स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुर्या हॉस्पिटल्स (Surya Hospital Human Milk Bank) ने उन माताओं को सम्मानित किया, जिन्होंने अपना अतिरिक्त स्तन दूध दान कर समय से पहले जन्मे और कमजोर नवजातों को नई जिंदगी की उम्मीद दी। अस्पताल ने अपने Human Milk Bank के जरिए नवजात पोषण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2019 में शुरू किए गए इस मिल्क बैंक से अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को लाभ मिल चुका है।
जरूरतमंद नवजातों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रहा डोनर मिल्क
विश्व स्तनपान सप्ताह के बाद आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य human milk donation को लेकर जागरूकता बढ़ाना और डोनर माताओं के योगदान को सम्मान देना था। अस्पताल के मुताबिक, कई बार समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले या गंभीर स्थिति वाले नवजातों को उनकी मां का पर्याप्त दूध तत्काल उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय मानकों के तहत उपलब्ध कराया गया Donor Human Milk महत्वपूर्ण पोषण सहायता देता है। मानव दूध समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों के लिए आसानी से पचने वाला होता है। इसमें नवजात के विकास और संक्रमण से बचाव में मदद करने वाले महत्वपूर्ण पोषक और सुरक्षात्मक तत्व मौजूद होते हैं।
2019 से 2 हजार से ज्यादा बच्चों को मिला फायदा
सुर्या हॉस्पिटल्स का Human Milk Bank वर्ष 2019 में शुरू हुआ था और इसे निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के बड़े मानव दूध बैंकों में शामिल किया जाता है। अस्पताल के अनुसार, पिछले सात वर्षों में 2,000 से अधिक नवजातों को डोनर मिल्क उपलब्ध कराया गया है। हर साल अस्पताल में करीब 100 से 120 कम वजन वाले नवजातों को उनकी चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार स्तन दूध की अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता पड़ती है। सुर्या हॉस्पिटल्स के संस्थापक, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. भूपेंद्र एस. अवस्थी ने कहा कि Human Milk Bank का उद्देश्य उन समय से पहले जन्मे बच्चों तक सुरक्षित डोनर मिल्क पहुंचाना है, जिन्हें पर्याप्त मात्रा में मां का दूध नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर यह पहल समाज में देने की भावना को मजबूत करने का संदेश देती है।
स्क्रीनिंग और पाश्चुरीकरण के बाद बच्चों तक पहुंचता है दूध
अस्पताल के Human Milk Bank में दूध दान करने वाली माताओं की उचित मेडिकल स्क्रीनिंग की जाती है। इसके बाद प्राप्त दूध की जांच, प्रोसेसिंग और Pasteurisation की प्रक्रिया पूरी की जाती है। नियंत्रित परिस्थितियों में स्टोरेज के बाद चिकित्सकीय मानकों के अनुसार जरूरतमंद नवजातों को यह दूध दिया जाता है। अस्पताल की ओर से डोनर माताओं को काउंसलिंग भी दी जाती है। इसमें खास तौर पर इस भ्रम को दूर किया जाता है कि दूध दान करने से मां के अपने बच्चे के लिए दूध की कमी हो सकती है।
जांकी मेहता ने माताओं से की आगे आने की अपील
कार्यक्रम में कलाकार और मां जांकी मेहता, जो स्वयं Human Milk Donor रह चुकी हैं, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने माताओं से मानव दूध दान के बारे में जागरूक होने की अपील करते हुए कहा कि अपने अतिरिक्त दूध से किसी दूसरे बच्चे को मजबूत और स्वस्थ बनने में मदद करना बेहद Meaningful अनुभव है। सुर्या हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. हरि बालासुब्रमणियन ने बताया कि पर्याप्त दूध बनाने वाली स्वस्थ माताएं उचित मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद दूध दान करने पर विचार कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में काउंसलिंग, स्क्रीनिंग, सुरक्षित संग्रह और प्रोसेसिंग शामिल है और माताओं को विशेषज्ञों की सलाह के साथ ही निर्णय लेना चाहिए।
जागरूकता बढ़ाने पर अस्पताल का जोर
सुर्या हॉस्पिटल्स का लक्ष्य आने वाले समय में Human Milk Donation, Breastfeeding Support और Neonatal Nutrition को लेकर जागरूकता और बढ़ाना है। अस्पताल का कहना है कि एक मां का अतिरिक्त दूध किसी दूसरे नवजात के जीवन के बेहद महत्वपूर्ण शुरुआती दौर में उसे जरूरी पोषण उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
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