त्योहारों से पहले दिल्ली में खाद्य सुरक्षा का बड़ा अभियान, बदबूदार हालत में मिला 2,830 किलो लावारिस खोया, धाप और मक्खन, पनीर के नमूनों में डिटर्जेंट की पुष्टि
त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले दिल्ली में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी और अस्वच्छ तरीके से रखे खाद्य पदार्थों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। राजधानी के प्रमुख खाद्य बाजारों में हुई जांच के दौरान 2,800 किलो से अधिक असुरक्षित और लावारिस खाद्य सामग्री नष्ट की गई। इसमें बड़ी मात्रा में खोया, धाप और मक्खन शामिल था। अधिकारियों के मुताबिक, कई उत्पाद बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में रखे मिले, जिनसे दुर्गंध आ रही थी और उनमें खराब होने के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे थे। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब त्योहारों के दौरान मिठाइयों, पनीर, खोया, क्रीम और अन्य दुग्ध उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी बढ़ती मांग के बीच मिलावटी या खराब सामग्री बाजार में पहुंचने की आशंका भी बढ़ जाती है। दिल्ली सरकार ने खाद्य सुरक्षा विभाग को पूरे त्योहारी मौसम में निगरानी और जांच तेज रखने के निर्देश दिए हैं।
खोया मंडी से लेकर जनकपुरी तक जांच अभियान
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने खोया मंडी, मोरी गेट, बाग दीवार, संजय मार्केट और जनकपुरी मंडी समेत कई प्रमुख बाजारों में निरीक्षण किया। अधिकारियों का मुख्य ध्यान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, भंडारण की स्थिति, साफ-सफाई और संभावित मिलावट पर रहा। मोरी गेट की खोया मंडी, बाग दीवार और संजय मार्केट में अधिकारियों को करीब 2,830 किलोग्राम खोया, धाप और मक्खन लावारिस हालत में मिला। इन उत्पादों को जिस जगह रखा गया था, वहां स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब थी। अधिकारियों के मुताबिक सामान से दुर्गंध आ रही थी और कई उत्पाद खराब होने लगे थे।
मालिकों को बुलाया गया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बरामद खाद्य सामग्री के संभावित मालिकों को सामने आने का अवसर भी दिया। बाजार में सार्वजनिक घोषणा कराई गई कि संबंधित व्यापारी अपने सामान की पहचान कर उसे लेने के लिए सामने आएं। लेकिन निर्धारित समय में कोई भी व्यक्ति इन खाद्य उत्पादों पर दावा करने नहीं पहुंचा। इसके बाद विभाग ने पूरे स्टॉक को जब्त कर लिया और उसे मजनू का टीला स्थित नगर निगम के डंपिंग स्थल पर ले जाकर नष्ट कर दिया। अधिकारियों ने यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006के प्रावधानों के तहत की।
प्रयोगशाला जांच में भी सामने आई चिंताजनक तस्वीर
सिर्फ मौके पर मिली खराब हालत ही चिंता का कारण नहीं थी। विभाग द्वारा लिए गए कुछ नमूनों की प्रयोगशाला जांच में भी गुणवत्ता संबंधी गंभीर खामियां सामने आईं। मोरी गेट से लिए गए खोया और क्रीम के सभी 10 नमूने राज्य प्रयोगशाला की जांच में निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। यानी इन नमूनों ने खाद्य गुणवत्ता संबंधी निर्धारित मानकों को पूरा नहीं किया। हालांकि, विभाग द्वारा फूड सेफ्टी व्हील के माध्यम से जांचे गए चार अन्य नमूने, जिनमें दो पनीर और दो खोया के नमूने शामिल थे, मानकों के अनुरूप पाए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि जांच के दौरान हर नमूना असुरक्षित नहीं मिला, लेकिन कुछ स्थानों और उत्पादों में गंभीर गुणवत्ता संबंधी समस्या जरूर सामने आई।
जनकपुरी मंडी में पनीर के नमूनों में डिटर्जेंट की चिंता
जांच अभियान का एक और गंभीर पहलू जनकपुरी मंडी से सामने आया। यहां खाद्य सुरक्षा टीम ने 10 खाद्य कारोबार परिसरों का निरीक्षण किया और पनीर के 10 प्रवर्तन नमूने लिए। इसके अलावा 28 निगरानी नमूनों की मौके पर फूड सेफ्टी व्हील के जरिए जांच की गई। विभाग के अनुसार, इन जांचों में चार नमूने डिटर्जेंट की मौजूदगी के लिए सकारात्मक पाए गए। इसके बाद एहतियाती कदम उठाते हुए करीब 150 किलो पनीर और 10 किलो खोया नष्ट कर दिया गया। पनीर जैसे सीधे उपभोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थ में डिटर्जेंट की मौजूदगी उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। हालांकि मौके पर की गई जांच और अंतिम प्रयोगशाला जांच की प्रकृति अलग हो सकती है, इसलिए किसी पूरे बाजार या सभी व्यापारियों को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। विभाग ने जिन नमूनों में समस्या पाई, उन्हीं के आधार पर कार्रवाई की है।
त्योहारों में क्यों बढ़ जाता है मिलावट का खतरा?
त्योहारी मौसम में मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों की मांग अचानक बढ़ जाती है। बड़ी मात्रा में खोया, पनीर, क्रीम, मक्खन और अन्य डेयरी सामग्री बाजार में पहुंचती है। मांग और आपूर्ति के बीच अंतर का फायदा उठाकर कुछ कारोबारी कम गुणवत्ता वाली या मिलावटी सामग्री बाजार में उतारने की कोशिश कर सकते हैं। खास तौर पर खोया और पनीर जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों में होता है। ऐसे में यदि खराब या मिलावटी कच्चा माल मिठाई बनाने में इस्तेमाल हो जाए तो उसका असर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि त्योहारों से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली सरकार ने बढ़ाई निगरानी
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने अधिकारियों को त्योहारी मौसम में खाद्य सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारों की तैयारियां खाद्य सुरक्षा की कीमत पर नहीं होनी चाहिए और लोगों तक असुरक्षित या मिलावटी भोजन पहुंचने से रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग को पूरे त्योहारी मौसम में लगातार और गहन निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां भी मिलावटी या असुरक्षित खाद्य सामग्री मिलती है, वहां तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
उपभोक्ताओं के लिए भी जरूरी सावधानी
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बीच उपभोक्ताओं के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है। त्योहारों के दौरान मिठाई, पनीर, खोया और अन्य डेयरी उत्पाद खरीदते समय केवल कम कीमत देखकर सामान खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। खरीदारी करते समय उपभोक्ताओं को प्रतिष्ठित और साफ-सुथरी दुकानों को प्राथमिकता देनी चाहिए। पैकेटबंद उत्पादों में निर्माण और समाप्ति तिथि, पैकेज की स्थिति तथा लेबल संबंधी जानकारी जरूर देखनी चाहिए। खुला खोया, पनीर या क्रीम खरीदते समय उसकी गंध, रंग और रखरखाव की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। संदिग्ध या खराब दिखने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
कार्रवाई का संदेश साफ—त्योहारों की मिठास में मिलावट की जगह नहीं
दिल्ली में हुई यह कार्रवाई केवल 2,800 किलो से अधिक खाद्य सामग्री नष्ट करने तक सीमित नहीं है। यह उन कारोबारियों के लिए भी चेतावनी है जो त्योहारों में बढ़ती मांग का फायदा उठाकर खराब, अस्वच्छ या मानकों के अनुरूप नहीं होने वाले खाद्य उत्पाद बाजार में उतारने की कोशिश करते हैं। इस अभियान में जहां 2,830 किलो लावारिस खोया, धाप और मक्खन नष्ट किया गया, वहीं जनकपुरी में 150 किलो पनीर और 10 किलो खोया भी एहतियातन नष्ट किया गया। साथ ही मोरी गेट से लिए गए खोया और क्रीम के सभी 10 नमूनों का मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाना और कुछ पनीर नमूनों में डिटर्जेंट की पुष्टि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौती को रेखांकित करती है।
त्योहारों के दौरान निगरानी बनी चुनौती
त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की मांग अभी और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में दिल्ली खाद्य सुरक्षा विभाग की चुनौती केवल एक दिन की छापेमारी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि बाजार में लगातार निगरानी बनाए रखना होगी। उपभोक्ताओं की सेहत और त्योहारों की मिठास सुरक्षित रखने के लिए मिलावट के खिलाफ नियमित जांच और सख्त कार्रवाई दोनों जरूरी हैं।
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