विकसित भारत 2047 पर मोदी सरकार का महामंथन: सेवा तीर्थ में दो दिवसीय चिंतन शिविर शुरू

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‘विकसित भारत 2047’ पर मोदी सरकार का महामंथन: नई दिल्ली के ‘सेवा तीर्थ’ में दो दिवसीय चिंतन शिविर शुरू

स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष यानी साल 2047 तक देश को एक महाशक्ति और विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आज से शुरू हो गया है। नई दिल्ली के ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित हो रहे इस महामंथन में सभी कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ-साथ शीर्ष नौकरशाह शामिल हो रहे हैं। इस दो दिवसीय गहन समीक्षा और रणनीतिक बैठक का मुख्य उद्देश्य अब तक के कामकाज का लेखा-जोखा लेना तथा ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को अमली जामा पहनाने के लिए अगले चरण की प्राथमिकताओं और बड़े सुधारों को रेखांकित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस महामंथन के सभी सत्रों में मौजूद रहकर मंत्रियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और विभिन्न मंत्रालयों द्वारा तैयार किए गए आगामी रोडमैप की समीक्षा कर रहे हैं।

मध्यावधि समीक्षा और भविष्य की नीतियां

यह चिंतन शिविर सरकार की एक महत्वपूर्ण मध्यावधि समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस बैठक का मुख्य ध्यान पिछले कुछ वर्षों में शुरू की गई सरकारी योजनाओं के प्रदर्शन का आकलन करना और भविष्य के लिए ठोस नीतियां तैयार करना है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ‘विकसित भारत 2047’ केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के भविष्य को बदलने का एक गंभीर और समयबद्ध लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी मंत्रियों को अपने-अपने विभागों में निर्णय लेने की गति को दोगुना करने और फाइलों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्रियों को बांटे गए विशेष कार्य समूह

बैठक को सुचारू और अधिक परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए पूरी मंत्रिपरिषद को कई विशेष समूहों में विभाजित किया गया है। इन समूहों को अलग-अलग कोर विषयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंथन के मुख्य विषयों में व्यक्तिगत कार्यक्षमता को बढ़ाना, जनता के साथ प्रभावी और पारदर्शी संचार स्थापित करना, योजनाओं का पूरी एकाग्रता के साथ धरातल पर क्रियान्वयन (फोकस्ड इम्प्लीमेंटेशन), मंत्रालयों के कामकाज को आधुनिक बनाना और सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ जुड़ाव बढ़ाना शामिल है। समन्वय करने वाले मंत्रियों के बीच तैयारियों को लेकर पहले ही कई दौर की अनौपचारिक बैठकें हो चुकी थीं, जिसके बाद आज से मुख्य सत्रों की शुरुआत हुई है। सभी कैबिनेट मंत्रियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने मंत्रालयों का ऐसा विजन डॉक्यूमेंट पेश करें जो सीधे तौर पर आम नागरिक के जीवन को आसान बनाने से जुड़ा हो।

सात रणनीतिक ताकतें: शक्ति की ‘सप्तधारा’ पर विशेष ध्यान

इस चिंतन शिविर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहले पेश किए गए विकसित भारत के उस ब्लूप्रिंट पर विस्तृत चर्चा हो रही है, जिसे उन्होंने ‘शक्ति की सप्तधारा’ का नाम दिया था। यह सप्तधारा सात रणनीतिक ताकतों पर आधारित है-
मैन्युफैक्चरिंग पावर: भारत को डिजाइनिंग से लेकर प्रोडक्शन तक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल सप्लाई चेन) का मुख्य केंद्र बनाना।
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण: भारतीय मोटे अनाजों (मिलेट्स) और पारंपरिक मसालों को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित कर किसानों की आय बढ़ाना।
प्रौद्योगिकी और नवाचार: क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर निर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में भारत को दुनिया का नेतृत्वकर्ता बनाना।
गतिशक्ति: हाई-स्पीड रेल, हाइवेज और पोर्ट-लेड डेवलपमेंट के माध्यम से देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी कटौती करना।
रिफॉर्म्स और गवर्नेंस: प्रशासनिक सुधारों के जरिए निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को सरल बनाना और लालफीताशाही को पूरी तरह समाप्त करना।
रक्षा क्षमता: घरेलू स्तर पर उन्नत रक्षा उपकरणों का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर भारत को दुनिया का शीर्ष रक्षा निर्यातक बनाना।
सिविल डिफेंस और ग्रीन एनर्जी: पर्यावरण स्थिरता के तहत साल 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना और नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों को बढ़ावा देना।

प्रशासनिक सुधार और ‘ईज ऑफ लिविंग’ मूल मंत्र

बैठक के पहले दिन प्रशासनिक सुधार और जन-सुविधाओं पर सबसे अधिक जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का ध्यान ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने की सुगमता) के साथ-साथ ‘ईज ऑफ लिविंग’ (जीवन की सुगमता) को सर्वोच्च स्तर पर ले जाने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी नीति या योजना तभी सफल मानी जाएगी जब उसका लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचे। इसके लिए तकनीकी नवाचारों का उपयोग करने और सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटल व पारदर्शी बनाने पर विस्तार से बात की गई।

युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी से बनेगा ‘जन आंदोलन’

सरकार इस विजन को केवल एक प्रशासनिक कवायद तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे एक राष्ट्रव्यापी ‘जन आंदोलन’ में बदलना चाहती है। चिंतन शिविर में इस बात पर भी रणनीति बनाई जा रही है कि देश के युवाओं और देश के वरिष्ठ नागरिकों को इस मुहिम से कैसे जोड़ा जाए। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से ‘विकसित भारत @2047: युवाओं की आवाज’ पहल को और तेज किया जाएगा ताकि देश की ‘अमृत पीढ़ी’ राष्ट्रीय योजनाओं और लक्ष्यों के निर्धारण में अपने सुझाव और विचार सीधे सरकार तक पहुंचा सके। वहीं, समाज के अनुभवी और वरिष्ठ नागरिकों को मेंटर्स के रूप में शामिल करने की योजना है जो स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों का मार्गदर्शन कर सकें।

2021 से चल रही है पृष्ठभूमि की तैयारी

मालूम हो कि विकसित भारत को लेकर सरकार के भीतर जमीनी स्तर पर काम साल 2021 से ही चल रहा है। इस विजन और इसके अल्पकालिक व दीर्घकालिक रोडमैप को तैयार करने के लिए सचिवों के 10 क्षेत्रीय समूह (सेक्टोरल ग्रुप्स) गठित किए गए थे। इन समूहों ने उद्योग जगत, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और विभिन्न राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करके एक विस्तृत खाका तैयार किया है। अब मंत्रिपरिषद के इस चिंतन शिविर के जरिए उस खाके को व्यावहारिक नीतियों और कानूनों में बदलने की अंतिम तैयारी की जा रही है।

सामूहिक प्रयास से सिद्ध होगा संकल्प

यह चिंतन शिविर इस मायने में बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए सरकार अपनी भावी प्राथमिकताओं को पूरी तरह स्पष्ट कर रही है। प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को दोहराते हुए मंत्रियों से कहा गया है कि वे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करें ताकि विकास की रफ्तार संतुलित बनी रहे। दो दिनों तक चलने वाले इस महामंथन के समापन पर प्रत्येक मंत्रालय के लिए एक स्पष्ट ‘एक्शन प्लान’ जारी होने की उम्मीद है, जो अगले कुछ वर्षों के लिए सरकार के काम की दिशा और दशा तय करेगा। देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही इस महासंकल्प को सिद्ध किया जा सकता है, और इस दिशा में यह बैठक मोदी सरकार का एक बड़ा और निर्णायक कदम है।

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