बिहार में बाढ़ का बढ़ा खतरा: नेपाल और झारखंड की भारी बारिश से बढ़ा नदियों का जलस्तर, पटना समेत कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात; 5 लाख से अधिक लोग प्रभावित
बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। नेपाल और पड़ोसी राज्य झारखंड में हुई भारी बारिश के बाद गंगा समेत राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कई जगह नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और निचले इलाकों में पानी फैलने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। राज्य सरकार ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव व्यवस्था तेज कर दी है। शुक्रवार को स्थिति को देखते हुए 33 बचाव दल—6 NDRF और 27 SDRF तैनात किए गए, जबकि करीब 693 सरकारी नावों को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया गया।
गंगा, कोसी और गंडक उफान पर
जल संसाधन विभाग के आधिकारिक बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़ों के मुताबिक 4 सितंबर को गंगा, कोसी और गंडक सहित कई नदियों के विभिन्न निगरानी केंद्रों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। उदाहरण के तौर पर बक्सर में गंगा 60.49 मीटर पर थी, जबकि खतरे का स्तर 60.32 मीटर है। भागलपुर में गंगा 33.88 मीटर दर्ज की गई, जो 33.68 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है। सुपौल के वीरपुर में कोसी भी 74.70 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर 75.20 मीटर पर दर्ज हुई।
पटना में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ा
राजधानी पटना में गंगा की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है। दीघा घाट, गांधी घाट, हथिदह और मनेर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा बक्सर, मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में भी नदी का जलस्तर खतरे की सीमा पार कर चुका है। गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 1 सितंबर की सुबह 49.40 मीटर था। यह 2 सितंबर की शाम बढ़कर 49.98 मीटर और 3 सितंबर की सुबह 50.18 मीटर हो गया। 3 सितंबर की दोपहर तक जलस्तर 50.25 मीटर पहुंच गया था, जो खतरे के निशान से करीब 1.65 मीटर ऊपर था। जल संसाधन विभाग ने इसके बाद उच्चतम बाढ़ स्तर यानी एचएफएल (Highest Flood Level) को पार करने की आशंका जताई थी। पटना के कई नदी किनारे और निचले इलाकों में पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। कुछ स्थानों पर सड़कों और संपर्क मार्गों पर भी पानी का असर देखा गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण पटना के घाटों और नदी किनारे के इलाकों में प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती है।
एक नहीं, कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर
बिहार की मुश्किल सिर्फ गंगा तक सीमित नहीं है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरासमेत कई नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। पुनपुन नदी पटना के श्रीपालपुर और पुनपुन क्षेत्र में खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई, जबकि घाघरा नदी सीवान के दरौली में भी खतरे के स्तर को पार कर गई। आधिकारिक आंकड़ों में गंडक और कर्मनाशा जैसी नदियों के कई निगरानी केंद्रों पर भी खतरे के स्तर से ऊपर पानी दर्ज किया गया।
13 जिलों पर बाढ़ का खतरा
राज्य में बाढ़ के खतरे को देखते हुए 13 जिलों को लेकर विशेष सतर्कता की जानकारी सामने आई है। वहीं कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पहले ही बन चुकी है। पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, भोजपुर, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा और कटिहार के निचले इलाकों में पानी फैलने की खबरें सामने आई हैं। एक सरकारी अपडेट के मुताबिक राज्य के 16 जिलों में बाढ़ का असर बताया गया है और पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, सूखा राशन, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण
बढ़ते जलस्तर के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर राहत एवं बचाव अभियान तेज करने तथा तटबंधों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। सरकार का कहना है कि प्रभावित लोगों तक समय पर भोजन, पेयजल और जरूरी सहायता पहुंचाना प्राथमिकता है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
33 बचाव टीमें और करीब 700 नावें मैदान में
बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने बड़े स्तर पर बचाव संसाधन तैनात किए हैं। 6 एनडीआरएफ और 27 एसडीआरएफ टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगाया गया है। इनके साथ लगभग 693 सरकारी नावेंराहत एवं बचाव कार्यों में इस्तेमाल की जा रही हैं। प्रभावित इलाकों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में कैंप कर रही हैं ताकि पानी से फैलने वाली बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर समय रहते नियंत्रण किया जा सके।
तटबंधों की सुरक्षा पर खास नजर
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती तटबंधों और सुरक्षा दीवारों को सुरक्षित रखना होती है। प्रशासन ने संवेदनशील तटबंधों की लगातार निगरानी शुरू कर दी है। पटना में जल सुरक्षा से जुड़े ढांचे पर भी मरम्मत और निगरानी का काम तेज किया गया है। पुनपुन क्षेत्र में तटबंध से जुड़ी समस्या ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में अधिकारियों को किसी भी कमजोर हिस्से पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील
प्रशासन ने नदी, घाट, तटबंध और जलजमाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की है। लोगों को विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों को ऐसे स्थानों से दूर रखने की सलाह दी गई है। तेज बहाव वाले पानी में तैरने या बिना जरूरत नाव से यात्रा करने से भी बचने को कहा गया है। बाढ़ के पानी में मछली पकड़ने या उसका सेवन करने से भी लोगों को सावधान किया गया है, क्योंकि दूषित पानी के कारण स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा हो सकते हैं।
आगे भी सतर्कता जरूरी
नेपाल और बिहार में बारिश तथा जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने बिहार के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है, ऐसे में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता जान-माल की सुरक्षा, निचले इलाकों से लोगों का सुरक्षित स्थानांतरण, तटबंधों की निगरानी और प्रभावित परिवारों तक भोजन-पानी पहुंचाना है। अधिकारियों के अनुसार अब तक बड़े पैमाने पर जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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