काहिरा से आई एक दिल दहला देने वाली खबर ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने बुधवार को सूडान के दारफुर क्षेत्र की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए बताया कि पश्चिमी दारफुर के अल-फशर शहर में एक बड़े मैटरनिटी अस्पताल में 460 से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई है। WHO के अनुसार, यह भयावह घटना उस वक्त हुई जब सूडानी अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्स’ (RSF) ने शहर पर कब्जा कर लिया। टेड्रोस ने कहा, “हम इन खबरों से स्तब्ध और गहरे सदमे में हैं। यह मानवता के खिलाफ अपराध है।
अर्धसैनिक बलों का कब्जा, शहर में तबाही का मंजर
अल-फशर दारफुर के उत्तरी हिस्से का एक प्रमुख शहर है, जो पिछले 500 दिनों से सैन्य घेराबंदी में था। यह वही इलाका है जहां सूडान की सेना और RSF के बीच अप्रैल 2023 से गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है। RSF का नेतृत्व पूर्व जनरल मोहम्मद हमदान दागलो (हेमेदती) कर रहे हैं, जिन्होंने सूडानी सेना के खिलाफ विद्रोह किया था। शहर पर RSF का कब्जा इस युद्ध का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है, क्योंकि यह दारफुर में सेना का आखिरी बड़ा गढ़ था।
महिलाओं और बच्चों की मौतें
WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस ‘सऊदी मैटरनिटी हॉस्पिटल’ पर हमला हुआ, वह महिलाओं और बच्चों के इलाज का प्रमुख केंद्र था। हमले में अस्पताल की इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ गई हैं। मारे गए लोगों में ज्यादातर मरीज, गर्भवती महिलाएं और उनके परिजन शामिल हैं। WHO ने इसे युद्ध अपराधों की श्रृंखला बताया है और नागरिकों को निशाना बनाने की निंदा की है।
महामारी का खतरा मंडरा रहा
डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत मानवीय सहायता नहीं पहुंचाई गई, तो क्षेत्र में महामारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2023 से अब तक 2.5 करोड़ से अधिक लोग भुखमरी और बीमारियों की चपेट में हैं। दारफुर, जो 2003 के गृहयुद्ध से ही अस्थिर रहा है, अब एक बार फिर खूनखराबे का केंद्र बन चुका है।
अंतरराष्ट्रीय निंदा और जांच की मांग
इस नरसंहार के बाद संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ ने कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने बताया कि उत्तरी दारफुर में केवल इस साल की शुरुआत से 1850 से अधिक नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 1350 हत्याएं अक्टूबर 2025 तक हुईं। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने पहले भी सूडान के नेताओं पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए हैं। अब मांग उठ रही है कि इस नए नरसंहार की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
सूडान की सरकार का इनकार, दुनिया में आक्रोश
सूडान सरकार ने WHO के दावों को खारिज किया है और कहा कि “अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां गलत सूचना फैला रही हैं।” लेकिन स्वतंत्र रिपोर्ट्स और सैटेलाइट इमेजरी से मिल रहे सबूत इस इनकार को कमजोर कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल-फशर जैसे शहर गिरते रहे, तो दारफुर के लाखों नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा।
Sudan Civil War
सूडान में चल रहा यह भीषण गृहयुद्ध अप्रैल 2023 में शुरू हुआ, जब देश की सेना (Sudanese Armed Forces – SAF) और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच सत्ता संघर्ष छिड़ गया। दोनों कभी एक साथ काम करते थे, लेकिन RSF के प्रमुख मोहम्मद हमदान दागलो (हेमेदती) ने सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान के खिलाफ बगावत कर दी। RSF चाहती थी कि उसे सेना में बराबरी का दर्जा और शासन में हिस्सेदारी मिले, लेकिन सेना के इनकार के बाद यह टकराव खूनी युद्ध में बदल गया।
इस संघर्ष का सबसे भयावह असर दारफुर और खार्तूम जैसे क्षेत्रों में देखा गया, जहां घर, स्कूल और अस्पताल तक युद्धभूमि बन गए। दारफुर के अल-फशर शहर में RSF के कब्जे के बाद “सऊदी मैटरनिटी हॉस्पिटल” पर हमला हुआ, जिसमें 460 से अधिक निर्दोष मरीज, महिलाएं और बच्चे मारे गए। WHO ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है। इस जंग ने पूरे सूडान को मानवीय संकट में झोंक दिया है, ढाई करोड़ से ज्यादा लोग भुखमरी, बीमारी और विस्थापन का सामना कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध नहीं रुका, तो यह संघर्ष सिर्फ सूडान ही नहीं, पूरे अफ्रीकी महाद्वीप की स्थिरता को खतरे में डाल देगा।
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