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March 5, 2026

राज्यसभा चुनाव: हरियाणा में वोटिंग से तय होगी सीटें, जानें हिमाचल का हाल

The CSR Journal Magazine

हरियाणा में रोचक मुकाबला

राज्यसभा चुनाव 2026 की तैयारी के बीच हरियाणा में अब वोटिंग का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा की दो सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया एक नई रहस्यमय चाल चल रही है, जिससे चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। बीजेपी और कांग्रेस के एक-एक उम्मीदवार हैं, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांडल ने अपना नामांकन डालकर खेल को खुराक दी है। हरियाणा में राज्यसभा की दो और हिमाचल प्रदेश की एक सीट के लिए नामांकन प्रक्रिया हुई। इस दौरान, हरियाणा में विधायक की गिनती से एक सीट बीजेपी और दूसरी कांग्रेस के खाते में जा रही थी, लेकिन नांदल की एंट्री सब कुछ बदल सकती है।

हिमाचल का चुनावी माहौल

वहीं, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस का उम्मीदवार ही जीत की ओर बढ़ता दिख रहा है। कांगड़ा जिले के बैजनाथ निवासी अनुराग शर्मा कांग्रेस के प्रत्याशी हैं और उनकी जीत की संभावनाएं बहुत मजबूत हैं। बीजेपी ने अपने उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा है, जो इस सीट के लिए कांग्रेस के हाथों में जीत की गारंटी बना रहा है। अनुराग शर्मा ने सीएम सुक्खू की मौजूदगी में नामांकन दिया, जिससे उनकी स्थिति और अधिक मजबूत हो गई है।

सतीश नांदल का निर्दलीय नामांकन

हरियाणा में निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांडल ने चुनावी मैदान में उतरकर सभी का ध्यान खींचा है। उनके साथ कई निर्दलीय विधायक भी मौजूद रहे। सतीश ने कहा कि वह सभी दलों के विधायकों से वोट मांगेंगे, जो इसका संकेत देता है कि चुनाव की तस्वीर बदल सकती है। कांग्रेस ने अपने दलित नेता कर्मवीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है, जिसका नामांकन करते वक्त पार्टी के सभी नेता एकजुट दिखाई दिए। इस तरह से, हरियाणा में चुनावी समीकरण और भी जटिल हो गए हैं।

कांग्रेस का एकजुट संदेश

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी के निर्देश पर नामित उम्मीदवार एकजुटता का प्रतीक हैं। वे विश्वास दिलाते हैं कि यदि बीजेपी किसी अन्य निर्दलीय या उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, तो भी कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट रहेंगे। कर्मवीर बौद्ध ने इस समर्थन के लिए राहुल गांधी का आभार व्यक्त किया है, जिससे यह स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर एकता है।

हरियाणा के वोटिंग समीकरण

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सक्रिय विधायक हैं, जिसमें से बीजेपी, कांग्रेस, निर्दलीय और INLD के वोट शामिल हैं। जीत के लिए 31 वोटों की आवश्यकता है। पहले राउंड में, दोनों प्रमुख पार्टियों ने एक-एक उम्मीदवार उतारा है, जिससे हरियाणा में वोटिंग की जरूरत महसूस हो रही है। गणित के अनुसार, बीजेपी और कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिखती है, लेकिन सतीश नांडल की एंट्री ने स्थिति को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

क्या होगा आगे?

यदि बीजेपी और कांग्रेस अपने-अपने एक-एक उम्मीदवार को मैदान में उतारती, तो वोटिंग की जरूरत नहीं होती। हालांकि, अब ऐसा लगता है कि चुनावी परिणामों के लिए वोटिंग अनिवार्य हो गई है। हरियाणा राज्यसभा चुनाव में काफी रोचक मोड़ आ गया है, जो इस बार की चुनाव प्रक्रिया को और भी संघर्षमय बनाने वाला है।

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