा बढ़ रहा है।
संयंत्र और उनकी सीमित क्षमता
दिल्ली में वर्तमान में दो बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट संयंत्र काम कर रहे हैं—नीलौठी और जीटी करनाल रोड संयंत्र। नीलौठी संयंत्र पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, पूर्व, शाहदरा और उत्तर-पूर्वी जिलों के मेडिकल वेस्ट के लिए जिम्मेदार है, जबकि जीटी करनाल रोड संयंत्र उत्तर, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व जिलों का वेस्ट निस्तारित करता है। दोनों संयंत्रों की कुल क्षमता 70 टन प्रतिदिन है, जो बढ़ते वेस्ट की मांग को पूरा नहीं कर पा रही।
छोटी स्वास्थ्य संस्थाओं में लापरवाही
क्लिनिक, लैब और छोटे स्वास्थ्य केंद्र कई बार मेडिकल वेस्ट को सही ढंग से अलग नहीं कर पाते। वहीं, घरों से आने वाली दवाएं अक्सर स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुंच पाती। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका प्रभाव सीधे मिट्टी, जल स्रोत और मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।
समाधान और सरकार की योजना
दिल्ली सरकार ने दो नए अत्याधुनिक बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट संयंत्र लगाने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य निस्तारण प्रणाली को मजबूत करना और शहर में बढ़ती मांग को पूरा करना है। साथ ही, नियमों का सख्ती से पालन और जन जागरूकता भी आवश्यक है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉ. ग्लैडबिन त्यागी, सीएमओ, स्वामी दयानंद अस्पताल, कहते हैं कि “मेडिकल वेस्ट के सही निस्तारण की जिम्मेदारी सभी की है। लोगों को बची हुई दवाओं को पास के स्वास्थ्य केंद्र में जमा करना चाहिए।” डॉ. बीबी वाधवा, पूर्व अध्यक्ष, दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन, जोड़ते हैं, “लैंडफिल साइट पर पहुंचा मेडिकल वेस्ट धीरे-धीरे मिट्टी में मिलता है और हमारे स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर बन जाता है।”
घरों में क्या करें?
बची या एक्सपायर दवाओं को सामान्य कचरे में फेंकने की बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जमा करें। इससे न केवल AMR का खतरा कम होगा बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
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