असम में एयरफोर्स का विमान क्रैश, शहीद जितेंद्र शर्मा के गांव में गूंज रहे जयकारे, देश ने खोए उत्तर प्रदेश और बिहार के 5 सपूत
असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर वायुसेना का AN-32 मालवाहक विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अलीगढ़ के वीर सपूत सार्जेंट जितेंद्र शर्मा सहित 5 जवान शहीद हो गए। यह दर्दनाक हादसा शनिवार, 13 जून 2026 को सुबह करीब 10:00 बजे हुआ, जब रूटीन उड़ान के बाद विमान रनवे पर उतरते समय क्रैश होकर दो हिस्सों में टूट गया और उसमें भीषण आग लग गई।
असम विमान क्रैश की दिल दहला देने वाली घटना
असम में एक विमान दुर्घटना की खबर ने पूरे देश को शोक में डाल दिया है। इस हादसे में अलीगढ़ के निवासी शहीद जितेंद्र शर्मा की मौत हो गई। शहीद का पार्थिव शरीर आज सोमवार को गांव में पहुंचेगा, जिसे लेकर गांववालों में मायूसी और गर्व का मिला-जुला माहौल है। पारिवारिक सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन गांव में जयकारे भी गूंज रहे हैं।
मां से छिपाया गया बेटे की मौत का सच
शहीद जितेंद्र शर्मा की 72 वर्षीय वृद्ध मां राजेश्वरी देवी को इस गहरे सदमे से बचाने के लिए पूरे गांव और परिवार ने मिलकर इस खबर को उनसे छिपाया हुआ है। मां के पूछने पर कि “आज जितेंद्र का फोन क्यों नहीं आया?”, बड़े भाई ने उन्हें ढांढस बंधाया कि वह जहाज पर ड्यूटी पर हैं और व्यस्त हैं। मां को भनक न लगे, इसलिए घर के भीतर महिलाओं के जाने पर भी रोक लगाई गई है ताकि कोई रो न पड़े।
अधूरी रह गई शादी की खुशियां, सिर पर सेहरा सजने की थी तैयारी
31 वर्षीय जितेंद्र शर्मा की शादी की बातें जोर-शोर से चल रही थीं। परिवार ने उनके लिए लड़की भी देख ली थी, जो चंडीगढ़ में प्रोफेसर हैं। जितेंद्र हाल ही में छुट्टी बिताकर 5 जून को ही वापस ड्यूटी पर लौटे थे। जाते समय उन्होंने मां से वादा किया था, “चलूं मां… आऊंगा फिर।” लेकिन किसे पता था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात थी। जितेंद्र की चारों बहनें अपने सबसे छोटे भाई को दूल्हा बनते देखने के लिए बेहद उत्साहित थीं, जो सपना अब हमेशा के लिए अधूरा रह गया।
परिवार में मातम, लेकिन गांव में जयकारे
शहीद जितेंद्र के परिवार में मातम छाया हुआ है। उनकी मां राजेश्वरी देवी को परिवार ने घर में अकेला रखा है जबकि बहनें और भाई चाचा के घर पर रुके हैं। परिवार के लोग एक दूसरे को सांत्वना देने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि गांव में शहीद जितेंद्र के प्रति आभार व्यक्त करते हुए जगह-जगह बैनर और होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इन पर लिखा है- ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा।’
रनवे पर भयानक हादसा
भारतीय वायुसेना का यह AN-32 विमान शनिवार सुबह 9:53 बजे उड़ान भरकर 10:00 बजे जोरहाट के रौरिया एयरबेस पर लैंड कर रहा था। लैंडिंग के समय नियंत्रण खोने के कारण विमान रनवे से फिसल गया और टैक्सीवे से टकराकर दो टुकड़ों में बंट गया, जिससे तुरंत आग लग गई। वायुसेना ने हादसे के असल कारणों का पता लगाने के लिए ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ के आदेश दे दिए हैं। वहीं, हादसे में बाल-बाल बचे को-पायलट का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
देश ने खोए 5 जांबाज वायु योद्धा
इस दर्दनाक विमान हादसे में देश सेवा करते हुए कुल 5 सैन्यकर्मियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है-
स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह (बागपत, उत्तर प्रदेश)
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार (जहानाबाद, बिहार)
सार्जेंट जितेंद्र शर्मा (अलीगढ़, उत्तर प्रदेश)
अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत (डीडवाना-कुचामन, राजस्थान)
अग्निवीरवायु दानिश आलम (भोजपुर, बिहार)
जितेंद्र शर्मा की पृष्ठभूमि
31 वर्षीय जितेंद्र शर्मा अलीगढ़ के गांव सालपुर के रहने वाले थे और वे घर में सबसे छोटे थे। उनके परिवार में 7 भाई-बहन हैं। उनके पिता करुआ शर्मा का 12 साल पहले निधन हो गया था, जिसके बाद उनकी मां ने परिवार का पालन-पोषण किया। सार्जेंट जितेंद्र शर्मा ने 1 जनवरी 2015 को वायुसेना जॉइन की थी और लगभग 11 वर्षों तक देश की गौरवपूर्ण सेवा की। हाल ही में वह छुट्टी लेकर अपने गांव आए थे। आज उनके पैतृक गांव सालपुर (टप्पल, अलीगढ़) में जहाँ एक तरफ आँसुओं का सैलाब है, वहीं दूसरी तरफ भारत माता के जयकारों और “शहीद जितेंद्र अमर रहें” के नारों से पूरा आसमान गूंज रहा है।
गांव में शहीद का सम्मान
गांव में जितेंद्र की बहादुरी के लिए लोग उन्हें याद कर रहे हैं। शहीद का नाम लेते ही लोग न सिर्फ गर्व महसूस कर रहे हैं, बल्कि उन्हें कृतज्ञता के साथ याद भी कर रहे हैं। हर किसी की जुबान पर उनकी बहादुरी के किस्से हैं जो एक मिसाल बन गए हैं। जितेंद्र शर्मा का बलिदान हमेशा इस गांव के लोगों के दिलों में बसा रहेगा।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

