बार काउंसिल में हार के बावजूद, राधाकांत ओझा को मिला राज्यसभा का टिकट!

The CSR Journal Magazine
बीजेपी की राज्यसभा की नई लिस्ट में राधाकांत ओझा का नाम देख हर कोई हैरान है। ‘किस्मत मेहरबान तो गधा पहलवान’ इस कहावत को बखूबी सच कर दिया है। 11 दिन पहले बार काउंसिल चुनाव में तीसरे नंबर पर रहने वाले ओझा का नाम अचानक राज्यसभा के लिए टिकट में शामिल हो गया है। यह स्थिति सवाल खड़ी करती है कि आखिर क्यों बीजेपी ने एक ऐसे व्यक्ति को चुना जो चुनाव हार चुका है।

क्यों बीजेपी ने राधाकांत ओझा को चुना?

बहुत से लोगों का मानना है कि ओझा पार्टी के लिए एक اہم asset हो सकते हैं, जिसकी वजह से उन्हें राज्यसभा में भेजा जा रहा है। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि राधाकांत ओझा का बैकग्राउंड और राजनीतिक कनेक्शन उन्हें खास बनाता है। उनके खिलाफ जो बातें हैं, उनका कद छोटा नहीं है।

राधाकांत ओझा: एक कानूनी दिग्गज

प्रयागराज के वरिष्ठ वकीलों में ओझा की गिनती होती है। बीजेपी ने यूपी के आगामी चुनावों को देखते हुए एक कानूनी विशेषज्ञ को संसद भेजने का फैसला किया है। लेकिन सवाल है कि जो व्यक्ति बार एसोसिएशन का चुनाव हार चुका है, उसे इतना बड़ा मौका कैसे दिया जा रहा है।

राजनीतिक जीवन का सफर

राधाकांत ओझा का कानूनी करियर चार दशकों का है। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं और उनकी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा संघ और बीजेपी के कार्यों से जुड़ा है। उनकी पहचान एक अनुभवी अधिकारी के रूप में बनी है, जो संगठन से जुड़े संबंधों का लाभ उठा सकते हैं।

परिवार का राजनीतिक दर्जा

ओझा का परिवार भी राजनीतिक रूप से काफी प्रभावशाली रहा है। उनके बड़े भाई प्रो. शिवाकांत ओझा समाजवादी पार्टी में मंत्री रह चुके हैं, जबकि दूसरे भाई शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। ऐसे प्रभावशाली बैकग्राउंड के चलते उनका नाम चर्चा का विषय बन गया है।

केशरीनाथ त्रिपाठी के साथ जुड़ाव

ओझा का केशरीनाथ त्रिपाठी के साथ पुराना रिश्ता रहा है। दोनों की मुलाकात 1977 में हुई थी, जब त्रिपाठी विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे। यह जुड़ाव राधाकांत की राजनीतिक यात्रा में अहम स्थान रखता है।

कमजोरियों का सामना

हालाँकि, राधाकांत ओझा की एक कमजोरी भी है। उनका प्रत्यक्ष चुनावी अनुभव सीमित है। वे विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाए हैं। फिर भी, बीजेपी का उन पर भरोसा यह दर्शाता है कि उनका कानूनी ज्ञान और संगठन में अनुभव उन्हें एक सक्षम नेता बना सकता है।

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