सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताने पर भड़के सिख, राहुल गांधी के आवास का घेराव

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सिख नेताओं का राहुल गांधी के घर के बाहर प्रदर्शन: सज्जन कुमार को हीरो बताने पर कांग्रेस से की माफी की मांग

नई दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आवास के बाहर शनिवार (22 अगस्त 2026) को सिख संगठनों और 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 1984 के सिख कत्लेआम के मुख्य दोषियों में से एक और कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा उन्हें ‘हीरो’, ‘रोल मॉडल’ और ‘अपूरणीय क्षति’ बताए जाने के खिलाफ किया गया। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में सिखों ने कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी से इस अपमानजनक कृत्य के लिए बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दंगों के दोषी को महिमामंडित करके कांग्रेस ने सिख समुदाय के 42 साल पुराने जख्मों पर फिर से नमक छिड़क दिया है।

कांग्रेसी नेताओं की ‘श्रद्धांजलि’ से भड़का सिख समुदाय; DSGMC ने पूछा- क्या कातिल ही कांग्रेस के रोल मॉडल हैं?

 शनिवार दोपहर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास के बाहर का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के बैनर तले सैकड़ों सिख प्रदर्शनकारी, जिनमें 1984 के दंगा पीड़ित परिवारों की बुजुर्ग महिलाएं और युवा शामिल थे, तख्तियां और बैनर लेकर राहुल गांधी के घर की तरफ बढ़े। प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने राहुल गांधी के आवास के चारों ओर भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शनकारी लगातार कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और सुरक्षा घेरे को तोड़ने का प्रयास कर रहे थे।

विवाद की पृष्ठभूमि: सज्जन कुमार का निधन और कांग्रेस के बयान

इस भारी विवाद की शुरुआत 20 अगस्त 2026 (गुरुवार) को हुई, जब 1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे 80 वर्षीय पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार की तिहाड़ जेल से सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद मौत हो गई। सज्जन कुमार की मौत के बाद कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं, जिनमें कथित तौर पर सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और उदित राज जैसे नाम शामिल हैं, ने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए सज्जन कुमार के निधन को पार्टी के लिए ‘अपूरणीय क्षति’ बताया और उन्हें एक बड़ा नेता व मार्गदर्शक करार दिया। कांग्रेस नेताओं के इसी रवैये ने सिख समुदाय के भीतर गुस्से की आग को भड़का दिया।

’42 साल पुराने जख्म फिर हुए हरे’: हरमीत सिंह कलका

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कलका और महासचिव जगदीप सिंह कहलोन ने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को सीधे आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी के आवास के बाहर मीडिया से बात करते हुए हरमीत सिंह कलका ने कहा:”सज्जन कुमार कोई साधारण नेता नहीं था, वह देश की अदालतों द्वारा प्रमाणित सिखों का हत्यारा था। उसकी मौत के बाद कांग्रेस नेताओं ने जिस तरह के बयान दिए और उन्हें अपना हीरो व रोल मॉडल बताया, वह बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है। राहुल गांधी को आज देश के सामने और सिखों के सामने यह साफ करना होगा कि क्या सिखों का कातिल सज्जन कुमार उनका और उनकी पार्टी का असली हीरो है? कांग्रेस नेताओं के इस घिनौने कृत्य ने 42 साल बाद हमारे परिवारों के जख्मों को फिर से कुरेद दिया है।” जगदीप सिंह कहलोन ने मांग की कि राहुल गांधी स्वयं सामने आएं और दीपेंद्र हुड्डा सहित उन सभी नेताओं के बयानों पर जवाबदेही तय करते हुए पूरे सिख समाज से लिखित में माफी मांगें।

पीड़ित परिवारों की दर्दभरी दास्तां और रोष

प्रदर्शन में शामिल 1984 दंगों की एक बुजुर्ग पीड़ित महिला ने रोते हुए कहा, “हमने अपनी आंखों के सामने अपने पिताओं, भाइयों और पतियों को जलते हुए देखा है। सज्जन कुमार जैसे लोग उस भीड़ को उकसा रहे थे। कोर्ट ने उसे सजा दी, तब जाकर हमारी आत्मा को थोड़ी शांति मिली थी। लेकिन आज कांग्रेस के नेता उसे अपना आइकॉन बता रहे हैं। यह हमारे आंसुओं और हमारी त्रासदी का क्रूर मजाक है। जब तक राहुल गांधी माफी नहीं मांगेंगे, हमारा यह विरोध थमेगा नहीं।”

राजनीतिक घमासान: भाजपा का ‘मोहब्बत की दुकान’ पर तीखा प्रहार

इस मुद्दे को लेकर देश का सियासी पारा भी पूरी तरह चढ़ चुका है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली सरकार के मंत्री और सिख नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक वीडियो जारी कर कहा कि कांग्रेस का असली चरित्र एक बार फिर बेनकाब हो गया है। सिरसा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा से सिख-विरोधी रही है और सज्जन कुमार जैसे अपराधियों को पार्टी ने हमेशा संरक्षण दिया। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर राहुल गांधी के चुनावी नारे पर तंज कसा:”1984 के सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार को कांग्रेस अपना ‘रोल मॉडल’ बता रही है! जो व्यक्ति हजारों बेकसूर सिखों के कत्लेआम का जिम्मेदार था, कांग्रेस उसका महिमामंडन कैसे कर सकती है? यह राहुल गांधी की तथाकथित ‘मोहब्बत की दुकान’ की असली सच्चाई और सोच है। यह साबित करता है कि कांग्रेस के मन में सिख समुदाय के प्रति कितनी नफरत भरी है। कांग्रेस को इस घोर अपमान के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए।”

इतिहास के पन्नों में सज्जन कुमार का काला अध्याय

सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर जितना तेजी से ऊपर चढ़ा था, उसका अंत उतना ही अंधकारमय रहा। 1977 में दिल्ली के पार्षद से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले सज्जन कुमार तीन बार लोकसभा सांसद रहे और दिल्ली में कांग्रेस का एक बड़ा चेहरा माने जाते थे। परंतु, 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में भड़के सिख विरोधी दंगों में उनकी भूमिका ने उन्हें इतिहास का खलनायक बना दिया।

दिसंबर 2018 की सजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने नवंबर 1984 में दिल्ली के राज नगर पार्ट-1 (पालम इलाका) में पांच सिखों की बेरहमी से हत्या करने और एक गुरुद्वारे को आग लगाने के मामले में सज्जन कुमार को आपराधिक साजिश और दंगों को भड़काने का दोषी पाया। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें ताउम्र कैद (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी और टिप्पणी की थी कि यह “मानवता के खिलाफ अपराध” था। इसके बाद सज्जन कुमार को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।

फरवरी 2025 की दूसरी उम्रकैद

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने फरवरी 2025 में एक अन्य मामले (सरस्वती विहार कांड) में सज्जन कुमार को एक और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में एक सिख पिता-पुत्र (जसवंत सिंह और तरुंदीप सिंह) को भीड़ ने पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था और अदालत ने माना था कि सज्जन कुमार ने उस हिंसक भीड़ का नेतृत्व किया था।

कांग्रेस बैकफुट पर, सफाई की कोशिशें जारी

सिख समुदाय के इस भारी आक्रोश और चारों तरफ से घिरने के बाद कांग्रेस पार्टी रक्षात्मक मुद्रा (बैकफुट) पर नजर आ रही है। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ताओं की ओर से अभी तक इस विरोध प्रदर्शन पर कोई औपचारिक या सीधा बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे व्यक्तिगत श्रद्धांजलि बताते हुए डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है। सिखों की नाराजगी को देखते हुए दिल्ली के स्थानीय कांग्रेस नेता इस पूरे विवाद से दूरी बनाते दिख रहे हैं।

जवाबदेही की मांग पर अड़ा सिख समाज

राहुल गांधी के घर के बाहर हुआ यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों परिवारों के न्याय की लड़ाई का हिस्सा है जिन्होंने दशकों तक अदालतों के चक्कर काटे हैं। सिख नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे केवल बयानों से संतुष्ट नहीं होंगे। जब तक कांग्रेस के शीर्ष नेता और खुद राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से आकर इन बयानों की निंदा नहीं करते और सिख समाज से माफी नहीं मांगते, तब तक उनका देशव्यापी प्रदर्शन और कड़ा विरोध जारी रहेगा। दिल्ली पुलिस ने एहतियात के तौर पर कांग्रेस मुख्यालय और 10 जनपथ (राहुल गांधी के आवास) के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को अगले कुछ दिनों तक कड़ा रखने का फैसला किया है।

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