दवा निर्माताओं को मिल रही मदद पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, मांगा जवाब

The CSR Journal Magazine

दवा की कीमतों में अंतर पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और रिटेलर को मिलने वाली कीमतों के बीच के बड़े अंतर पर सरकार से कड़े सवाल पूछे। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्पष्ट शब्दों में पूछा, “पूरा सिस्टम दवा निर्माताओं की मदद क्यों कर रहा है?” इस मामले में कोर्ट ने नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) को निष्क्रिय बताया। कोर्ट दवाओं की कीमतों से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रहा था।

सरकार का तर्क और कोर्ट की प्रतिक्रिया

सरकार ने दवा की कीमतों को लेकर कहा कि भारत में दवाओं की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं। इस पर बेंच ने तीखा सवाल किया, “क्या इसे ऐसे ही बेलगाम चलने दिया जाना चाहिए?” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति सरकार की नजरों के सामने हो रही है। केंद्र ने सुनवाई के दौरान बताया कि उनकी नीति है कि “पूरे इकोसिस्टम को नियंत्रित नहीं किया जाए।” इस पर बेंच ने फिर से सवाल उठाया, “पूरा सिस्टम इन निर्माताओं की मदद के लिए क्यों काम कर रहा है?”

एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन का मुद्दा

सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने केंद्र के जवाब को संतोषजनक नहीं पाया और कहा कि एंटी-कैंसर दवाओं का ट्रेड मार्जिन MRP के 30% तक सीमित करने का निर्णय क्या अन्य दवाओं पर लागू नहीं किया जा सकता? केंद्र ने इस पर कहा कि यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत होने की उम्मीद है।

दवा निर्माताओं की भूमिका पर सवाल

कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या दवा निर्माताओं का यह लाभ केवल उनके मुनाफे के लिए है? बेंच ने कहा कि यह स्थिति गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दवा की कीमतों में असमानता के कारण आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चर्चा की गई। कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जो आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगा।

सिस्टम की निष्क्रियता पर चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने NPPA की निष्क्रियता पर चिंता जताई है। बेंच ने कहा कि यदि यह स्थिति ऐसे ही चलती रही, तो इससे दवा की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल दवा निर्माताओं के लिए नहीं, बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय है।

आने वाले फैसले का इंतजार

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। क्या कोर्ट दवा की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा? क्या NPPA को सक्रिय किया जाएगा? यह सब देखने के लिए सभी तैयार हैं। इस मामले की सुनवाई से यह स्पष्ट होता है कि दवा की कीमतों में असमानता केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक समस्या भी है।

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