मुंबई में पानी कटौती के बीच BMC का बड़ा फैसला, धूल और वायु प्रदूषण रोकने के लिए रोज धुलेंगी सड़कें

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जलसंकट के बीच धूल और प्रदूषण पर BMC का वार, 8.25 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा, 377 सड़कों की होगी नियमित धुलाई

मुंबई में एक ओर पानी की कमी को देखते हुए जलापूर्ति में कटौती और पानी बचाने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने वायु प्रदूषण और सड़क की धूल पर नियंत्रण के लिए शहर की प्रमुख सड़कों को नियमित रूप से पानी से धोने की योजना तैयार की है। इसके लिए सात परिमंडलों में टैंकर सेवा लेने और करीब 8.25 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रस्ताव के तहत बारिश के मौसम को छोड़कर करीब 150 दिनों तक सड़क धुलाई की जाएगी। इस फैसले ने इसलिए भी चर्चा तेज कर दी है क्योंकि मुंबई और महाराष्ट्र के कई हिस्से इस समय कम बारिश और जलसंकट की चिंता से जूझ रहे हैं। BMC के अनुसार मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली सात झीलों में मौजूदा भंडार अगले साल मई तक ही चलने का अनुमान है। ऐसे में नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब पीने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी बचाने की कोशिश की जा रही है, तब सड़कों की धुलाई के लिए बड़ी मात्रा में पानी का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा।

8.25 करोड़ रुपये की टैंकर सेवा

BMC की योजना के अनुसार शहर के सात परिमंडलों में जेटिंग व्यवस्था वाले पानी के टैंकर किराये पर लिए जाएंगे। इन टैंकरों की क्षमता 2,000, 5,000 और 10,000 लीटर होगी। यह सेवा करीब 150 दिनों के लिए ली जाएगी और इसका उद्देश्य धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करना तथा प्रमुख सड़कों की नियमित सफाई सुनिश्चित करना है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस काम के लिए प्रस्तावित राशि 8 करोड़ 25 लाख 33 हजार 48 रुपये है। यह व्यवस्था शहर के 26 प्रशासनिक वार्डों में काम करेगी और टैंकरों को सात परिमंडलों के हिसाब से संचालित किया जाएगा। सड़क की सतह पर जमा धूल, मिट्टी और निर्माण कार्यों से निकलने वाले बारीक कणों को पानी के उच्च दबाव से हटाने की योजना है। इसका विशेष महत्व उन इलाकों में होगा जहां बड़े पैमाने पर मेट्रो, सड़क, पुल, इमारतों के पुनर्विकास और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के कारण लगातार धूल उड़ती रहती है।

करीब 377 सड़कों पर नजर

BMC की सड़क धुलाई योजना का दायरा भी काफी बड़ा बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 677 किलोमीटर लंबाई वाली 377 सार्वजनिक सड़कों को नियमित सफाई के लिए चिन्हित किया गया है। इन सड़कों पर टैंकरों के माध्यम से पानी का छिड़काव और उच्च दबाव से सफाई की जाएगी। महानगरपालिका का मानना है कि मानसून समाप्त होने के बाद सड़क की सतह पर जमा मिट्टी और धूल सूखकर हवा में उड़ने लगती है। वाहनों की आवाजाही के कारण यह धूल और अधिक फैलती है। विशेषकर भारी यातायात वाले मार्गों, निर्माण स्थलों के आसपास और सड़क किनारे जमा मलबे वाले क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर हो जाती है।

बारिश खत्म होते ही क्यों बढ़ता है धूल प्रदूषण?

मुंबई में मानसून के दौरान लगातार बारिश होने से वातावरण में मौजूद धूल और कई तरह के प्रदूषक नीचे बैठ जाते हैं। लेकिन बारिश कम होते ही सड़क की सूखी मिट्टी, निर्माण सामग्री, वाहनों से उठने वाली धूल और खुले में पड़ा मलबा दोबारा हवा में फैलने लगता है। अक्टूबर की गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियां इस समस्या को और बढ़ा सकती हैं। हाल के दिनों में मुंबई की हवा की गुणवत्ता में भी गिरावट दर्ज की गई है। 3 अक्टूबर को शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 111 तक पहुंच गया था, जो ‘मध्यम’ प्रदूषण की श्रेणी में आता है। वर्ली में AQI 178, कोलाबा में 143, देवनार में 141 और मझगांव में 138 तक दर्ज किया गया। PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण प्रमुख प्रदूषकों में शामिल रहे। यही वजह है कि BMC ने केवल सड़क धुलाई तक सीमित रहने के बजाय प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।

हर वार्ड में कम से कम 10 प्रदूषण हॉटस्पॉट

BMC के 2026 वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं प्रवर्तन कार्ययोजना के तहत प्रत्येक प्रशासनिक वार्ड में कम से कम 10 प्रदूषण हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाने हैं। इनमें बड़े निर्माण और पुनर्विकास प्रकल्प, आधारभूत ढांचा परियोजनाएं, मलबा जमा होने वाले स्थान, खुले में कचरा जलाने वाले क्षेत्र और यातायात जाम वाले स्थान शामिल होंगे। प्रत्येक हॉटस्पॉट की निगरानी के लिए अधिकारी नियुक्त किए जाने हैं। निर्माण स्थलों की भी नियमित जांच की जाएगी। प्रत्येक प्रवर्तन टीम को रोज कम से कम दो निर्माण स्थलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। तोड़फोड़ वाले स्थानों पर मलबे को ढंकना, उचित घेराबंदी करना और धूल को दबाने के लिए लगातार पानी का छिड़काव करना जरूरी होगा। निर्माण परियोजनाओं के आसपास की सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी भी संबंधित विकासक और ठेकेदारों पर डाली गई है। परियोजना के आकार के आधार पर सड़क सफाई का दायरा तय किया गया है। इससे BMC का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण स्थल से निकलने वाली मिट्टी और मलबा आसपास की सड़कों पर जमा होकर हवा में धूल न फैलाए।

AQI बढ़ने पर और कड़े कदम

BMC ने प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर कार्रवाई बढ़ाने की व्यवस्था भी तैयार की है। यदि AQI 200 से ऊपर जाता है तो गहन सड़क सफाई, आवश्यकतानुसार सड़क धुलाई, पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण के लिए फुहार जैसी अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है। यदि किसी निगरानी केंद्र के आसपास AQI लगातार तीन दिनों तक 300 से ऊपर रहता है, तो संबंधित क्षेत्र के करीब दो किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को रोकने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

पानी की कमी के बीच सबसे बड़ा सवाल

हालांकि सड़क धुलाई का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण और नागरिकों को साफ वातावरण उपलब्ध कराना है, लेकिन मौजूदा जलसंकट के कारण योजना के पानी के स्रोत को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। मुंबई के जलाशयों में इस वर्ष बारिश की कमी का असर पड़ा है। सितंबर के अंत तक झीलों में जलस्तर करीब 96.64 प्रतिशत तक पहुंचा था, लेकिन यह पूर्ण क्षमता से कम रहा। BMC ने मौजूदा जलभंडार को देखते हुए पानी के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की जरूरत जताई है। यही कारण है कि सड़क धुलाई के लिए पीने योग्य पानी के बजाय पुनर्चक्रित या गैर-पेयजल के इस्तेमालका सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है। BMC की प्रदूषण नियंत्रण योजना में जहां आवश्यक हो, पुनर्चक्रित पानी से सड़क धोने या बारीक पानी का छिड़काव करने की बात भी सामने आई है।

सिर्फ सड़क धोने से नहीं रुकेगा प्रदूषण

विशेषज्ञों के अनुसार सड़क की धुलाई धूल के नियंत्रण में मदद कर सकती है, लेकिन मुंबई के वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल पानी के छिड़काव से संभव नहीं है। निर्माण और पुनर्विकास परियोजनाओं से निकलने वाली धूल, वाहनों का धुआं, खुले में कचरा जलाना, सड़क किनारे जमा मलबा और यातायात की समस्या जैसे कई स्रोत एक साथ जिम्मेदार हैं। इसीलिए BMC ने निर्माण स्थलों की निगरानी, मलबे को ढंकने, धूल दबाने के लिए फुहार व्यवस्था, खुले में कचरा जलाने पर कार्रवाई और प्रमुख यातायात मार्गों पर प्रदूषण नियंत्रण जांच जैसे कदमों को भी अपनी कार्ययोजना में शामिल किया है। BMC पहले से ही सड़क सफाई के लिए यांत्रिक सफाई मशीनों और धूल नियंत्रण उपकरणों का इस्तेमाल कर रही है। 2026-27 के बजट में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के लिए करीब 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत PM2.5 और PM10 जैसे कणों को नियंत्रित करने वाली मशीनों और मुंबई में स्थानीय स्तर पर वायु गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाने की योजनाएं भी शामिल हैं।

खर्च और पानी, दोनों की निगरानी जरूरी

सड़क धुलाई के लिए 8.25 करोड़ रुपये का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब मुंबई में पानी की बचत को लेकर पहले ही दबाव है। इसलिए इस योजना की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि कितनी सड़कें धोई गईं, बल्कि यह भी देखना होगा कि किस प्रकार के पानी का इस्तेमाल हुआ, कितनी मात्रा में पानी खर्च हुआ और इससे वायु गुणवत्ता में वास्तविक सुधार कितना आया। BMC के लिए यह भी चुनौती होगी कि टैंकर सेवा की निगरानी प्रभावी ढंग से हो, तय सड़कों पर नियमित सफाई हो और खर्च के अनुरूप परिणाम सामने आएं। यदि निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल को स्रोत पर ही नियंत्रित किया जाता है और सड़क धुलाई के साथ यांत्रिक सफाई, मलबा हटाने तथा पानी की फुहार जैसी व्यवस्थाएं जोड़ी जाती हैं, तो प्रदूषण नियंत्रण का असर अधिक प्रभावी हो सकता है।
फिलहाल मुंबई में सड़क धुलाई की यह योजना जलसंकट और वायु प्रदूषण—दोनों के बीच संतुलन की परीक्षा बन गई है। एक तरफ शहर को बढ़ती धूल और प्रदूषण से राहत दिलाना जरूरी है, तो दूसरी तरफ सीमित जलसंसाधनों का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करना होगा। ऐसे में आने वाले महीनों में BMC को यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि सड़क धुलाई में इस्तेमाल होने वाला पानी कहां से आएगा और पीने योग्य पानी पर इसका कितना असर पड़ेगा।

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