जयपुर में ‘इलेक्ट्रिशियन’ बनकर छिपा आतंकी, फर्जी दस्तावेजों से विदेश तक पहुंचा ‘खरगोश’

The CSR Journal Magazine
जयपुर में एक साल तक गुमनाम रहकर लश्कर से जुड़ा आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ इलेक्ट्रिशियन बनकर रह रहा था। फर्जी किरायानामा और पहचान के सहारे उसने पासपोर्ट बनवाया और इंडोनेशिया व सऊदी अरब तक पहुंच गया।

जयपुर में गुमनामी की आड़ में खड़ा किया नेटवर्क

राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ एक साल तक सामान्य नागरिक बनकर रह रहा था। जयसिंहपुरा खोर थाना क्षेत्र के सड़वा मोड़ स्थित राशिद विहार कॉलोनी में उसने बेहद साधारण जीवनशैली अपनाई और खुद को इलेक्ट्रिशियन बताकर लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई। वह मात्र 1500 रुपये महीने के किराए पर एक छोटे कमरे में रहता था, जिससे किसी को उस पर शक नहीं हुआ। इस दौरान उसने स्थानीय स्तर पर अपनी गतिविधियों को बेहद सीमित रखा, जिससे उसकी असली पहचान छिपी रही।

फर्जी किरायानामा और पासपोर्ट से विदेश यात्रा

जांच में सामने आया कि उमर ने आठ साल का फर्जी किरायानामा तैयार कराया, जिसे नोटरी से प्रमाणित भी कराया गया। इसी दस्तावेज के आधार पर उसने ‘सज्जाद’ नाम से पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस वेरिफिकेशन भी बिना गहन जांच के पूरा हो गया। इस खामी का फायदा उठाकर उसने अपनी फर्जी पहचान को वैध रूप दे दिया। इसके बाद वह इंडोनेशिया और सऊदी अरब तक यात्रा करने में सफल रहा। जांच एजेंसियों का मानना है कि ई-मित्र जैसी सेवाओं के जरिए दस्तावेजी प्रक्रिया आसान होने से उसने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया।

संदिग्ध दिनचर्या 16 घंटे लैपटॉप पर, कम बातचीत

स्थानीय लोगों के अनुसार उमर का व्यवहार बेहद शांत और सीमित था। वह अधिकतर समय अपने कमरे में बंद रहता था और करीब 16 घंटे तक लैपटॉप पर काम करता था। वह केवल नमाज पढ़ने के लिए पास की मस्जिद जाता और तुरंत लौट आता था। किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था और कई लोगों को उसने अलग-अलग नाम बताए, जिनमें ‘अमजद’ भी शामिल था। उसकी यही चुप्पी और सीमित संपर्क उसे लंबे समय तक शक के दायरे से बाहर रखे हुए थे। पड़ोसियों ने बताया कि वह सामाजिक गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहता था।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के इनपुट से हुआ खुलासा

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जम्मू-कश्मीर पुलिस को आतंकी के संबंध में अहम जानकारी मिली। इसके बाद राजस्थान एटीएस के साथ मिलकर कार्रवाई की गई। एटीएस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दिनेश एम.एन. के अनुसार, इस मामले में चार संदिग्धों को गिरफ्तार कर जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंप दिया गया है। इनमें मकान मालिक आमिर हसन भी शामिल है, जिससे पूछताछ जारी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उमर के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और उसने जयपुर में रहते हुए किन-किन गतिविधियों को अंजाम दिया।
जयपुर में सामने आया यह मामला सुरक्षा और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करता है। एक आतंकी का इतने लंबे समय तक फर्जी पहचान के साथ रहना और विदेश यात्रा करना कई सवाल खड़े करता है। अब एजेंसियां इस नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जांच तेज कर रही हैं।

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