मुंबई में पानी को लेकर फिर बढ़ी चिंता, सात झीलों में 96.64 फीसदी पानी, फिर भी मई 2027 तक ही चलेगा भंडार

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मुंबई की सात झीलों में 96.64% पानी, फिर भी मई तक ही चलेगा भंडार; 10% पानी कटौती जारी, मुंबई में पानी का संकट अभी टला नहीं,

मुंबई में इस साल मानसून के दौरान अच्छी बारिश के बावजूद शहर की जल आपूर्ति को लेकर चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुसार, 29 सितंबर 2026 को मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली सात प्रमुख झीलों में कुल उपयोगी जल भंडार 96.64 प्रतिशत दर्ज किया गया। इन झीलों में करीब 13,98,722 मिलियन लीटर (ML) पानी मौजूद है, जबकि इनकी कुल उपयोगी भंडारण क्षमता लगभग 14,47,363 एमएल है। इसके बावजूद बीएमसी का आकलन है कि मौजूदा पानी का भंडार शहर की जरूरत के हिसाब से 17 मई 2027 तक ही चल पाएगा।
बीएमसी प्रशासन ने साफ किया है कि फिलहाल झीलों में पानी का स्तर काफी अच्छा दिखाई दे रहा है, लेकिन इसे पूरे साल के लिए पर्याप्त मानकर पानी की कटौती हटाना जोखिम भरा हो सकता है। महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने बीएमसी की बैठक में बताया कि अक्टूबर और नवंबर के दौरान एल नीनो की स्थिति और मजबूत होने की आशंका है। इसके चलते तापमान बढ़ने पर झीलों से पानी के वाष्पीकरण की मात्रा भी बढ़ सकती है। ऐसे में मौजूदा 10 प्रतिशत पानी की कटौती जारी रखना जरूरी माना जा रहा है, ताकि आने वाले महीनों में जल संकट और गंभीर न हो।

सात झीलों पर टिकी है मुंबई की जल आपूर्ति

मुंबई की सालभर की जल आपूर्ति मुख्य रूप से सात झीलों पर निर्भर है। इनमें तुलसी, विहार, भातसा, तानसा, मोडक सागर, ऊपरी वैतरणा और मध्य वैतरणा शामिल हैं। ये जलाशय मुंबई के अलावा ठाणे, नासिक और पालघर जिलों के आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं। मानसून के दौरान इनके जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा होता है और बाद में जलाशयों तथा पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए मुंबई के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचाया जाता है। 29 सितंबर की स्थिति में विहार झील 100 प्रतिशत उपयोगी क्षमता पर थी, जबकि तुलसी करीब 99.15 प्रतिशत, मध्य वैतरणा करीब 98.99 प्रतिशत और भातसा करीब 98.58 प्रतिशत तक भरी थी। ऊपरी वैतरणा में करीब 96.60 प्रतिशत और तानसा में 95.56 प्रतिशत पानी था। वहीं मोडक सागर का स्तर करीब 82.70 प्रतिशत रहा, जो सातों जलाशयों में सबसे कम था। इससे साफ है कि कुल जल भंडार भले ही 96 प्रतिशत से अधिक हो, लेकिन सभी झीलों में पानी समान स्तर पर नहीं है। मुंबई की कुल जल उपलब्धता का बड़ा हिस्सा कुछ बड़े जलाशयों पर निर्भर करता है, इसलिए किसी एक बड़े जलाशय में अपेक्षाकृत कम पानी होने का असर पूरे भंडार के प्रबंधन पर पड़ सकता है।

पिछले दो साल की तुलना में इस बार कम पानी

बीएमसी के आंकड़े यह भी बताते हैं कि 29 सितंबर को पिछले दो वर्षों की तुलना में इस साल झीलों में पानी कम है। 29 सितंबर 2025 को सातों झीलों में 14,12,131 एमएल यानी 97.57 प्रतिशत पानी था। वहीं 2024 में इसी तारीख को जल भंडार 14,34,227 एमएल यानी 99.09 प्रतिशत था। इस लिहाज से इस साल का भंडार पिछले वर्ष और उससे पहले के वर्ष के मुकाबले नीचे है। इस साल झीलें पूरी तरह 100 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सकीं। जुलाई में मुंबई और आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन जून और अगस्त में बारिश की कमी रही। इसी वजह से पूरे मानसून के दौरान झीलों में पानी की आवक पिछले वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही।

मई में लगाया गया था 10 प्रतिशत पानी कटौती का फैसला

बीएमसी ने मई 2026 में 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू की थी। उस समय सातों झीलों में पानी का भंडार 25 प्रतिशत से नीचे चला गया था और भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया गया था। इसके पीछे एल नीनो से जुड़ी मौसम परिस्थितियों को भी एक कारण बताया गया था। मानसून के बाद झीलों का जलस्तर काफी बढ़ने के बावजूद बीएमसी ने तत्काल पानी कटौती वापस नहीं ली है। हालिया प्रशासनिक आकलन के मुताबिक, उपलब्ध पानी को अगले मानसून तक संभालकर चलाना जरूरी है। बीएमसी का अनुमान है कि मौजूदा भंडार को नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल करने पर यह 17 मई 2027 तक चल सकता है। इसके बाद अगले मानसून से होने वाली नई जल आवक पर निर्भरता बढ़ेगी।

एल नीनो से क्यों बढ़ रही है चिंता?

बीएमसी की चिंता का एक प्रमुख कारण आने वाले महीनों का तापमान और उससे होने वाला वाष्पीकरण है। सामान्य तौर पर मानसून खत्म होने के बाद झीलों में नई जल आवक तेजी से कम हो जाती है। इसके बाद शहर की रोजाना जरूरत के लिए झीलों से लगातार पानी निकाला जाता है। यदि इस अवधि में तापमान अधिक रहता है तो खुले जलाशयों से पानी के वाष्पीकरण की मात्रा भी बढ़ सकती है। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में एल नीनो की स्थिति मजबूत होने से दिन के तापमान में वृद्धि हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में झीलों से पानी का नुकसान बढ़ने की आशंका है। इसलिए प्रशासन का तर्क है कि अभी भंडार अच्छा दिखने के बावजूद पानी की खपत को नियंत्रित रखना जरूरी है।

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति का भी असर

मुंबई की जल स्थिति को महाराष्ट्र के व्यापक जल संकट से अलग करके नहीं देखा जा सकता। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य के कई हिस्सों में बारिश की कमी और सूखे जैसी परिस्थितियों ने चिंता बढ़ाई है। एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने 358 में से 265 तहसीलों में सूखे जैसी स्थिति घोषित की है। ऐसे में जल संसाधनों के इस्तेमाल और उपलब्धता पर राज्य स्तर पर भी दबाव बढ़ा है। मुंबई के लिए स्थिति कुछ अलग है क्योंकि शहर की जल आपूर्ति मुख्य रूप से अपने सात बड़े जलाशयों पर निर्भर है। फिर भी राज्य में व्यापक जल संकट रहने की स्थिति में जल संसाधनों के प्रबंधन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है। यही वजह है कि बीएमसी फिलहाल जल भंडार को केवल वर्तमान स्तर देखकर नहीं, बल्कि अगले मानसून तक की संभावित जरूरत को ध्यान में रखकर देख रही है।

मुंबईकरों पर क्या असर पड़ेगा?

10 प्रतिशत पानी कटौती जारी रहने का सीधा असर शहर की दैनिक जल आपूर्ति पर पड़ता है। घरों, सोसायटियों, बाजारों, कार्यालयों, होटल-रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठानों को उपलब्ध पानी का अधिक सावधानी से इस्तेमाल करना पड़ता है। अलग-अलग इलाकों में आपूर्ति के समय और दबाव में भी अंतर महसूस हो सकता है। बीएमसी का मौजूदा रुख यह संकेत देता है कि झीलों में पानी बढ़ने के बावजूद तत्काल सामान्य जल आपूर्ति बहाल करने के बजाय उपलब्ध भंडार को लंबे समय तक बनाए रखने को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन के मुताबिक पानी की कटौती हटाने से खपत बढ़ेगी और गर्मी तथा वाष्पीकरण के साथ जल भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

पानी बचाना क्यों जरूरी?

मुंबई की जल सुरक्षा केवल मानसून के दौरान झीलों के भरने पर निर्भर नहीं करती। मानसून के बाद करीब आठ महीने तक शहर को इन्हीं जलाशयों में जमा पानी से अपनी जरूरत पूरी करनी होती है। इसलिए सितंबर के अंत में 96 प्रतिशत से अधिक पानी होना राहत की बात जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे वर्ष पानी की चिंता खत्म हो गई। इस स्थिति में घरों में नल खुला छोड़ने, पाइप से अनावश्यक सफाई करने, वाहनों और फर्श की धुलाई में जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करने जैसी आदतों से बचना महत्वपूर्ण है। सोसायटियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी पानी के पुन: उपयोग, रिसाव रोकने और अनावश्यक खपत कम करने पर जोर दिया जा सकता है।
कुल मिलाकर, मुंबई की सात झीलों में 96.64 प्रतिशत पानी का भंडार फिलहाल तत्काल संकट की स्थिति नहीं दर्शाता, लेकिन पिछले दो वर्षों की तुलना में कम भंडार और अगले महीनों में संभावित गर्मी-वाष्पीकरण को देखते हुए बीएमसी सतर्क है। महानगरपालिका का मौजूदा आकलन है कि वर्तमान भंडार 17 मई 2027 तक ही पर्याप्त होगा और इसलिए 10 प्रतिशत पानी कटौती को जारी रखना जल प्रबंधन की रणनीति का हिस्सा है। अगले मानसून की बारिश इस गणना को बदल सकती है, लेकिन तब तक पानी की खपत को नियंत्रित रखना मुंबई की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

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