गरबा पंडालों में नॉन-हिंदुओं की नो एंट्री: विहिप का कड़ा फरमान, आधार कार्ड और तिलक से तय होगी पहचान

The CSR Journal Magazine

हिंदू पहचान पक्की होने पर ही पंडालों में प्रवेश; लव जिहाद रोकने और पवित्रता बनाए रखने का दिया हवाला

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने आगामी 10 दिवसीय नवरात्रि उत्सव को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। विहिप ने महाराष्ट्र भर में आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने की घोषणा की है। संगठन ने इस धार्मिक उत्सव की पवित्रता बनाए रखने और कथित ‘लव जिहाद’ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आयोजकों के लिए एक सख्त गाइडलाइन (नियमावली) भी जारी की है। विहिप के इस फैसले के बाद राज्य में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई है।

आधार कार्ड जांच और तिलक लगाना अनिवार्य

विहिप द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, गरबा और डांडिया पंडालों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान की कड़ी जांच की जाएगी। इसके लिए प्रवेश द्वारों पर निम्नलिखित नियम लागू करने को कहा गया है-
पहचान पत्र की जांच: पंडाल में प्रवेश करने वाले हर शख्स के आधार कार्ड की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी ताकि कोई अपनी पहचान छिपाकर अंदर न आ सके।
तिलक और रक्षा सूत्र: आगंतुकों की हिंदू पहचान सुनिश्चित करने के लिए उनके माथे पर तिलक लगाना और कलाई पर रक्षा सूत्र (कलावा) बांधना अनिवार्य होगा।
गोमूत्र का छिड़काव: विहिप के विदर्भ महासचिव प्रशांत तित्रे के अनुसार, नागपुर और आसपास के क्षेत्रों में पंडाल में प्रवेश से पहले लोगों पर ‘गोमूत्र’ का छिड़काव भी किया जाएगा।
उत्सव के दौरान इन नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए गरबा पंडालों के बाहर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के विशेष निगरानी दस्ते (सतर्कता दल) तैनात रहेंगे।

‘मनोरंजन नहीं, यह मां दुर्गा की आराधना का पर्व है’

इस फैसले के पीछे का तर्क देते हुए विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त महासचिव श्रीराज नायर ने स्पष्ट किया, “नवरात्रि केवल नाच-गाने या मनोरंजन का साधन नहीं है। यह पूरी तरह से मां दुर्गा की पूजा और सनातन धर्म की आस्था का पावन पर्व है। जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें इस धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बनने की कोई आवश्यकता नहीं है”। हालांकि, विहिप नेताओं ने यह भी कहा कि इस कदम का उद्देश्य किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत फैलाना नहीं, बल्कि एक एहतियाती उपाय है ताकि पंडालों के भीतर किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि या पहचान छुपाकर प्रवेश करने के मामलों को रोका जा सके।

महाराष्ट्र में गरबा का बड़ा व्यावसायिक और सामाजिक नेटवर्क

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया का आयोजन बेहद व्यापक स्तर पर होता है। आंकड़ों के अनुसार:पूरे राज्य में 1 लाख से अधिक जगहों पर छोटे-बड़े गरबा आयोजनों का आयोजन होता है। राज्य में लगभग 25 से 30 हजार सार्वजनिक गरबा मंडल सक्रिय हैं, जिनमें से अकेले मुंबई महानगर क्षेत्र में 3,000 से अधिक मंडल हैं। मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई के 50 से 70 बड़े मैदानों में भारी व्यावसायिक स्तर पर गरबा नाइट्स होती हैं, जहां रोजाना 10,000 से 40,000 लोग तक जुटते हैं। इतने बड़े पैमाने पर होने वाले आयोजनों में सुरक्षा और पहचान को लेकर विहिप ने आयोजकों को सख्त रवैया अपनाने की चेतावनी दी है।

राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज

विहिप के इस ऐलान के बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। महाराष्ट्र भाजपा ने विहिप की इस मांग का समर्थन किया है। भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस्लाम में मूर्ति पूजा पूरी तरह प्रतिबंधित है, ऐसे में मुस्लिमों का गरबा में शामिल होना उनके खुद के धर्म का अपमान है। भाजपा नेताओं का मानना है कि इस नियम से सामाजिक समरसता और एक-दूसरे के धर्म के प्रति सम्मान बढ़ेगा।दूसरी तरफ, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस फैसले की तीखी आलोचना की है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि ऐसे संगठन समाज को धर्म के नाम पर बांटने और राजनीतिक रोटियां सेकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदमों से देश की ‘विविधता में एकता’ की नींव कमजोर होती है और सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है।

सामुदायिक एकता का सवाल

इस फैसले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, विशेष रूप से यह कि क्या यह कदम सामुदायिक एकता को प्रभावित करेगा या नहीं। नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया जैसे कार्यक्रम एक उत्सव का हिस्सा होते हैं, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग मिलकर भाग लेते हैं। VHP का यह निर्णय इस सांस्कृतिक विविधता पर सवाल खड़ा करता है।

कार्यक्रम आयोजकों की चिंताएं

कार्यक्रम के आयोजकों ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस तरह के नियम से आयोजनों की सफलता पर असर पड़ेगा। गरबा पंडालों में विविधता और खुलापन एक महत्वपूर्ण तत्व है, जिसे VHP के इस बैन से चुनौती मिल रही है। आयोजक अभी यह विचार कर रहे हैं कि उन्हें इन गाइडलाइनों का पालन कैसे करना होगा।

सोशल मीडिया पर बहस

इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे धार्मिक भेदभाव मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे नवरात्रि के धार्मिक महत्व से जोड़कर देख रहे हैं। यह परिस्थिति लोगों के बीच अलग-अलग राय और विचारों का कारण बन रही है। ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर लोग अपने विचार साझा कर रहे हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो रही है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि इस तरह के निर्णय से समाज में विभाजन और बढ़ता है। वे इसे सांस्कृतिक सहिष्णुता के खिलाफ बताते हैं और VHP के इस कदम को राजनीति से प्रेरित मानते हैं। विपक्ष ने सरकार से अपील की है कि ऐसे निर्णय न लिए जाएं, जो समाज के विभिन्न वर्गों के बीच मतभेद पैदा करें।

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