वित्त मंत्री सीतारमण का बड़ा एलान, विकसित भारत के लिए बनेगा हाई-पावर्ड पैनल

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भारत के बैंकिंग सेक्टर में होगा बड़ा बदलाव!,वित्त मंत्री ने दी हाई-पावर्ड कमेटी की जानकारी

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज भारतीय बैंकिंग इतिहास के एक नए और स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत की। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित दो-दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026’ (PSB Confluence 2026) के भव्य उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में आमूलचूल और संरचनात्मक बदलावों की एक श्रृंखला की घोषणा की। केंद्रीय बजट 2026-27 में किए गए वादों और प्रस्तावों को अमली जामा पहनाते हुए उन्होंने एलान किया कि सरकार बेहद जल्द ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर एक उच्च-स्तरीय समिति (High-Powered Committee) के गठन और उसके सदस्यों की अधिसूचना जारी करने जा रही है।

विकसित भारत 2047 की ओर

इस ऐतिहासिक सम्मेलन में देश के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के प्रबंध निदेशकों (MDs), मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वरिष्ठ अधिकारियों और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के शीर्ष नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया। वित्त मंत्री का यह नीतिगत रोडमैप ऐसे समय में आया है जब देश वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के अपने दीर्घकालिक विजन पर तेजी से काम कर रहा है। वित्त मंत्री ने साफ किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग क्षेत्र रीढ़ की हड्डी की तरह काम करेगा।

ऐतिहासिक वित्तीय सुदृढ़ता: सुधारों के लिए एक आदर्श लॉन्चपैड

अपने संबोधन की शुरुआत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय बैंकों की वर्तमान वित्तीय सेहत की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज हमारे बैंक इतिहास के सबसे मजबूत और सुरक्षित दौर से गुजर रहे हैं। पिछले एक दशक में सरकार द्वारा अपनाई गई ‘4R’ रणनीति—रिकग्निशन (पहचान), रेजोल्यूशन (समाधान), रीकैपिटलाइजेशन (पुनर्पूंजीकरण) और रिफॉर्म्स (सुधार) के कारण आज बैंकों की बैलेंस शीट पूरी तरह साफ हो चुकी है।

रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा और न्यूनतम NPA

वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) के हालिया आंकड़ों का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुल मिलाकर 1.98 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा (Net Profit) दर्ज किया है। इसके साथ ही बैंकों का सकल गैर-निष्पादित आस्ति (Gross NPA) अनुपात घटकर बहु-दशकीय निचले स्तर (Multi-decade low) पर आ गया है। वित्त मंत्री ने बैंकिंग लीडर्स को प्रेरित करते हुए कहा, “जब आपकी स्थिति कमजोर होती है, तब आप केवल खुद को बचाने या संकट प्रबंधन (Crisis Management) में लगे रहते हैं। लेकिन आज भारतीय बैंकिंग क्षेत्र एक अभूतपूर्व और मजबूत स्थिति में खड़ा है। पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) और मजबूत लाभप्रदता के इस दौर का लाभ उठाकर हमें अगले स्तर के ऐसे साहसिक सुधारों को लागू करना चाहिए जो देश को अगले दो दशकों तक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाए रखें।”

‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ समिति की भूमिका

वित्त मंत्री द्वारा घोषित उच्च-स्तरीय समिति का मुख्य कार्य अगले 20 वर्षों के लिए भारतीय बैंकिंग के लिए एक व्यापक, भविष्योन्मुखी और व्यावहारिक नीतिगत ढांचा (Policy Framework) तैयार करना होगा। यह समिति न केवल बैंकों के संचालन और प्रशासन (Governance) की समीक्षा करेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच भारतीय बैंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें। सीतारमण ने स्पष्ट किया कि जैसे ही यह समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपेगी, सरकार बिना किसी प्रशासनिक देरी के इसके क्रियान्वयन के लिए ‘बटन दबाने’ को तैयार रहेगी। सरकार का इरादा है कि इस समिति के सुझावों को तुरंत लागू कर बैंकिंग सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, समावेशी और तकनीक-संचालित बनाया जाए।

भविष्य के सुधारों के 7 मुख्य स्तंभ (7 Core Themes)

वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने इस दो-दिवसीय मंथन के लिए सात विशेष विषय-पत्र (Thematic Papers) तैयार किए हैं, जो इस उच्च-स्तरीय समिति के काम का मुख्य आधार बनेंगे। वित्त मंत्री ने इन सातों विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डिपॉजिट मोबिलाइजेशन (जमा राशि जुटाना)

वित्त मंत्री ने बदलते घरेलू बचत पैटर्न पर चिंता और ध्यान दोनों आकर्षित किया। वर्तमान में आम नागरिक पारंपरिक बैंक सावधि जमा (FD) के बजाय म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और अन्य निवेश साधनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। सीतारमण ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे अपनी मुख्य बैंकिंग ताकत पर लौटें और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए, अभिनव और सुरक्षित जमा उत्पाद (Deposit Products) पेश करें।

युवाओं के लिए बैंकिंग (Banking for Youth)

भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे युवा जनसांख्यिकी (Demographic Dividend) वाला देश है। देश की लगभग 29 प्रतिशत आबादी 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में आती है। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को पारंपरिक ऋण देने के तरीकों से हटकर युवाओं की जरूरतों के अनुसार लाइफ-साइकिल आधारित बैंकिंग समाधान तैयार करने होंगे, जिसमें शिक्षा ऋण (Education Loans), स्टार्टअप फंडिंग और डिजिटल-फर्स्ट उत्पाद शामिल हों।

निवेश चक्र को बढ़ावा (Supporting the Investment Cycle)

देश में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास और औद्योगिक विस्तार के लिए भारी-भरकम पूंजी की आवश्यकता है। वित्त मंत्री ने बैंकों से कहा कि वे बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट ऋण (Corporate Lending) देने के लिए अपनी जोखिम मूल्यांकन क्षमताओं (Risk Assessment Capabilities) को बढ़ाएं। ग्रीन एनर्जी, नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) और बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स को समय पर वित्तीय मदद देना बैंकों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCCs) का वित्तपोषण

भारत तेजी से दुनिया के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के सबसे बड़े हब के रूप में उभर रहा है। ये केंद्र न केवल तकनीकी नवाचार कर रहे हैं बल्कि देश में लाखों उच्च-कुशल रोजगार भी पैदा कर रहे हैं। बैंकों को इन बहुराष्ट्रीय केंद्रों की विशिष्ट वित्तीय आवश्यकताओं को समझने और उन्हें वैश्विक स्तर के बैंकिंग समाधान भारत में ही प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।

कृषि और बागवानी मूल्य श्रृंखला (Value Chain Financing)

पारंपरिक कृषि ऋण (जैसे केवल फसल के लिए लोन देना) से आगे बढ़कर अब समय एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित करने का है। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को कोल्ड स्टोरेज, आधुनिक वेयरहाउसिंग, कृषि लॉजिस्टिक्स और बागवानी मूल्य श्रृंखला (Horticulture Value Chain) को बड़े पैमाने पर लोन देना चाहिए ताकि किसानों की आय दोगुनी हो सके और खाद्यान्न की बर्बादी को रोका जा सके।

क्रेडिट कार्ड व्यवसाय का पुनर्गठन (Reimagining Credit Cards)

डिजिटल अर्थव्यवस्था के इस दौर में क्रेडिट कार्ड और डिजिटल उपभोग ऋण (Consumption Credit) में भारी उछाल आया है। सीतारमण ने बैंकों को आगाह किया कि वे तकनीकी प्रगति का लाभ अवश्य उठाएं, लेकिन साथ ही जिम्मेदार अंडरराइटिंग (Responsible Underwriting) और जोखिम नियंत्रण के कड़े मानकों का पालन करें, ताकि अनियंत्रित खुदरा ऋण (Unsecured Retail Loans) के कारण भविष्य में कोई प्रणालीगत जोखिम (Systemic Risk) न पैदा हो।

प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को ऋण (Priority Sector Lending – PSL)

समावेशी विकास के संकल्प को दोहराते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचनी चाहिए। MSMEs, महिला उद्यमियों, और ग्रामीण कारीगरों को बिना किसी कठिनाई के ऋण मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पीएसएल के तहत ऋण देने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाया जाएगा।

समय कम, संकल्प बड़ा: 2047 की दौड़

वित्त मंत्री ने बैंकर्स को समय की महत्ता याद दिलाते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा, “हम आज वर्ष 2026 में खड़े हैं। आजादी के 100 वर्ष पूरे होने और ‘विकसित भारत’ के हमारे राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने के लिए अब हमारे पास 20 वर्ष से भी कम का समय बचा है। बैंकिंग क्षेत्र को अपनी सुस्ती छोड़नी होगी और देश की आर्थिक विकास दर को 8 प्रतिशत से ऊपर बनाए रखने के लिए उत्प्रेरक (Catalyst) की भूमिका निभानी होगी।” उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित सभी हितधारकों से अपील की कि वे इस दो-दिवसीय कॉन्फ्लुएंस में गहन विचार-विमर्श करें, अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं (Global Best Practices) को साझा करें और एक ऐसा व्यावहारिक खाका तैयार करें जिसे सरकार तुरंत लागू कर सके।

बैंकिंग उद्योग और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

वित्त मंत्री की इन दूरगामी घोषणाओं का बैंकिंग जगत और वित्तीय विशेषज्ञों ने दिल खोलकर स्वागत किया है। भारतीय बैंक संघ (IBA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “वित्त मंत्री द्वारा ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ समिति के गठन का निर्णय समय की मांग है। पिछले कुछ वर्षों में बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट को सुधारा है, और अब समय आ गया है कि हम रक्षात्मक बैंकिंग (Defensive Banking) से बाहर निकलकर आक्रामक और विकास-उन्मुख बैंकिंग (Growth-oriented Banking) की ओर बढ़ें।” बाजार विश्लेषकों का भी मानना है कि जमा राशि जुटाने (Deposit Mobilization) और क्रेडिट कार्ड व्यवसाय के पुनर्गठन पर वित्त मंत्री का विशेष ध्यान यह दर्शाता है कि सरकार बैंकिंग क्षेत्र में आने वाले संभावित जोखिमों के प्रति पूरी तरह सतर्क है और समय रहते उनके समाधान के उपाय खोज रही है।

 आगे की राह- भारतीय बैंकिंग सेक्टर की ऊंची छलांग

‘पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026’ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ये घोषणाएं महज प्रशासनिक सुधार नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय वित्तीय तंत्र को 21वीं सदी की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने का एक महा-अभियान है। मजबूत वित्तीय स्थिति, न्यूनतम एनपीए और रिकॉर्ड मुनाफे के रथ पर सवार होकर भारतीय बैंक अब एक ऐसी छलांग लगाने को तैयार हैं, जो न केवल देश के भीतर आर्थिक समृद्धि लाएगी बल्कि वैश्विक पटल पर भी भारतीय बैंकों का डंका बजाएगी। आने वाले दिनों में जब इस उच्च-स्तरीय समिति के सदस्यों और इसकी विस्तृत कार्ययोजना (Terms of Reference) की घोषणा होगी, तो पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि यह समिति ‘विकसित भारत’ की इस यात्रा को कितनी रफ्तार देती है।

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