उफनती लहरों से जंग कर नेपाल की प्रलयकारी बाढ़ में बहकर यूपी पहुंचे 5 जंगली हाथी

The CSR Journal Magazine

नेपाल की बाढ़ में फंसे हाथी: लहरों से लड़ते भारत पहुंचे, दिल छू लेने वाला वीडियो वायरल

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में बहकर उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में पहुंचे 5 जंगली हाथियों को स्थानीय लोगों, वन विभाग और सिंचाई विभाग की मुस्तैदी से सुरक्षित बचा लिया गया है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन बहराइच स्थित घाघरा (गिरजापुरी) बैराज पर चलाया गया, जिसका रोमांचक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

नेपाल की प्रलयकारी बाढ़ में बहकर यूपी पहुंचे 5 जंगली हाथी; स्थानीय लोगों और वन विभाग ने मिलकर बचाई जान

नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में आई भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के बाद तराई क्षेत्रों की नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। इसी उफनती आपदा के बीच, नेपाल के जंगलों से बहकर आए 5 जंगली हाथियों का एक कुनबा उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित चौधरी चरण सिंह गिरजापुरी बैराज (घाघरा नदी) पर पहुंच गया। जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे इन हाथियों को देखने के लिए बैराज पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए वन विभाग के साथ मिलकर एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सभी हाथियों को सुरक्षित बचा लिया।

ममता और संघर्ष का वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि इस कुनबे में 3 वयस्क हाथी और 2 नन्हे शावक शामिल थे। कौड़ियाला-गेरुआ नदी प्रणाली के तेज बहाव में नन्हे शावक खुद को संभाल नहीं पा रहे थे और बार-बार गहरे पानी में डूब रहे थे। शावकों को डूबता देख तीनों वयस्क हाथियों ने हार नहीं मानी। वे उफनती लहरों के बीच ढाल बनकर खड़े रहे और अपने शरीर से शावकों को सहारा देकर बैराज की तरफ धकेलते रहे। हाथियों का यह पारिवारिक संघर्ष और ममता देख बैराज पर मौजूद लोगों की सांसें अटक गईं।

ग्रामीणों की सूझबूझ और विभागों का तालमेल

जैसे ही हाथियों का झुंड बैराज के पास पहुंचा, स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना Katarniaghat Wildlife Sanctuary के वन अधिकारियों को दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने सिंचाई विभाग से संपर्क कर बैराज के चालू गेटों को तुरंत बंद करवा दिया। गेट बंद होने से पानी की रफ्तार और लहरों का उफान अचानक कम हो गया। पानी का दबाव कम होते ही हाथियों को पैर जमाने का मौका मिल गया। इसी दौरान किनारे पर मौजूद सैकड़ों स्थानीय लोगों ने शोर मचाकर और हांका लगाकर (आवाजें निकालकर) हाथियों का ध्यान भटकाया और उन्हें गहरे पानी से निकलकर नदी के सुरक्षित किनारे (रेतीले हिस्से) की तरफ आने का रास्ता दिखाया।

सुरक्षित लौटे अपने आशियाने में

कड़ी मशक्कत के बाद, स्थानीय लोगों और वन कर्मियों की मदद से थके-हारे हाथियों का यह झुंड सुरक्षित नदी तट पर आ गया। किनारे पर पहुंचने के बाद वन विभाग की टीम ने भीड़ नियंत्रण तकनीकों और हांका पद्धति का उपयोग कर पूरे कुनबे को कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के घने जंगलों की ओर सुरक्षित वापस खदेड़ दिया। वन अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन में किसी भी वन्यजीव या इंसान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और सभी 5 हाथी पूरी तरह स्वस्थ हैं।

नेपाल की बाढ़ से सीमावर्ती जिलों में अलर्ट

गौरतलब है कि तिब्बत की ओर से भोटे कोशी नदी में आए भारी पानी के कारण नेपाल के रासुवा जिले सहित तराई क्षेत्रों में भारी तबाही हुई है। इस बाढ़ का असर अब उत्तर प्रदेश के बहराइच, कुशीनगर और महाराजगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में दिख रहा है, जहां नदियां उफान पर हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ के कारण जंगलों में पानी भरने से जानवर अक्सर भटककर रिहायशी इलाकों या बैराजों की तरफ आ जाते हैं। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहने और वन्यजीवों के दिखने पर दूरी बनाए रखने की अपील की है।

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