क्या भारत में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगेगा बैन?

The CSR Journal Magazine
भारत में छोटे बच्चों की सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता ने सभी को चिंता में डाल दिया है। हाल के आँकड़ों के अनुसार, हर 10 में से 9 बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। इस स्थिति ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका को जन्म दिया है, जिसमें 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। अदालत ने केंद्र सरकार को इस याचिका पर विचार करने के लिए कहा है। इसके पीछे का तर्क यह है कि कम उम्र से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त वार्निंग

दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया है कि यह मामला सरकार की नीति और कानून बनाने से जुड़ा है। याचिका में 13 से 16 वर्ष के बच्चों के लिए सोशल मीडिया कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की भी मांग की गई है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि मौजूदा कानूनों के तहत, बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

आंकड़ों की जटिलता

क्या आप जानते हैं कि 2015 में एक अध्ययन के अनुसार, 77% बच्चों ने बताया कि उन्होंने 13 साल की उम्र से पहले फेसबुक अकाउंट बना लिया था? वहीं, 81% बच्चों ने सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की जानकारी दी थी। यह स्थिति दर्शाती है कि बच्चे कितनी जल्दी डिजिटल दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं और अपने निजी डेटा को साझा कर रहे हैं, जो उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है।

ऑनलाइन खतरों का बढ़ता सामना

बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों में अनजान लोगों से संपर्क और अनुचित कंटेंट तक पहुँच जैसी चिंताएँ शामिल हैं। 2015 के अध्ययन में यह सामने आया था कि 44% बच्चों ने कहा था कि वे ऐसे व्यक्तियों से व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहते हैं, जिनसे उनकी पहले ऑनलाइन बातचीत हो चुकी थी। यह सचमुच बच्चों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

NCPCR की रिपोर्ट का खुलासा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की एक नई स्टडी के अनुसार, 10 साल की उम्र के लगभग 37.8% बच्चे फेसबुक और 24.3% बच्चे इंस्टाग्राम पर सक्रिय हैं, जबकि इन प्लेटफार्मों पर अकाउंट बनाने की न्यूनतम आयु 13 साल है। यह स्पष्ट है कि बहुत से बच्चे अभी भी छोटी उम्र में सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। इस स्टडी में शामिल लोगों की संख्या 5,811 थी, जिसमें बच्चे, माता-पिता, शिक्षक और स्कूल शामिल थे।

हाईकोर्ट के सामने उठे मुद्दे

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में सिर्फ उम्र सीमा तय करने की मांग नहीं की गई है। इसमें बच्चों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अनुचित कंटेंट पर रोक लगाने और मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू करने की भी बात कही गई है। इसमें आईटी एक्ट 2000, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और पॉक्सो एक्ट 2012 शामिल हैं। ऐसे में यह बेहद आवश्यक है कि सरकार उचित कदम उठाए ताकि बच्चों को सुरक्षित डिजिटल दुनिया मिल सके।
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