BRICS समिट के बीच आई 2 बड़ी खबरें, यूरोप से राहत, पश्चिम एशिया में तनाव

The CSR Journal Magazine
BRICS समिट के दौरान, जहां दुनिया के नामी नेता इकट्ठा हुए हैं, वहीं यूरोप से एक महत्वपूर्ण खबर आई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने संकेत दिए हैं कि वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं। इस बातचीत का आयोजन दिसंबर में अमेरिका में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकता है। जेलेंस्की का यह कदम यूक्रेन-रूस युद्ध के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है, जिससे जंग खत्म होने की संभावना बनी है।

जेलेंस्की की स्पष्ट शर्तें

जेलेंस्की ने अपने इरादों को स्पष्ट करते हुए कहा कि अब केवल बातचीत का वक्त नहीं बल्कि नतीजों का समय है। उन्होंने कहा, “हमें नतीजे चाहिए, बस बातों का कोई मतलब नहीं होगा।” यह बयान इस बात का संकेत है कि वे ठोस परिणामों की उम्मीद कर रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी दूतों की हालिया यात्राओं को भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा हो सकती है।

पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

वहीं दूसरी ओर, पश्चिम एशिया से चिंता बढ़ाने वाली खबरें आई हैं। ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ब्रिक्स सम्मेलन में शांति की बातें कर रहे हैं, लेकिन समुद्री क्षेत्र में बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को हिला दिया है। हल ही में, कच्चे तेल की कीमतों में 8% की भारी वृद्धि हुई है। जिसने वैश्विक बाजार में एक नई हलचल शुरू कर दी है।

तेल बाजार का नया गणित

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने पिछले एक हफ्ते में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत कथित तौर पर 104.61 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंची है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 100.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। भारत के वायदा बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दिख गई है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। अगर ये कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर रहती हैं, तो इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा और महंगाई का खतरा भी मौजूद रहेगा। इसके अलावा, सरकारी तेल कंपनियों का मुनाफा भी घट सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था की स्थिती और भी नाजुक हो सकती है।

आने वाले महीनों की अहमियत

BRICS समिट के बीच इन दो बड़ी खबरों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले महीने वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। जहां एक तरफ G20 सम्मेलन में पुतिन और जेलेंस्की की संभावित मुलाकात से यूक्रेन युद्ध खत्म होने की आशा बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।

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