मुंबई की हवा बिगड़ी, BMC ने कसी कमर; हर वार्ड में 10 प्रदूषण हॉटस्पॉट चिन्हित होंगे, बढ़ते प्रदूषण पर BMC का एक्शन प्लान
मानसून की रफ्तार धीमी पड़ते ही मुंबई की हवा एक बार फिर खराब होने लगी है। बारिश के दौरान हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों के धुल जाने से जून से सितंबर तक वायु गुणवत्ता अपेक्षाकृत नियंत्रण में रही, लेकिन अब बारिश कम होने, हवा में नमी घटने और निर्माण गतिविधियों में तेजी के साथ प्रदूषण बढ़ने लगा है। इसी स्थिति को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मुंबई में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ‘Air Pollution Control and Enforcement Action Plan-2026’ लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। योजना के तहत शहर के प्रत्येक प्रशासनिक वार्ड में कम से कम 10 प्रदूषण हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाएंगे और प्रत्येक हॉटस्पॉट की निगरानी की जिम्मेदारी एक अधिकारी को दी जाएगी।
वर्ली में AQI 169 तक पहुंचा
2 अक्टूबर को सामने आए आंकड़ों के अनुसार मुंबई का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI करीब 110-111 के आसपास रहा और यह ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज किया गया। अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर इससे अधिक रहा। आपके दिए आंकड़े के मुताबिक वर्ली में AQI 169 तक पहुंचा, जबकि उसी दिन अलग समय पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में वर्ली का स्तर 178 भी दर्ज किया गया। इससे यह स्पष्ट है कि दिन के अलग-अलग समय पर निगरानी केंद्रों पर AQI में उतार-चढ़ाव रहा। वर्ली के अलावा कोलाबा, देवनार और माझगांव जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ दर्ज किया गया।
बारिश थमते ही क्यों बढ़ा प्रदूषण?
मुंबई में मानसून के दौरान लगातार बारिश होने से सड़कों और निर्माण स्थलों पर जमा धूल का एक बड़ा हिस्सा पानी के साथ हट जाता है। वातावरण में मौजूद कई धूल कण भी बारिश के कारण नीचे बैठ जाते हैं। सितंबर तक यही स्थिति रहने से शहर के कई हिस्सों में AQI 100 से नीचे बना रहा। लेकिन अक्टूबर की शुरुआत में बारिश की गतिविधि कमजोर होने के बाद हवा में सूखापन बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार हवा की दिशा में बदलाव और उत्तर की ओर से आने वाली अपेक्षाकृत सूखी हवा अपने साथ धूल के कण ला सकती है। इससे सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले सूक्ष्म कण वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं।
बच्चों बुजुर्गों के लिए खतरा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वर्गीकरण के अनुसार AQI 0 से 50 तक अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 400 से ऊपर गंभीर माना जाता है। इस लिहाज से 169 या 178 का AQI ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि इस श्रेणी में लंबे समय तक प्रदूषण का असर संवेदनशील लोगों पर अधिक हो सकता है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वर्ली निगरानी केंद्र के वर्गीकरण में भी 101-200 AQI को ‘मध्यम’ श्रेणी बताया गया है और इस स्तर पर फेफड़े या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को सांस संबंधी परेशानी होने की संभावना बताई गई है।
हर वार्ड में 10 प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान
BMC की नई योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वार्ड स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और निगरानी है। शहर के प्रत्येक प्रशासनिक वार्ड में कम से कम 10 प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाएंगे। मुंबई में 24 प्रशासनिक वार्ड हैं, इसलिए इस व्यवस्था के तहत पूरे शहर में कम से कम 240 ऐसे स्थानों की पहचान और निगरानी का आधार तैयार होगा। BMC की वार्ड व्यवस्था में शहर के 24 प्रशासनिक वार्ड शामिल हैं। इन हॉटस्पॉट में बड़े निर्माण और पुनर्विकास प्रोजेक्ट, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, मलबा जमा किए जाने वाले स्थान, खुले में कचरा जलाने वाले क्षेत्र और यातायात जाम वाले इलाके शामिल किए जाएंगे। ऐसे स्थानों की सूची और नक्शे तैयार कर उन्हें नियमित निगरानी के दायरे में रखा जाएगा। प्रत्येक हॉटस्पॉट के लिए जिम्मेदार अधिकारी को यह देखना होगा कि वहां प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित उपाय लागू किए जा रहे हैं या नहीं।
निर्माण स्थलों पर रोजाना होगी निगरानी
मुंबई में लगातार चल रहे निर्माण और पुनर्विकास कार्यों से निकलने वाली धूल को प्रदूषण के प्रमुख स्थानीय स्रोतों में माना जा रहा है। BMC ने निर्माण और तोड़फोड़ स्थलों के लिए पहले से जारी 28 सूत्रीय दिशा-निर्देशों के पालन को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। BMC की आधिकारिक वेबसाइट पर भी मुंबई सिटी एयर एक्शन प्लान और वायु प्रदूषण नियंत्रण के संशोधित 28 सूत्रीय दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं। वार्ड स्तर की निगरानी टीमों को रोजाना कम से कम दो निर्माण स्थलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। तोड़फोड़ वाले स्थानों पर उचित बैरिकेडिंग, मलबे को तिरपाल या हरे कपड़े से ढंकना और धूल को नियंत्रित करने के लिए लगातार पानी का छिड़काव या मिस्टिंग करना जरूरी होगा। इसका उद्देश्य निर्माण गतिविधियों के दौरान उड़ने वाली धूल को आसपास की सड़कों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचने से रोकना है।
निर्माण कंपनियों को आसपास की सड़कें साफ रखनी होंगी
BMC की योजना में निर्माण स्थलों के आसपास की सड़कों की सफाई को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। 4,000 वर्ग मीटर तक के प्रोजेक्ट के आसपास 100 मीटर तक की सड़क की सफाई करनी होगी। 4,000 से 10,000 वर्ग मीटर के प्रोजेक्ट के लिए यह सीमा 200 मीटर तक होगी, जबकि 10,000 वर्ग मीटर से बड़े प्रोजेक्ट के लिए परियोजना के दोनों ओर 500 मीटर तक सड़क की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित विकासक या ठेकेदार की होगी। इसका उद्देश्य निर्माण वाहनों के आने-जाने से सड़कों पर जमा होने वाली मिट्टी और धूल को दोबारा हवा में फैलने से रोकना है। खासतौर पर उन इलाकों में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी जहां एक साथ कई इमारतों, मेट्रो, सड़क, पुल या अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का काम चल रहा है।
AQI 200 पार हुआ तो बढ़ेगी कार्रवाई
BMC ने प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में चरणबद्ध कार्रवाई का प्रावधान भी रखा है। यदि किसी क्षेत्र में AQI 200 से ऊपर जाता है तो सड़क की गहन सफाई, सड़क धुलाई, पानी का छिड़काव और मिस्टिंग जैसे उपाय तेज किए जा सकते हैं। खुले में कचरा जलाने पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी निगरानी केंद्र के आसपास AQI 300 से ऊपर लगातार तीन दिनों तक बना रहता है, तो संबंधित क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर और कठोर कार्रवाई की जा सकती है। योजना के अनुसार ऐसे निगरानी केंद्र के दो किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों को रोकने के निर्देश दिए जा सकते हैं। इसका मतलब यह है कि BMC केवल प्रदूषण दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि AQI के स्तर के आधार पर कार्रवाई को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाएगी।
अक्टूबर के पहले दो सप्ताह में विशेष सफाई अभियान
BMC ने अक्टूबर के शुरुआती दिनों में शहर की सड़कों और प्रमुख स्थानों पर विशेष सफाई अभियान चलाने का भी निर्णय लिया है। इससे पहले BMC आयुक्त ने 1 से 15 अक्टूबर के बीच विशेष वायु प्रदूषण नियंत्रण अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। इस दौरान प्रमुख सड़कों की धुलाई, निर्माण स्थलों को ढंकने और प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही गई थी। बारिश के बाद सड़कों पर जमा कीचड़, मिट्टी, गाद और धूल को हटाने के लिए प्रमुख मार्गों, डिवाइडरों, चौराहों और सड़क किनारों की गहन सफाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर पुनर्चक्रित पानी से सड़कें धोने या बारीक पानी का छिड़काव करने का भी प्रावधान है। BMC का मानना है कि पोस्ट-मानसून अवधि में सड़क की धूल को नियंत्रित करना वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
खुले में कचरा जलाने और मलबा फेंकने पर भी नजर
वायु प्रदूषण का स्रोत केवल निर्माण कार्य नहीं है। खुले में कचरा जलाना, निर्माण मलबे का अनधिकृत ढंग से जमा होना, सड़क पर धूल और वाहनों से निकलने वाला धुआं भी स्थानीय स्तर पर हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसलिए BMC की हॉटस्पॉट आधारित व्यवस्था में खुले में कचरा जलाने वाले स्थान और मलबा डंप किए जाने वाले क्षेत्र भी शामिल किए जाएंगे। BMC के मौजूदा मुंबई एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान में भी निर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के साथ वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियों और ईंधन से जुड़े प्रदूषण को वायु गुणवत्ता के लिए चुनौती बताया गया है। योजना में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निगरानी व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
वर्ली सहित कई इलाकों पर विशेष नजर
वर्ली में AQI 169 से 178 के आसपास दर्ज होना इस बात का संकेत है कि दक्षिण-मध्य मुंबई के कुछ हिस्सों में भी पोस्ट-मानसून अवधि के साथ प्रदूषण बढ़ सकता है। हालांकि किसी एक निगरानी केंद्र का AQI पूरे इलाके की हवा की स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करता और आंकड़े समय के साथ बदलते रहते हैं। 2 अक्टूबर को वर्ली के अलावा कोलाबा, देवनार और माझगांव में भी अपेक्षाकृत ऊंचे AQI दर्ज किए गए थे। BMC की नई व्यवस्था में इसलिए केवल एक-दो प्रदूषण वाले क्षेत्रों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रत्येक वार्ड के भीतर कई हॉटस्पॉट की पहचान करने पर जोर दिया गया है। इससे स्थानीय अधिकारियों को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी क्षेत्र में प्रदूषण का मुख्य कारण निर्माण गतिविधि है, सड़क की धूल है, कचरा जलाना है, मलबा है या यातायात से जुड़ा उत्सर्जन।
मुंबई की हवा के लिए आगे चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं महीने
मुंबई में अक्टूबर के बाद सर्दियों की ओर बढ़ने के साथ मौसम में बदलाव, हवा की गति, नमी और वर्षा की कमी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक बन सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में बारिश के कारण हवा अपेक्षाकृत साफ रहने के बाद अब BMC ने प्रदूषण बढ़ने से पहले ही नियंत्रण उपाय लागू करने पर जोर दिया है। BMC की आधिकारिक पर्यावरण व्यवस्था में मुंबई सिटी एयर एक्शन प्लान, 28 सूत्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिशा-निर्देश और निर्माण स्थलों पर सेंसर आधारित वायु गुणवत्ता निगरानी से संबंधित दिशा-निर्देश भी शामिल हैं।
BMC ने बदली रणनीति
इस पूरे अभियान का मुख्य जोर अब ‘प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई’ के बजाय ‘प्रदूषण वाले स्रोत की पहले पहचान और लगातार निगरानी’ पर है। हर वार्ड में हॉटस्पॉट की पहचान, जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति, निर्माण स्थलों का रोजाना निरीक्षण, सड़क की सफाई और धूल नियंत्रण के उपाय तथा AQI बढ़ने पर चरणबद्ध कार्रवाई के जरिए BMC मुंबई की हवा की गुणवत्ता को नियंत्रित करने की कोशिश करेगी। आने वाले हफ्तों में इस योजना की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चिन्हित हॉटस्पॉट पर दिशा-निर्देश कितनी नियमितता और सख्ती से लागू किए जाते हैं।
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