तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0-युवाओं की तरक्की में बाधा बन रहा तंबाकू, सेहत बचाने के लिए केंद्र सरकार का जागरूकता संदेश
युवावस्था जीवन का वह दौर है, जब व्यक्ति अपने सपनों को साकार करने, शिक्षा और रोजगार में आगे बढ़ने, अपनी क्षमताओं को निखारने और भविष्य की मजबूत नींव रखने का प्रयास करता है। इस उम्र में ऊर्जा, आत्मविश्वास और शारीरिक क्षमता का विशेष महत्व होता है। लेकिन तंबाकू का सेवन ऐसी आदत है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाने के साथ व्यक्ति की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है। इसी संदेश के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने युवाओं से तंबाकू से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की है। मंत्रालय के जागरूकता संदेश में कहा गया है कि युवावस्था निरंतर आगे बढ़ने का समय है, रुकने या थमने का नहीं। अपने सपनों को पूरा करने के लिए युवाओं को स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि तंबाकू जैसी हानिकारक आदतों को। यह संदेश केवल धूम्रपान से बचने तक सीमित नहीं है, बल्कि तंबाकू के सभी रूपों से दूरी बनाने और देश की युवा पीढ़ी को तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
सरकार के इस संदेश का मुख्य उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि तंबाकू का सेवन कुछ समय के लिए सामान्य आदत या साथियों के बीच स्वीकार्य व्यवहार लग सकता है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए तंबाकू से बचाव को बीमारी होने के बाद के उपचार के बजाय शुरुआत से ही अपनाई जाने वाली जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है।
तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 शुरू, 60 दिन तक देशभर में चलेगा जागरूकता अभियान
केंद्र सरकार ने युवाओं को तंबाकू और नशे की लत से बचाने के लिए तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 (Tobacco-Free Youth Campaign 4.0) शुरू किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अभियान का चौथा संस्करण शुरू किया गया। यह अभियान 26 दिसंबर 2026 तक चलेगा। इसके अंतर्गत देशभर में 60 दिनों तक तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, युवाओं को तंबाकू की शुरुआत करने से रोकने, सेवन करने वालों को इसे छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने और तंबाकू नियंत्रण से जुड़े कानूनों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने अभियान का शुभारंभ करते हुए युवाओं से तंबाकू से दूर रहने और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज में भी इसके खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील की। अभियान में इस बार विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को विशेष प्राथमिकता दी गई है, ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवा तंबाकू मुक्त परिसर बनाने और अपने साथियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
मंत्रालय का यह प्रयास इस विचार पर आधारित है कि तंबाकू की लत लगने के बाद उससे बाहर निकलने की कोशिश करने के बजाय युवावस्था में ही इसकी शुरुआत रोकना अधिक प्रभावी हो सकता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, परिवारों और समुदायों में यदि तंबाकू के नुकसान के बारे में सही जानकारी दी जाए, तो युवाओं को इस आदत से दूर रखने में मदद मिल सकती है।
तंबाकू शरीर के किन हिस्सों को पहुंचाता है नुकसान?
तंबाकू का सेवन केवल फेफड़ों तक सीमित नुकसान नहीं पहुंचाता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तंबाकू शरीर के लगभग सभी अंगों को प्रभावित कर सकता है। इससे कैंसर, हृदय रोग, मस्तिष्काघात, सांस संबंधी बीमारियों और समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ता है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ-साथ उसके आसपास रहने वाले लोगों को भी तंबाकू के धुएं से नुकसान पहुंच सकता है। तंबाकू का कोई भी रूप पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता। सिगरेट और बीड़ी के धुएं में मौजूद विषैले तथा कैंसर पैदा करने वाले रसायन शरीर में प्रवेश करके फेफड़ों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक धूम्रपान करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है, लगातार खांसी, सांस फूलने और शारीरिक मेहनत करने में परेशानी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में फेफड़ों का दीर्घकालिक रोग विकसित हो सकता है। तंबाकू के सेवन का असर मुंह और गले पर भी पड़ता है। गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पादों से मुंह के ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता है और मुंह के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। मुंह कम खुलने, जलन, सफेद या लाल धब्बे और लंबे समय तक बने रहने वाले घाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।
इसके अलावा, तंबाकू में मौजूद निकोटीन अत्यधिक लत पैदा करने वाला पदार्थ है। बार-बार इसका सेवन करने से शरीर इसकी आदत डाल सकता है और व्यक्ति को सामान्य महसूस करने के लिए भी तंबाकू की जरूरत महसूस होने लगती है। जब वह इसे छोड़ने का प्रयास करता है, तो बेचैनी, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और बार-बार सेवन करने की इच्छा जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। यही कारण है कि तंबाकू की लत को केवल इच्छाशक्ति की कमी मानना उचित नहीं है; इसे स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी समस्या के रूप में समझना चाहिए, जिसमें सही सहायता और उपचार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
युवाओं के लिए तंबाकू अधिक चिंता का विषय क्यों?
किशोरावस्था और युवावस्था में मस्तिष्क का विकास तथा सीखने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरणों से गुजरती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कम उम्र में निकोटीन के संपर्क में आने से ध्यान, सीखने की क्षमता और मस्तिष्क के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कम उम्र में निकोटीन का सेवन शुरू करने से आगे चलकर इसकी निर्भरता विकसित होने की आशंका भी बढ़ती है। युवाओं में तंबाकू की शुरुआत के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मित्रों का दबाव, उत्सुकता, तनाव, फिल्मों या सामाजिक माध्यमों पर दिखने वाला व्यवहार और तंबाकू के नुकसान के बारे में अधूरी जानकारी इनमें शामिल हैं। कुछ लोग इसे आत्मविश्वास, आधुनिकता या समूह में स्वीकार्यता से जोड़कर देखने लगते हैं। लेकिन तंबाकू का सेवन आत्मविश्वास बढ़ाने या तनाव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
पढ़ाई, खेल, नौकरी और अन्य जिम्मेदारियों के बीच स्वस्थ शरीर और स्पष्ट सोच की जरूरत होती है। सांस लेने में परेशानी, बार-बार खांसी, शारीरिक सहनशक्ति में कमी और निकोटीन की तलब जैसी समस्याएं व्यक्ति की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता, लेकिन तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ाता है। इसलिए युवाओं को अपनी क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इससे दूरी बनानी चाहिए।
तंबाकू मुक्त अभियान में छह प्रमुख रणनीतियों पर जोर
तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 को केवल प्रचार अभियान तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके तहत जागरूकता, शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी, गांवों को तंबाकू मुक्त बनाने, कानूनों का पालन, उच्च शिक्षा संस्थानों में गतिविधियां और सामाजिक माध्यमों के जरिए संदेश फैलाने सहित छह प्रमुख रणनीतियां अपनाई गई हैं।
जागरूकता और व्यवहार में बदलाव- विद्यालयों, महाविद्यालयों और समुदायों में तंबाकू के नुकसान बताए जाएंगे। युवाओं को इसके सेवन की शुरुआत से बचने और पहले से सेवन कर रहे लोगों को इसे छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
विद्यालयों को तंबाकू मुक्त बनाना- तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान संबंधी दिशा-निर्देशों के पालन पर जोर दिया जाएगा। विद्यार्थियों, शिक्षकों और संस्थानों को परिसर में तंबाकू के इस्तेमाल तथा बिक्री के खिलाफ जागरूक किया जाएगा।
तंबाकू मुक्त गांव- स्थानीय प्रशासन और समुदायों की भागीदारी से गांवों में तंबाकू के सेवन को रोकने तथा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा।
कानूनों का प्रभावी पालन- तंबाकू नियंत्रण कानूनों के अंतर्गत प्रतिबंधित बिक्री, विज्ञापन और अन्य उल्लंघनों के विरुद्ध कार्रवाई तथा नियमों के पालन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की भागीदारी- उच्च शिक्षा संस्थानों में तंबाकू मुक्त परिसर, विद्यार्थियों के बीच जागरूकता और छात्र-छात्राओं के नेतृत्व में अभियान चलाने पर विशेष जोर रहेगा।
सामाजिक माध्यमों से संदेश- डिजिटल माध्यमों के जरिए तंबाकू के नुकसान, इसे छोड़ने के उपाय और अभियान की गतिविधियों को अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
इन रणनीतियों के माध्यम से केंद्र सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा कल्याण, स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना चाहती है। अभियान में युवाओं को केवल जागरूकता संदेश प्राप्त करने वाले लोगों के रूप में नहीं, बल्कि बदलाव की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार के रूप में शामिल करने पर जोर दिया गया है।
पिछले अभियानों में लाखों संस्थानों तक पहुंचा जागरूकता संदेश
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, तंबाकू मुक्त युवा अभियान के पिछले तीन संस्करणों के दौरान देश में 5.8 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों और 73 हजार से अधिक गांवों को तंबाकू मुक्त घोषित किया गया है। सरकार ने चौथे संस्करण में इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों पर विशेष ध्यान दिया है। यहां यह समझना जरूरी है कि किसी संस्थान या गांव को तंबाकू मुक्त घोषित किया जाना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि वहां तंबाकू का सेवन पूरी तरह समाप्त हो चुका है। ऐसे प्रयासों की वास्तविक सफलता नियमों के लगातार पालन, नियमित निगरानी, लोगों के व्यवहार में बदलाव और जरूरतमंदों को तंबाकू छोड़ने में सहायता उपलब्ध कराने पर निर्भर करेगी।
भारत में तंबाकू की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर क्या हैं नियम?
भारत में तंबाकू नियंत्रण के लिए कई कानूनी प्रावधान लागू हैं। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (COTPA) के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध, तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन और प्रचार पर नियंत्रण, पैकेटों पर स्वास्थ्य चेतावनी तथा नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर रोक जैसे प्रावधान शामिल हैं। इस कानून की धारा 6 के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है। इसके अलावा, किसी शैक्षणिक संस्थान की बाहरी सीमा से 100 गज के भीतर तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर भी रोक है। इन नियमों का उद्देश्य बच्चों और किशोरों को तंबाकू की आसान उपलब्धता से बचाना है।
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट को लेकर भी भारत में अलग कानून है। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और संबंधित उपकरणों के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण तथा विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसलिए युवाओं को यह नहीं मानना चाहिए कि पारंपरिक सिगरेट के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट या दूसरे निकोटीन उत्पाद अपनाना अपने आप में सुरक्षित विकल्प है।
तंबाकू छोड़ना चाहते हैं तो कहां मिलेगी मदद?
तंबाकू की लत से छुटकारा पाना कई लोगों के लिए कठिन हो सकता है, लेकिन सही सहायता से इसे छोड़ना संभव है। तंबाकू छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भारत की राष्ट्रीय तंबाकू मुक्ति सेवा उपलब्ध है।
राष्ट्रीय तंबाकू मुक्ति हेल्पलाइन
1800-112-356
टोल-फ्री नंबर
तंबाकू छोड़ने के लिए मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त करने हेतु इस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार चिकित्सक या तंबाकू मुक्ति केंद्र से परामर्श भी लिया जा सकता है।
तंबाकू छोड़ने के लिए सबसे पहले इसे छोड़ने का स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। सेवन की इच्छा कब और किन परिस्थितियों में अधिक होती है, इसकी पहचान करना उपयोगी हो सकता है। परिवार और मित्रों से सहयोग लेना, तंबाकू से जुड़े वातावरण से दूरी बनाना और इच्छा होने पर थोड़ी देर टहलने, पानी पीने या किसी दूसरी स्वस्थ गतिविधि में ध्यान लगाने जैसे उपाय मदद कर सकते हैं। यदि बार-बार प्रयास करने के बावजूद तंबाकू नहीं छूट रहा है, तो चिकित्सकीय परामर्श लेना उचित है। परामर्श और जरूरत के अनुसार उपचार से इसे छोड़ने की संभावना बेहतर हो सकती है।
युवाओं के नाम सरकार का संदेश: सपनों को चुनें, तंबाकू को नहीं
तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 का संदेश केवल स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी नहीं, बल्कि देश के युवाओं को अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग करने के लिए प्रेरित करने की पहल भी है। युवा पीढ़ी की ऊर्जा, प्रतिभा, रचनात्मकता और मेहनत देश के भविष्य को आकार देती है। ऐसे में उन्हें तंबाकू और निकोटीन की निर्भरता से बचाना परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी है। युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि स्वस्थ जीवनशैली किसी एक दिन का निर्णय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों से बनती है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और नशे से दूरी बेहतर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण आधार हैं। साथ ही, यदि कोई मित्र या परिवार का सदस्य तंबाकू का सेवन करता है, तो उसका मजाक उड़ाने या उसे दोष देने के बजाय उसे सही जानकारी देना और तंबाकू छोड़ने में सहयोग करना अधिक उपयोगी होगा।
केंद्र सरकार की अपील स्पष्ट है—युवावस्था में अपने लक्ष्य तय करें, अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता को मजबूत बनाएं तथा ऐसी आदतों से बचें जो भविष्य के लिए जोखिम पैदा करती हैं। तंबाकू से दूरी बनाकर न केवल खुद की सेहत की रक्षा की जा सकती है, बल्कि परिवार और आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों से बचाने में योगदान दिया जा सकता है। सपनों को पूरा करने के लिए सेहत चुनें, तंबाकू नहीं। सशक्त बनें, तंबाकू से दूर रहें। यही तंबाकू मुक्त युवा अभियान का मूल संदेश है।
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