डिलीट चैट और DVR खोलेगा प्रेमानंद के शिष्य की मौत का राज! संतों में रोष

The CSR Journal Magazine

मथुरा में हुई आत्महत्या की चौंकाने वाली घटना

मथुरा के वृंदावन में एक दर्दनाक घटना ने सभी को हिलाकर रख दिया है। संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी ने शुक्रवार सुबह 10:36 बजे अपनी जान ले ली। मध्य प्रदेश के जबलपुर के निवासी, दीपक ने दो वर्ष पहले दीक्षा ली थी और आश्रम के निकट एक अपार्टमेंट में रह रहे थे। उनकी आत्महत्या से पहले उन्होंने अपने कमरे में ग्राइंडर की मदद से गंभीर चोटें भी दी थीं। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

खून से सने कपड़ों में CCTV फुटेज ने खोली पोल

पुलिस के अनुसार, दीपक का खून से सना हुआ वीडियो फुटेज दिखाता है कि वह अपने कमरे से बाहर निकलकर कुछ समय टहलने के बाद चौथी मंजिल की छत पर गए। वहां उन्होंने जमीन पर लेटे रहने के बाद, 10:36 बजे नीचे कूदकर आत्महत्या कर ली। इस जघन्य अपराध की गहराई समझने के लिए पुलिस ने अपार्टमेंट का डीवीआर और खून के सैंपल भी ले लिए हैं। उनकी तलाश में मोबाइल डेटा रिकवरी का सहारा लिया जा रहा है।

संतों का आक्रोश, उच्चस्तरीय जांच की मांग

इस घटना के बाद बृज क्षेत्र के साधु-संतों में भारी रोष देखा जा रहा है। परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में धर्म रक्षा संघ के बैनर तले एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में संत मोहनी शरण और महंत गंगा दास महाराज ने केली कुंज की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। संतों का मानना है कि यह घटनाएं सनातन संस्कृति के लिए खतरा बन रही हैं।

स्वस्फूर्त जांच की आवश्यकता पर जोर

बैठक में संतों ने यह भी मांग की है कि साधु वेश में घूम रहे असामाजिक तत्वों की जांच की जाए। महंत गंगा दास ने आरोप लगाया कि केली कुंज के शिष्य जमीनों पर कब्जे और माफियागिरी कर रहे हैं, जिससे धार्मिक दृष्टिकोण से समुदाय को नुकसान हो रहा है। इस मुद्दे पर संतों का एकजुट होना एक महत्वपूर्ण कदम है।

पुलिस की जांच में जुटे साथी शिष्य

पुलिस ने अन्य शिष्यों से पूछताछ शुरू कर दी है ताकि मामले की गहराई को और समझा जा सके। पुलिस का मानना है कि घटना से पहले डिलीट किए गए फोटो या चैट्स ही इसका प्रमुख कारण बताने में सहायक हो सकते हैं। इस तरह की जांच से न केवल मामले का हल निकलेगा, बल्कि संतों और समुदाय के विश्वास को भी बहाल किया जा सकेगा।

संतों की निरंतर सक्रियता

संतों की यह सक्रियता समाज में एक संदेश देने का प्रयास है। उनके बीच में एकता और सहयोग की भावना को बनाए रखना आवश्यक है। उनकी ओर से उठाए गए सवाल और मांगें निश्चित रूप से इस मामले की सच्चाई को बाहर लाने में सहायक हो सकती हैं। ऐसे समय में जब समाज के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है, यह घटना निश्चित रूप से कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करती है।

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