नशे के खिलाफ अभियान के बीच बढ़ी प्रतिबंधित ई-सिगरेट की तस्करी, युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

The CSR Journal Magazine

ड्रग्स पर शिकंजा कसा तो बढ़ी प्रतिबंधित ई-सिगरेट की तस्करी, विदेश से आ रहा नशे का सामान, दिल्ली पुलिस की नजर में नया नशे का नेटवर्क

देश में नशे के खिलाफ चल रहे अभियानों के बीच दिल्ली पुलिस ने प्रतिबंधित ई-सिगरेट और वेपिंग उत्पादों की अवैध बिक्री और आपूर्ति को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। गांजा, स्मैक और हेरोइन जैसे मादक पदार्थों के खिलाफ पुलिस की सख्ती के बीच नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क द्वारा युवाओं तक निकोटिन पहुंचाने के लिए दूसरे रास्तों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। दिल्ली पुलिस के ताजा रिकॉर्ड में भी प्रतिबंधित ई-सिगरेट की अवैध बिक्री और आपूर्ति के मामले सामने आ रहे हैं। 7 अक्टूबर 2026 को द्वारका जिले की स्पेशल स्टाफ टीम ने प्रतिबंधित ई-सिगरेट की अवैध बिक्री और आपूर्ति के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर 106 ई-सिगरेट बरामद करने की जानकारी दी है।

ऑनलाइन बिक रहा नशा

पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रतिबंधित ई-सिगरेट अब केवल पारंपरिक दुकानों के जरिये ही नहीं, बल्कि गुप्त नेटवर्क और ऑनलाइन माध्यमों के जरिये भी ग्राहकों तक पहुंचाई जा रही हैं। देखने में ये उपकरण कई बार सामान्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, आकर्षक खिलौने या छोटे उपकरण जैसे दिखाई देते हैं। यही वजह है कि अभिभावकों और आम लोगों के लिए इनके बारे में पहचान करना आसान नहीं होता। रंग-बिरंगी पैकिंग, अलग-अलग स्वाद, आकर्षक डिजाइन और बड़ी संख्या में पफ की क्षमता युवाओं को इनकी ओर खींचने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

2 हजार से 15 हजार रुपये तक कीमत, हजारों पफ का दावा

बाजार में उपलब्ध अवैध वेप और डिस्पोजेबल ई-सिगरेट के कई मॉडल ऊंची कीमत पर बेचे जाते हैं। विभिन्न उत्पादों पर 600 से लेकर 20,000 तक पफ देने का दावा किया जाता है। कुछ उच्च क्षमता वाले उत्पादों में निकोटिन की मात्रा भी काफी अधिक हो सकती है। हालांकि किसी खास उत्पाद में वास्तविक निकोटिन कितनी है, यह केवल पैकेजिंग देखकर तय नहीं किया जा सकता। अवैध बाजार में बिकने वाले उत्पादों में लेबलिंग और सामग्री की विश्वसनीयता भी एक गंभीर सवाल है। यही स्थिति इसे सामान्य सिगरेट से अलग तरह की चुनौती बनाती है। एक पारंपरिक सिगरेट कुछ मिनट में खत्म हो जाती है, जबकि बड़ी क्षमता वाले डिस्पोजेबल वेप को लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया जाता है। इससे उपयोगकर्ता बार-बार निकोटिन लेने की स्थिति में पहुंच सकता है और निर्भरता बढ़ने का खतरा रहता है।

भारत में 18 सितंबर 2019 से प्रतिबंध

ई-सिगरेट को लेकर भारत में कानून की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (उत्पादन, विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) प्रतिषेध अधिनियम, 2019 लागू किया था। इसका प्रवर्तन 18 सितंबर 2019 से माना गया है। कानून का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए ई-सिगरेट के उत्पादन से लेकर उसकी बिक्री और विज्ञापन तक पर रोक लगाना है। इस कानून में ई-सिगरेट की परिभाषा व्यापक रखी गई है। ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो निकोटिन या अन्य पदार्थ को गर्म करके सांस के जरिये अंदर लेने योग्य एरोसोल बनाते हैं, इस दायरे में आते हैं। कानून में ई-सिगरेट के अलावा इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम, हीट-नॉट-बर्न उत्पाद, ई-हुक्का और इसी तरह के उपकरणों को भी शामिल किया गया है, चाहे उनका आकार या नाम कुछ भी हो। इसका मतलब यह है कि केवल दुकान में ई-सिगरेट बेचना ही अपराध नहीं है। इनके उत्पादन, आयात, निर्यात, परिवहन, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर भी कानून रोक लगाता है। इंटरनेट या वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिये किया गया विज्ञापन भी कानून की परिभाषा में आता है।

विदेश से आने वाले उत्पादों ने बढ़ाई चुनौती

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाना है। पुलिस जांच में थाईलैंड, कंबोडिया और चीन से ई-सिगरेट और वेपिंग उत्पाद भारत में पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। विदेश से आने के बाद इन उत्पादों को अलग-अलग चैनलों के जरिये शहरों में पहुंचाया जाता है और फिर छोटे विक्रेताओं, निजी नेटवर्क तथा ऑनलाइन संपर्कों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। इस तरह की आपूर्ति में एक और समस्या यह है कि उत्पाद का वास्तविक स्रोत और उसके भीतर मौजूद सामग्री की जानकारी उपभोक्ता के पास नहीं होती। वैध तंबाकू उत्पादों की तुलना में प्रतिबंधित और अवैध उत्पादों में गुणवत्ता नियंत्रण और सामग्री की निगरानी का भरोसा नहीं रहता। इसलिए उपयोगकर्ता को यह भी पता नहीं होता कि वह किस प्रकार का तरल या कितनी मात्रा में निकोटिन अपने शरीर में ले रहा है।

WHO के आंकड़े ने भी बढ़ाई चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2025 में पहली बार वैश्विक स्तर पर ई-सिगरेट के इस्तेमाल का अनुमान जारी किया। WHO के अनुसार दुनिया में 10 करोड़ से अधिक लोग ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें लगभग 8.61 करोड़ वयस्क और करीब 1.47 करोड़ किशोर शामिल हैं। WHO ने यह भी बताया कि उपलब्ध आंकड़ों वाले देशों में किशोरों में वेपिंग की औसत दर वयस्कों की तुलना में लगभग नौ गुना अधिक है। 2026 में WHO ने फिर चेतावनी दी कि निकोटिन और तंबाकू उद्योग ऐसे उत्पादों की डिजाइन और मार्केटिंग इस तरह कर रहे हैं, जिससे युवाओं में इनकी आकर्षकता बढ़े। संगठन के मुताबिक दुनियाभर में 13 से 15 वर्ष की उम्र के कम से कम 1.5 करोड़ किशोर ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

निकोटिन की लत सबसे बड़ा खतरा

ई-सिगरेट को कई बार सामान्य सिगरेट के मुकाबले सुरक्षित विकल्प के तौर पर प्रचारित किया जाता है, लेकिन WHO के मुताबिक ई-सिगरेट में मौजूद एरोसोल में निकोटिन के अलावा विभिन्न रसायन, स्वाद और अन्य पदार्थ हो सकते हैं। इनका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। निकोटिन अत्यधिक लत लगाने वाला पदार्थ है और कम उम्र में इसका इस्तेमाल मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है। WHO के अनुसार निकोटिन वाली ई-सिगरेट अत्यधिक नशे की लत पैदा कर सकती है। इनके इस्तेमाल से ऐसे जहरीले पदार्थ पैदा हो सकते हैं जिनमें कुछ कैंसर से जुड़े हैं और कुछ हृदय तथा फेफड़ों से संबंधित जोखिम बढ़ा सकते हैं। युवाओं में इसका इस्तेमाल मस्तिष्क के विकास और सीखने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञों की चिंता केवल मौजूदा उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं है। कम उम्र में वेपिंग शुरू करने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे निकोटिन पर निर्भर हो सकता है और बाद में दूसरे तंबाकू उत्पादों की ओर भी बढ़ सकता है। आकर्षक स्वाद और आधुनिक डिजाइन इस खतरे को और गंभीर बनाते हैं।

ऑनलाइन बिक्री पर पुलिस की नजर

प्रतिबंधित ई-सिगरेट की बिक्री रोकने में ऑनलाइन माध्यम एक बड़ी चुनौती बन गया है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और निजी संपर्कों के माध्यम से ग्राहक और विक्रेता एक-दूसरे तक पहुंच सकते हैं। कई बार खुले तौर पर उत्पाद का नाम लिखने के बजाय कोड शब्दों, तस्वीरों या दूसरे नामों का इस्तेमाल किया जाता है। कानून में इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिये ई-सिगरेट के विज्ञापन को भी प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है। इसलिए डिजिटल माध्यम से इन उत्पादों का प्रचार और बिक्री केवल स्वास्थ्य के लिहाज से ही नहीं, बल्कि कानूनी दृष्टि से भी गंभीर विषय है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से सामने आया खतरा

दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर 7 अक्टूबर 2026 को जारी रिकॉर्ड में द्वारका जिले में प्रतिबंधित ई-सिगरेट की अवैध बिक्री और आपूर्ति के मामले में 106 ई-सिगरेट बरामद किए जाने की जानकारी दर्ज है। इससे संकेत मिलता है कि प्रतिबंधित उत्पादों की आपूर्ति के खिलाफ पुलिस की निगरानी जारी है। इससे पहले भी दिल्ली पुलिस ने प्रतिबंधित ई-सिगरेट से जुड़े मामलों में कार्रवाई की है। पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में अक्टूबर 2025 में क्राइम ब्रांच द्वारा प्रतिबंधित ई-सिगरेट से जुड़े एक आपूर्ति नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख भी मिलता है।

ड्रग्स के खिलाफ अभियान के बीच नई चुनौती

नशे के खिलाफ अभियान में केवल गांजा, स्मैक, हेरोइन या अन्य मादक पदार्थों की बरामदगी ही चुनौती नहीं है। निकोटिन आधारित प्रतिबंधित उत्पादों का अवैध बाजार भी युवाओं तक नशे की आदत पहुंचाने वाला एक अलग रास्ता बन सकता है। हालांकि ई-सिगरेट को हर मामले में पारंपरिक मादक पदार्थों के बराबर रखना सही नहीं होगा, लेकिन निकोटिन की लत और युवाओं में इसके तेजी से फैलते इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार चेतावनी दे रही हैं। ऐसे में पुलिस के लिए केवल विक्रेता को पकड़ना पर्याप्त नहीं होगा। विदेशी आपूर्ति से लेकर स्थानीय भंडारण, ऑनलाइन प्रचार, डिलीवरी नेटवर्क और अंतिम खरीदार तक पूरी श्रृंखला की पहचान करना जरूरी है। साथ ही स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता, अभिभावकों की निगरानी और युवाओं को निकोटिन की लत से बचाने के उपाय भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

बढ़ती चुनौती से निपटने की जरूरत

प्रतिबंध के बावजूद यदि महंगे और हजारों पफ वाले वेप युवाओं तक पहुंच रहे हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती भी है। दिल्ली पुलिस की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि नशीले पदार्थों के पारंपरिक नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ-साथ प्रतिबंधित निकोटिन उत्पादों की छिपी हुई आपूर्ति श्रृंखला पर कितनी प्रभावी निगरानी हो रही है। आने वाले समय में ऑनलाइन बिक्री, विदेशी आपूर्ति और युवाओं में बढ़ती मांग पर शिकंजा कसना इस चुनौती से निपटने की दिशा में अहम कदम होगा।

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