ICICI BANK SCAM-ICICI बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर को भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया है। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने अपने ताज़ा फैसले में कहा कि चंदा कोचर ने विडियोकॉन समूह को ₹300 करोड़ का कर्ज मंजूर करने के बदले ₹64 करोड़ की रिश्वत ली। यह राशि उनके पति दीपक कोचर की कंपनी को दी गई थी, जो विडियोकॉन से जुड़ी हुई थी।
पैसे का खेल, कर्ज के अगले दिन रिश्वत
ट्रिब्यूनल के मुताबिक, 27 अगस्त 2009 को ICICI बैंक ने विडियोकॉन को ₹300 करोड़ का कर्ज दिया, जो बैंक की नीतियों और नियमों के ख़िलाफ़ था। इसके अगले ही दिन, विडियोकॉन की कंपनी SEPL ने दीपक कोचर की न्यू पावर रिन्यूएबल्स (NRPL) को ₹64 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। बैंक ने शुरुआत में कोचर के ख़िलाफ़ मामले को आनन-फानन में रफा-दफ़ा करने की कोशिश की, लेकिन बाद में लोगों और मार्केट रेगुलेटर के लगातार दबाव के चलते पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए। ICICI बैंक ने स्वतंत्र जांच कराने का फ़ैसला लिया। बैंक ने 30 मई 2018 को घोषणा की थी कि बोर्ड व्हिसल ब्लोअर के आरोपों की ‘विस्तृत जांच’ करेगा। फिर इस मामले की स्वतंत्र जांच की ज़िम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएन श्रीकृष्णा को सौंपी गई। जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट की जांच पूरी हुई और चंदा कोचर को दोषी पाया गया।
‘Quid Pro Qua’ की साजिश हुई साबित
ट्रिब्यूनल ने इस लेनदेन को रिश्वत का स्पष्ट मामला माना और कहा कि चंदा कोचर ने लोन स्वीकृति समिति में रहते हुए अपने पति के व्यावसायिक हितों का खुलासा नहीं किया, जो बैंक के हितों के टकराव (Conflict Of Interest) के नियमों का उल्लंघन था। ट्रिब्यूनल ने इसे ‘Quid Pro Qua’ यानी “कर्ज के बदले रिश्वत” की स्पष्ट साजिश बताया।
ICICI BANK SCAM फैसले में कहा गया कि चंदा कोचर ने कर्ज मंजूर करते समय यह छिपाया कि उनके पति का विडियोकॉन से कारोबारी रिश्ता है। यह बैंक के “हितों के टकराव” नियमों का खुला उल्लंघन है। ट्रिब्यूनल ने टिप्पणी की, ‘चंदा कोचर यह नहीं कह सकतीं कि उन्हें अपने पति के लेन-देन की जानकारी नहीं थी।’
चंदा कोचर की जब्त संपत्ति पर बड़ा आदेश
इस केस में ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने कोचर दंपत्ति की ₹78 करोड़ की संपत्ति जब्त की थी। ट्रिब्यूनल ने इसे वैध ठहराते हुए मंजूरी दे दी। इसमें मुंबई के चर्चगेट स्थित उनका फ्लैट भी शामिल है, जिसे विडियोकॉन से जुड़ी कंपनियों के जरिए खरीदा गया था। हालांकि, ₹10.5 लाख नकदी उन्हें वापस कर दी गई क्योंकि उसका स्रोत वैध पाया गया। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने इस मामले में मजबूत दस्तावेजी साक्ष्य और समयरेखा के आधार पर कोचर दंपति की संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई को उचित ठहराया। ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2020 के उस निर्णायक प्राधिकरण के फैसले की आलोचना की, जिसमें कोचर और उनके सहयोगियों की जब्त संपत्तियों को मुक्त करने की अनुमति दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने कहा- निर्णायक प्राधिकरण ने महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया और रिकॉर्ड के विपरीत निष्कर्ष निकाले। इसलिए, हम इसके निष्कर्षों का समर्थन नहीं कर सकते।
CBI ने किया था गिरफ्तार
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2019 में चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि 2009 से 2011 के बीच, ICICI बैंक ने वीडियोकॉन ग्रुप की कंपनियों को 1,875 करोड़ रुपए के छह लोन स्वीकृत किए, जिनमें से अधिकांश NPA बन गए, जिससे ICICI बैंक को 1,730 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
CBI ने यह भी बताया कि चंदा कोचर ने एक फ्लैट को अपने परिवार के ट्रस्ट में केवल 11 लाख रुपए में हस्तांतरित करवाया, जिसकी कीमत 2016 में 5.3 करोड़ रुपए थी। यह फ्लैट मुंबई के चर्चगेट क्षेत्र में सीसीआई चैंबर्स में स्थित था। इस मामले में कोचर दंपति को दिसंबर 2022 में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने जनवरी 2023 में उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करते हुए जमानत दे दी थी।
मुकदमा जारी, जमानत पर कोचर दंपत्ति
ICICI BANK SCAM- चंदा और दीपक कोचर फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि उनके खिलाफ धोखाधड़ी और बैंक को नुकसान पहुंचाने के “पर्याप्त सबूत” मौजूद हैं।
ट्रिब्यूनल के इस फैसले ने चंदा कोचर की छवि को और नुकसान पहुंचाया है, जो कभी भारत की सबसे प्रभावशाली महिला बैंकरों में से एक मानी जाती थीं।
ऐसे बुलंदियों पर पहुंचा चंदा कोचर का करियर
चंदा कोचर ने इंडस्ट्रियल क्रेडिट एवं इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी ICICI को साल 1984 में जॉइन किया था। उस समय ये बैंक नहीं था। चंदा उस समय बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी थीं। लेकिन 1994 में आईसीआईसीआई संपूर्ण स्वामित्व वाली बैंकिंग कंपनी बन गई और यहीं से उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव हुआ। चंदा कोर टीम का हिस्सा बनीं और मैनेजमेंट ट्रेनी से सीधे सहायक जनरल मैनेजर बन गईं। इसके बाद उनका करियर बुलंदियों पर पहुंचता चला गया। पहले डिप्टी जनरल मैनेजर, फिर डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और 2009 में बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दी गईं।
एक दिन का वेतन करीब 2.18 लाख रुपए
चंदा कोचर भारत में किसी बैंक की सीईओ बनने वाली पहली महिला थीं। बैंक की प्रमुख रहते हुए चंदा कोचर की कमाई सबको हैरान कर देने वाली थी। उनका एक दिन का वेतन करीब 2.18 लाख रुपए था। उनकी तरक्की की रफ्तार किसी के लिए भी ईर्ष्या की वजह बनने के लिए काफी थी। बैंकिंग क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार चंदा को पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित कर चुकी है। उन्हें ICICI बैंक को बुलंदियों पर पहुंचाने वाली महिला के रूप में जाना जाता है। फोर्ब्स पत्रिका भी उन्हें दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में शामिल कर चुकी है। 2009 से 2018 तक ICICI बैंक की CEO रहते हुए उन्होंने कई पुरस्कार जीते, जिनमें 2011 में पद्म भूषण भी शामिल है। चंदा कोचर को कभी बैंकिंग क्षेत्र की करिश्माई महिला माना जाता था।
हालांकि, इस घोटाले ने उनकी उपलब्धियों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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