आदिवासी रिसर्च संस्थानों को मजबूत करने के लिए भुवनेश्वर घोषणा पत्र, बना राष्ट्रीय रोडमैप

The CSR Journal Magazine
ओडिशा सरकार और केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय के सहयोग से भुवनेश्वर में ‘जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) के सशक्तिकरण’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का समापन भुवनेश्वर घोषणा पत्र के साथ हुआ, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यशाला में देशभर से लगभग 200 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

खास सत्रों में चर्चा

कार्यशाला के पहले दिन विभिन्न विषयों पर चार विशेष सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में आदिवासी भाषाओं, परंपराओं, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि जानकारी का व्यवस्थित डॉक्यूमेंटेशन किया जाए और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए।

आधुनिक तकनीकों का उपयोग

दूसरे सत्र में आदिवासी विकास से जुड़ी रिसर्च को मजबूत करने पर चर्चा हुई। तीसरे सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) जैसे तकनीकों के उपयोग पर बात की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि नई तकनीकें आदिवासी क्षेत्रों के विकास में मदद कर सकती हैं और सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचा सकती हैं। चौथे सत्र में संस्थागत सुधार और मानव संसाधन के ट्रेंड पर चर्चा की गई।

दूसरे दिन की गतिविधियाँ

कार्यशाला के दूसरे दिन सभी कार्य समूहों के प्रतिनिधियों ने पहले दिन की चर्चाओं के मुख्य परिणामों को प्रस्तुत किया। इसके बाद, जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ चर्चा कर सुझावों को राष्ट्रीय कार्य योजना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की परिकल्पना

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने कहा कि इन अनुसंधान संस्थानों को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त एक्सीलेंस सेंटर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि संस्थानों को अधिक फाइनेंशियल ऑटोनॉमी की आवश्यकता है और इसके लिए उन्हें विभिन्न एजुकेशनल संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करना होगा।

भुवनेश्वर घोषणा पत्र में संकल्प

भुवनेश्वर घोषणा पत्र में आदिवासी भाषाओं, लोक परंपराओं और विलुप्त होती कला को संरक्षित करने का संकल्प लिया गया है। इसके लिए डिजिटल डॉक्यूमेंट तैयार करने और आदिवासी युवाओं को इस अभियान से जोड़ने का प्रावधान है। यह घोषणा पत्र आदिवासी रिसर्च संस्थानों को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक फ्रेमवर्क का कार्य करेगा।

प्रशंसा पत्र प्राप्त संस्थान

इस राष्ट्रीय कार्यशाला में सात जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को प्रशंसा पत्र दिए गए। इनमें छत्तीसगढ़, ओडिशा, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, केरल, तेलंगाना, और झारखंड के संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों ने आदिवासी अनुसंधान और विकास में उत्कृष्टता का परिचय दिया है।

डिजिटल माध्यमों का महत्व

आदिवासी रिसर्च संस्थानों को आधुनिक रूप में लाने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल आदिवासी समाज की आवाज को मजबूत करेगा बल्कि अनुसंधान को भी प्रगति की ओर बढ़ाएगा।

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