गोल्ड ETF में निवेश का नया रिकॉर्ड, 1.86 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा कुल निवेश, निप्पॉन इंडिया सबसे आगे, शीर्ष 5 के पास बाजार का 80.2% हिस्सा
भारतीय निवेशकों के बीच सोने में निवेश का रुझान गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF) के रूप में तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है। इस क्षेत्र में निवेश के कुल आकार ने नया रिकॉर्ड बनाया है। 30 सितंबर 2026 तक देश में संचालित सभी 26 गोल्ड ETF योजनाओं का कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति मूल्य (AUM) बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। ICRA Analytics की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। आंकड़े बताते हैं कि गोल्ड ETF बाजार का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा योजनाओं के पास केंद्रित है। शीर्ष पांच योजनाएं मिलकर इस क्षेत्र की कुल परिसंपत्तियों का 80.2 प्रतिशत हिस्सा संभाल रही हैं।
गोल्ड ETF ऐसी निवेश योजनाएं हैं, जिनके जरिये निवेशक सोने की कीमतों से जुड़े निवेश में शेयर बाजार के माध्यम से भाग ले सकते हैं। इसमें आम तौर पर भौतिक सोना खरीदकर घर या बैंक लॉकर में रखने की जरूरत नहीं होती। निवेशक अपने डीमैट खाते और ट्रेडिंग खाते के जरिये इनकी इकाइयों की खरीद-बिक्री कर सकते हैं। हालांकि, इन योजनाओं का मूल्य सोने की कीमतों, संबंधित खर्चों और बाजार की परिस्थितियों से प्रभावित होता है। इसलिए गोल्ड ETF में निवेश को सोने की कीमतों में होने वाले बदलाव से अलग नहीं देखा जा सकता।
1.86 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा गोल्ड ETF बाजार
30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में 26 गोल्ड ETF योजनाओं का कुल AUM 1.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। AUM का अर्थ उस कुल परिसंपत्ति मूल्य से है, जिसका प्रबंधन संबंधित निवेश योजनाएं कर रही हैं। यह आंकड़ा किसी एक दिन में निवेशकों द्वारा जमा की गई नई रकम को नहीं दर्शाता। इसमें निवेशकों के निवेश के साथ सोने की कीमतों में बदलाव के कारण परिसंपत्तियों के बाजार मूल्य में होने वाला परिवर्तन भी असर डाल सकता है। गोल्ड ETF की बढ़ती परिसंपत्तियां इस निवेश श्रेणी के मौजूदा आकार को रेखांकित करती हैं। इसके साथ ही, अलग-अलग योजनाओं के बीच परिसंपत्तियों के वितरण से यह भी पता चलता है कि निवेश का बड़ा हिस्सा कुछ प्रमुख फंडों में केंद्रित है।
निप्पॉन इंडिया गोल्ड बीईईएस पहले स्थान पर
गोल्ड ETF की योजनाओं के बीच परिसंपत्तियों के आकार के मामले में निप्पॉन इंडिया ETF गोल्ड बीईईएस सबसे आगे है। 30 सितंबर 2026 तक इस योजना का AUM 56,982 करोड़ रुपये था। यह अकेले देश की गोल्ड ETF श्रेणी की कुल परिसंपत्तियों का 30.6 प्रतिशत हिस्सा संभाल रही थी। यानी इस श्रेणी में प्रबंधित प्रत्येक 100 रुपये में से लगभग 31 रुपये इस एक योजना के अंतर्गत थे। इसके बाद दूसरे स्थान पर ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF है, जिसका AUM 27,615 करोड़ रुपये था। तीसरे स्थान पर SBI गोल्ड ETF ने 26,466 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों के साथ जगह बनाई। HDFC गोल्ड ETF 23,900 करोड़ रुपये के AUM के साथ चौथे और कोटक गोल्ड ETF 14,473 करोड़ रुपये के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
देश की पांच सबसे बड़ी गोल्ड ETF योजनाएं
30 सितंबर 2026 तक का AUM
1. निप्पॉन इंडिया ETF गोल्ड बीईईएस 30.6%- 56,982 करोड़ रुपये
2. ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF 14.8%- 27,615 करोड़ रुपये
3. SBI गोल्ड ETF 14.2%- 26,466 करोड़ रुपये
4. HDFC गोल्ड ETF 12.8%- 23,900 करोड़ रुपये
5. कोटक गोल्ड ETF 7.8%- 14,473 करोड़ रुपये
स्रोत: ICRA Analytics के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट। प्रतिशत कुल गोल्ड ETF परिसंपत्तियों में संबंधित योजना की हिस्सेदारी दर्शाता है।
इन आंकड़ों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निप्पॉन इंडिया ETF गोल्ड बीईईएस का AUM दूसरे स्थान पर मौजूद ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। वहीं, शीर्ष तीन योजनाओं का संयुक्त हिस्सा कुल परिसंपत्तियों के करीब 60 प्रतिशत तक पहुंचता है। शीर्ष दो योजनाएं मिलकर लगभग 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि इस श्रेणी में निवेश का बड़ा हिस्सा कुछ स्थापित योजनाओं में केंद्रित है।
शीर्ष 10 योजनाओं के पास 92.4 प्रतिशत परिसंपत्तियां
गोल्ड ETF बाजार में शीर्ष पांच योजनाओं के बाद अगली पांच योजनाओं में टाटा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, एक्सिस गोल्ड ETF, यूटीआई गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, मिरे एसेट गोल्ड ETF और आदित्य बिड़ला सन लाइफ गोल्ड ETF शामिल हैं। इन पांच योजनाओं को शुरुआती पांच सबसे बड़ी योजनाओं के साथ जोड़ने पर शीर्ष 10 गोल्ड ETF योजनाओं की कुल परिसंपत्तियां लगभग 1.72 लाख करोड़ रुपये हो जाती हैं। इनकी हिस्सेदारी पूरी श्रेणी की कुल परिसंपत्तियों का 92.4 प्रतिशत है। इस तरह शेष 16 योजनाओं के पास संयुक्त रूप से करीब 7.6 प्रतिशत हिस्सा बचता है। यह आंकड़ा बाजार में बड़ी योजनाओं की मजबूत स्थिति को सामने रखता है। हालांकि, किसी योजना का AUM बड़ा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह हर निवेशक के लिए सबसे उपयुक्त है। निवेशकों को योजना के खर्च, सोने की कीमत को प्रतिबिंबित करने की क्षमता, कारोबार की उपलब्धता और अपने निवेश की अवधि जैसे पहलुओं को भी देखना चाहिए।
नई योजनाओं की हिस्सेदारी कितनी है?
ICRA Analytics के आंकड़ों के अनुसार, ऐसी 13 गोल्ड ETF योजनाएं जिनका निवेश प्रदर्शन का उपलब्ध इतिहास तीन वर्ष से कम है, कुल मिलाकर 14,575 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर रही थीं। यह पूरी श्रेणी के AUM का लगभग 8 प्रतिशत है। इन अपेक्षाकृत नई योजनाओं में टाटा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सबसे बड़ी योजना है, जो कुल श्रेणी में छठे स्थान पर है। इसके बाद जेरोधा गोल्ड ETF का AUM 2,523 करोड़ रुपये, मोतीलाल ओसवाल गोल्ड ETF का 1,927 करोड़ रुपये और एडलवाइस गोल्ड ETF का 1,759 करोड़ रुपये था। एक वर्ष से कम का उपलब्ध इतिहास रखने वाली चार योजनाओं का संयुक्त AUM 942 करोड़ रुपये था। इन आंकड़ों से पता चलता है कि नई योजनाओं के लिए बाजार में जगह मौजूद है, लेकिन फिलहाल उनकी संयुक्त परिसंपत्तियां स्थापित योजनाओं के मुकाबले काफी कम हैं। आने वाले समय में इनका विस्तार किस गति से होता है, यह प्रतिस्पर्धा की स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
सितंबर में गिरावट के बावजूद एक वर्ष का प्रदर्शन सकारात्मक
गोल्ड ETF के रिकॉर्ड AUM के साथ एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। सितंबर 2026 के दौरान इस श्रेणी के औसत एक महीने के प्रतिफल में 4.78 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद एक वर्ष की अवधि का प्रदर्शन सकारात्मक बना रहा। 30 सितंबर 2026 तक एक वर्ष के आधार पर शीर्ष पांच गोल्ड ETF योजनाओं की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) लगभग 27.2 से 27.5 प्रतिशत के बीच रही। वहीं, एक वर्ष का पूरा प्रदर्शन इतिहास रखने वाली अधिकांश अन्य योजनाओं की CAGR लगभग 26.1 से 28.1 प्रतिशत के दायरे में थी। इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि एक महीने की गिरावट और एक वर्ष का प्रतिफल अलग-अलग अवधियों के परिणाम हैं। एक वर्ष का सकारात्मक प्रदर्शन इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे भी उतना ही प्रतिफल मिलेगा। इसी तरह, AUM का ऊंचा स्तर भी भविष्य में सोने की कीमतों में वृद्धि का निश्चित संकेत नहीं है।
गोल्ड ETF क्या है और इसमें निवेश कैसे होता है?
गोल्ड ETF एक ऐसा निवेश माध्यम है, जिसके जरिये निवेशक सोने की कीमतों से जुड़े प्रतिफल में भाग ले सकते हैं। इसकी इकाइयों का शेयर बाजार में कारोबार होता है। आम तौर पर इसमें निवेश करने के लिए डीमैट खाता और ट्रेडिंग खाता आवश्यक होता है। निवेशक बाजार में उपलब्ध कीमत पर इकाइयां खरीद या बेच सकते हैं, बशर्ते संबंधित योजना में कारोबार उपलब्ध हो। भौतिक सोना खरीदने की तुलना में इस माध्यम में निवेशक को सोने के सिक्के, बिस्कुट या आभूषण अपने पास रखने की जरूरत नहीं होती। आभूषणों की तरह इसमें आभूषण बनाने का शुल्क भी नहीं लगता, हालांकि ETF में प्रबंधन शुल्क, कारोबार संबंधी खर्च और खरीद-बिक्री के बीच कीमत का अंतर हो सकता है। गोल्ड ETF की कीमत सोने के बाजार मूल्य से प्रभावित होती है। इसके अलावा योजना के खर्च, सोने की कीमत को प्रतिबिंबित करने में अंतर और बाजार में खरीद-बिक्री की परिस्थितियां भी वास्तविक प्रतिफल को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए निवेशक को यह नहीं मानना चाहिए कि सोने की कीमत में होने वाला प्रत्येक बदलाव ETF की कीमत में बिल्कुल उसी अनुपात में दिखाई देगा।
निवेशकों के लिए आंकड़ों का क्या अर्थ है?
गोल्ड ETF का कुल AUM 1.86 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचना इस निवेश श्रेणी के बड़े आकार को दर्शाता है। वहीं, शीर्ष पांच योजनाओं के पास 80.2 प्रतिशत और शीर्ष 10 के पास 92.4 प्रतिशत परिसंपत्तियों का होना बताता है कि निवेश का वितरण सभी योजनाओं में समान नहीं है। ICRA Analytics के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और बाजार आंकड़ा विभाग के प्रमुख अश्विनी कुमार के अनुसार, गोल्ड ETF बाजार का विस्तार हुआ है, लेकिन परिसंपत्तियां अब भी बड़ी योजनाओं में केंद्रित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग योजनाओं के प्रतिफल में काफी समानता होने के कारण केवल प्रदर्शन के अंतर से इस एकाग्रता को पूरी तरह नहीं समझाया जा सकता। नई योजनाओं की परिसंपत्तियां बढ़ाने की क्षमता आगे की प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण संकेत होगी। निवेशकों के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि केवल सबसे बड़े AUM वाली योजना को चुनना पर्याप्त नहीं है। किसी भी गोल्ड ETF में निवेश से पहले उसके कुल खर्च, कारोबार की मात्रा, खरीद-बिक्री के अंतर, सोने की कीमत को प्रतिबिंबित करने की क्षमता और निवेश के उद्देश्य पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
निष्कर्षतः, 30 सितंबर 2026 तक 26 गोल्ड ETF योजनाओं का AUM 1.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक होना और शीर्ष पांच योजनाओं की 80.2 प्रतिशत हिस्सेदारी इस बाजार की मौजूदा तस्वीर प्रस्तुत करती है। निप्पॉन इंडिया ETF गोल्ड बीईईएस सबसे बड़ी योजना बनी हुई है, जबकि ICICI प्रूडेंशियल, SBI, HDFC और कोटक की योजनाएं उसके बाद प्रमुख स्थान पर हैं। हालांकि, बाजार में आकार और पिछला प्रतिफल किसी भी निवेश के भविष्य के परिणाम की गारंटी नहीं देते।
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