क्या आप भी खा रहे हैं ‘जहरीला’ चना? धोने पर छूटा कपड़ा रंगने वाला केमिकल, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

The CSR Journal Magazine

वायरल वीडियो: पैकेट बंद चने को धोते ही निकलने लगा पीला रंग!

सोशल मीडिया पर पैकेट बंद या खुले चने धोने पर पीला रंग निकलने का वीडियो वायरल होना वाकई एक गंभीर चिंता का विषय है, जो सीधे तौर पर हमारे स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों और खाद्य सुरक्षा छापों के अनुसार, मिलावटखोर पुराने, खराब या फीके पड़ चुके चने को नया, चमकदार और आकर्षक दिखाने के लिए उन पर प्रतिबंधित रसायनों की परत चढ़ा देते हैं।

अचानक सामने आया हैरान कर देने वाला सच

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स पैक्ड चने को धोते हुए दिख रहा है। जैसे ही उसने चने को पानी में डालकर धोना शुरू किया, तुरंत पीला रंग बाहर निकलने लगा। इस वायरल वीडियो ने न केवल लोगों को हैरान किया है, बल्कि इसे लेकर कई सवाल भी उठाए जा रहे हैं। कई यूजर्स इस वीडियो को देखकर सोचने लगे हैं कि क्या वे ‘Quick Delivery Apps’ के जरिए मंगाए जाने वाले पैकेज़्ड फूड को पूरी तरह से सुरक्षित मान सकते हैं।

क्या है इस वीडियो का सच?

वीडियो में दिख रहा है कि शख्स एक पैकेट बंद भुने हुए चने को धो रहा है। जब वह चने को धोता है, तो उसमें से अचानक एक गहरा पीला रंग निकलता है। यह देखकर उसे स्वयं भी चौंकता है और वह कैमरे के सामने यह सवाल उठाता है कि क्या इस चने में आर्टिफिशियल रंग मिलाया गया है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या जितने पैकेट बंद फूड हम सभी आसानी से मंगाते हैं, क्या वे वास्तव में सेहतमंद हैं?

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

जैसे-जैसे यह वीडियो वायरल हो रहा है, लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स इसे देखकर घबराए हुए हैं, जबकि कुछ लोग इस पर मजाक बना रहे हैं। एक यूज़र ने लिखा कि “अब तो हमें अपनी डेली डाइट पर दोबारा सोचना पड़ेगा।” वहीं, कुछ लोगों ने इसे ‘Food Safety’ के लिए एक बड़ा लाल झंडा बताया है।

चने में मिलावट का मुख्य कारण और केमिकल

बासी या कम गुणवत्ता वाले चने के स्टॉक को छिपाने के लिए रासायनिक रंगों का लेप लगाया जाता है। कई मामलों (जैसे खाद्य विभाग की हालिया छापेमारी) में यह सामने आया है कि मिलावटखोर चने को ज्यादा पीला दिखाने के लिए कपड़ा रंगने वाले औद्योगिक केमिकल ‘औरामाइन’ का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे गैर-खाद्य (Non-food grade) और टेक्सटाइल रंगों के लगातार सेवन से पेट की गंभीर बीमारियां, लिवर-किडनी को नुकसान और लंबे समय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

मिलावट की पहचान कैसे करें

यदि आप बाजार से पैकेट बंद या खुले चने/दाल खरीद रहे हैं, तो इन आसान तरीकों से कृत्रिम रंग की जांच कर सकते हैं। चने के कुछ दानों को एक पारदर्शी कांच के गिलास में गुनगुने पानी में डालें। अगर पानी तुरंत गहरा पीला होने लगे, तो समझें कि उस पर बाहरी रंग चढ़ा है। थोड़े से चने को पानी में मिलाकर उसमें कुछ बूंदें हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) की डालें। यदि मिश्रण का रंग गुलाबी या लाल हो जाता है, तो यह ‘मेटानिल येलो’ या किसी प्रतिबंधित केमिकल की उपस्थिति को पक्का करता है। चने को अपनी हथेलियों के बीच सूखी या हल्की नम स्थिति में रगड़ें। यदि आपकी हथेलियों पर पीला पाउडर या रंग चिपक जाता है, तो वह मिलावटी है।

उपभोक्ता के तौर पर क्या करें

हमेशा FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) द्वारा प्रमाणित ब्रांडेड उत्पाद ही खरीदने की कोशिश करें।शिकायत दर्ज करें: यदि आपको किसी पैकेट या दुकान के चने में ऐसी मिलावट मिलती है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन या FSSAI के फूड सेफ्टी कनेक्ट पोर्टल पर सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल

इस तरह के वीडियो सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा के बड़े मुद्दे की ओर इशारा करते हैं। भारत में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर कई बार सवाल उठाए जाते हैं। पैकेट बंद चीज़ों में मिलाए जाने वाले आर्टिफिशियल रंग और एडिटिव्स के दुष्प्रभाव की जानकारी आजकल ज्यादा जरूरी हो गई है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इस बात की सलाह देते हैं कि लोगों को अपने खुराक के प्रति सजग रहना चाहिए और पैकेट में दिए गए लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

भविष्य में क्या हो सकता है?

इस वीडियो ने एक बार फिर से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर चर्चा को हवा दी है। क्या हमें अब भी ‘Quick Delivery Apps’ से मंगाए गए ‘Packaged Foods’ पर भरोसा करना चाहिए? खाद्य उत्पाद कंपनियों को अब अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी। अगर यह मुद्दा यूं ही उठता रहा, तो संभव है कि कंपनियों को अपनी प्रक्रियाओं में सुधार लाने के लिए मजबूर होना पड़े। इस प्रकार के वीडियो समाज को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर करते हैं कि वे क्या खा रहे हैं और क्या यह उनके स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है।

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