UPI Tap & Pay: अब QR कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं, फोन टैप करते ही होगा भुगतान; कमजोर नेटवर्क में भी सुविधा
डिजिटल भुगतान को और आसान और तेज बनाने की दिशा में भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। अब कई जगहों पर भुगतान करने के लिए न तो QR कोड स्कैन करने की जरूरत होगी और न ही हर बार भुगतान शुरू करने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। UPI Tap & Pay सुविधा के जरिए NFC तकनीक वाले स्मार्टफोन को निर्धारित भुगतान टर्मिनल, NFC टैग या समर्थित डिवाइस के पास ले जाकर टैप किया जा सकता है और भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह सुविधा खास तौर पर उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है, जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर है या QR कोड स्कैन करना मुश्किल हो जाता है।
डिजिटल भुगतान का अगला कदम
राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के UPI नेटवर्क पर यह बदलाव डिजिटल भुगतान को अगले स्तर पर ले जाने की कोशिश है। UPI पहले ही भारत में सबसे बड़े डिजिटल भुगतान माध्यमों में शामिल है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में UPI के जरिए करीब 24,508.96 मिलियन यानी 2,450.90 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा। इस बड़े नेटवर्क में टैप आधारित भुगतान जोड़ने से रोजमर्रा के छोटे और तेज भुगतान को और सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है।
कैसे काम करेगा UPI Tap & Pay?
इस सुविधा की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें भुगतानकर्ता को QR कोड के सामने कैमरा ले जाकर उसे स्कैन करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके बजाय स्मार्टफोन में मौजूद NFC यानी Near Field Communication तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। उपयोगकर्ता अपने NFC-सक्षम फोन को ऐसे व्यापारी उपकरण या टैग के पास ले जाता है, जो UPI Tap & Pay को स्वीकार करता है। इसके बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। Google Pay के अनुसार यह सुविधा NFC वाले Android फोन और सक्रिय UPI भुगतान माध्यम वाले उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। व्यापारी के यहां NFC टैग, NFC सुविधा वाला QR स्टिकर या NFC-सक्षम स्मार्ट साउंडबॉक्स जैसे उपकरण हो सकते हैं। ऐसे स्थानों पर ग्राहक फोन को निर्धारित स्थान के पास टैप कर भुगतान शुरू कर सकता है। यानी पहले कैमरा खोलना, QR कोड को सही कोण से पकड़ना और स्कैन होने का इंतजार करना जरूरी नहीं रहेगा।
फोन में NFC होना जरूरी
UPI Tap & Pay का इस्तेमाल करने के लिए सबसे जरूरी शर्त फोन में NFC सुविधा का होना है। NFC एक कम दूरी की वायरलेस तकनीक है, जिसके जरिए दो समर्थित उपकरण एक-दूसरे के बेहद करीब आने पर सीमित मात्रा में डेटा का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इसलिए केवल UPI ऐप होना पर्याप्त नहीं है। अगर किसी फोन में NFC हार्डवेयर ही नहीं है, तो उसमें सामान्य Tap & Pay सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। Google Pay ने भी Tap & Pay के लिए NFC-सक्षम Android डिवाइस को आवश्यक बताया है।
इंटरनेट बंद हो तो क्या होगा?
यह सुविधा सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए है क्योंकि इसका इस्तेमाल सीमित नेटवर्क या इंटरनेट कनेक्टिविटी वाली परिस्थितियों में भी किया जा सकता है। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। हर Tap & Pay भुगतान को पूरी तरह इंटरनेट-रहित UPI भुगतान मानना सही नहीं होगा। ऑफलाइन भुगतान की उपलब्धता इस्तेमाल किए जा रहे भुगतान माध्यम, ऐप और सुविधा की सेटिंग पर निर्भर करती है। Google Pay की जानकारी के अनुसार UPI Tap & Pay में UPI Lite के जरिए ऑफलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध हो सकती है, बशर्ते उपयोगकर्ता ने पहले से ऑफलाइन भुगतान सुविधा सक्रिय कर रखी हो। यानी इंटरनेट नहीं होने की स्थिति में भी कुछ पात्र लेनदेन पूरे किए जा सकते हैं। यही वजह है कि नई सुविधा को सामान्य बैंक-खाते से होने वाले प्रत्येक UPI भुगतान के लिए बिना इंटरनेट की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भुगतान का तरीका, उपलब्ध शेष राशि, ऐप का समर्थन और बैंक/सेवा की शर्तें महत्वपूर्ण रहेंगी।
भुगतान के लिए क्या-क्या चाहिए?
Tap & Pay इस्तेमाल करने के लिए आम तौर पर कुछ बुनियादी चीजें जरूरी होंगी। पहला, फोन में NFC सुविधा होनी चाहिए और वह चालू होनी चाहिए। दूसरा, उपयोगकर्ता के भुगतान ऐप में सक्रिय UPI भुगतान माध्यम जुड़ा होना चाहिए। तीसरा, जिस व्यापारी के यहां भुगतान किया जा रहा है, वहां NFC आधारित UPI भुगतान स्वीकार करने की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। UPI Lite का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए खाते में पर्याप्त उपलब्ध शेष राशि भी जरूरी होगी। Google Pay के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में Tap & Pay लेनदेन के लिए ₹500 से कम के भुगतान में पर्याप्त UPI Lite शेष होने पर उसी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कैसे शुरू करें Tap & Pay?
अगर आपके फोन और ऐप में यह सुविधा उपलब्ध है तो प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है। सबसे पहले फोन की सेटिंग में जाकर NFC चालू करना होगा। इसके बाद समर्थित UPI ऐप खोलकर Tap & Pay विकल्प चुनना होगा। फिर फोन को व्यापारी के NFC टैग या निर्धारित भुगतान बिंदु के पास टैप करना होगा। इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाले निर्देशों के अनुसार भुगतान पूरा किया जा सकेगा। Google Pay ने अपने ऐप में Tap & Pay के लिए अलग विकल्प उपलब्ध कराया है। हालांकि अलग-अलग UPI ऐप में सुविधा का नाम, स्थान और भुगतान की अंतिम प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए उपयोगकर्ता को अपने संबंधित ऐप में उपलब्ध निर्देशों का पालन करना चाहिए।
QR कोड का विकल्प बनेगा Tap & Pay
भारत में QR कोड आधारित भुगतान ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक भुगतान की तस्वीर बदल दी है। किराना दुकान, चाय की दुकान, सब्जी विक्रेता, रेस्तरां, पेट्रोल पंप और मॉल तक में QR कोड के जरिए भुगतान आम हो चुका है। लेकिन भीड़भाड़ वाली जगहों पर QR कोड स्कैन करने में कभी-कभी परेशानी होती है। कम रोशनी, टूटा या मुड़ा हुआ QR स्टिकर, कैमरा फोकस की समस्या और कमजोर इंटरनेट जैसी परिस्थितियां भुगतान को धीमा कर सकती हैं। Tap & Pay इसी प्रक्रिया को और छोटा करने की कोशिश है। इसमें QR की जगह फोन और भुगतान टर्मिनल के बीच नजदीकी संपर्क महत्वपूर्ण होगा। इससे उन जगहों पर भुगतान की गति बढ़ सकती है, जहां ग्राहक बड़ी संख्या में आते-जाते हैं।
रेलवे स्टेशन, मेट्रो और दुकानों में ज्यादा उपयोगी
इस तरह की तकनीक का सबसे बड़ा फायदा उन जगहों पर दिखाई दे सकता है जहां बहुत कम समय में बड़ी संख्या में छोटे भुगतान होते हैं। मसलन, सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो स्टेशन, पार्किंग, छोटे खुदरा स्टोर, कैफे और फास्ट-फूड काउंटर जैसी जगहों पर ग्राहक को QR स्कैन करने के बजाय फोन टैप करने का विकल्प मिल सकता है। भारत में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 में भी UPI पर 23,658.35 मिलियन लेनदेन हुए थे, जबकि जून में यह आंकड़ा 22,716.07 मिलियन था। ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया में कुछ सेकंड की बचत भी बड़े पैमाने पर महत्वपूर्ण हो सकती है।
सुरक्षा को लेकर क्या सावधानी रखें?
Tap & Pay आसान जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भुगतान में सावधानी की जरूरत खत्म हो गई। उपयोगकर्ता को हमेशा यह जांचना चाहिए कि वह सही व्यापारी को ही भुगतान कर रहा है। भुगतान शुरू होने के बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाला नाम और राशि ध्यान से जांचना जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अपना UPI PIN साझा नहीं करना चाहिए। NPCI स्पष्ट रूप से कहता है कि UPI PIN बैंक खाते से जुड़े लेनदेन को अधिकृत करने के लिए इस्तेमाल होता है और इसे किसी के साथ साझा नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा अनजान NFC टैग या संदिग्ध भुगतान उपकरण पर फोन टैप करने से बचना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर भुगतान करते समय फोन की स्क्रीन पर आने वाले विवरण को पढ़कर ही लेनदेन की पुष्टि करना बेहतर है।
क्या QR कोड खत्म हो जाएगा?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। Tap & Pay, QR आधारित भुगतान का विकल्प है, उसका तत्काल प्रतिस्थापन नहीं। देश में करोड़ों व्यापारी पहले से QR कोड का इस्तेमाल करते हैं और यह व्यवस्था बेहद व्यापक है। वहीं हर फोन में NFC सुविधा भी नहीं होती और हर व्यापारी के पास NFC आधारित भुगतान स्वीकार करने वाला उपकरण उपलब्ध होना जरूरी है। इसलिए आने वाले समय में QR और Tap & Pay दोनों भुगतान माध्यम साथ-साथ चलने की संभावना है। ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार QR स्कैन, संपर्क आधारित भुगतान, UPI Lite या अन्य उपलब्ध UPI विकल्प का इस्तेमाल कर सकेगा।
UPI लगातार बदल रहा है भुगतान का तरीका
UPI की शुरुआत के बाद से भारत में डिजिटल भुगतान का तरीका लगातार बदल रहा है। QR स्कैन से लेकर UPI Lite, आवाज के जरिए भुगतान और अब NFC आधारित Tap & Pay तक, लक्ष्य भुगतान को अधिक सरल और तेज बनाना है। NPCI के अनुसार UPI तत्काल बैंक-से-बैंक भुगतान की सुविधा देने वाला सिस्टम है और इसका इस्तेमाल विभिन्न बैंकों तथा भुगतान ऐप के जरिए किया जाता है। ऐसे में Tap & Pay को केवल QR स्कैन का एक और विकल्प नहीं, बल्कि कम से कम चरणों में भुगतान कराने वाली अगली पीढ़ी की सुविधा के रूप में देखा जा सकता है। खासकर उन परिस्थितियों में जहां ग्राहक को कुछ ही सेकंड में भुगतान पूरा करना हो या इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर हो, यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है।
पहले जांचें, फिर इस्तेमाल करें
हालांकि ग्राहकों को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि “फोन टैप करें और बिना इंटरनेट हर UPI भुगतान हो जाएगा” पूरी तरह सार्वभौमिक नियम नहीं है। ऑफलाइन भुगतान की सुविधा विशेष रूप से समर्थित माध्यमों और शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए अपने UPI ऐप में उपलब्ध Tap & Pay तथा UPI Lite की सेटिंग और पात्रता जांचना जरूरी है।
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