श्री बद्रीनाथ में दान-चढ़ावे के अनियमितताओं की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन

The CSR Journal Magazine
श्री बद्रीनाथ मंदिर में दान-चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं के संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त कदम उठाया है। उन्होंने एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है जिसका अध्यक्ष गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप होंगे। इस समिति में NHM के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान भी शामिल हैं। यह कार्रवाई एकत्रित दान-चढ़ावे में अनियमितताओं की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर की गई है, जो कि स्थानीय और धार्मिक दोनों ही समुदायों में चिंता का विषय बन गई थी।

जांच में तेजी: 15 दिन का वक्त

सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी जांच का विवरण और संस्तुतियां सरकार को प्रस्तुत करनी हैं। यह जांच न केवल अनियमितताओं के प्रमाण ढूंढेगी, बल्कि दान-चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र में सुधार के लिए भी आवश्यक सुझाव देगी। इस दौरान समिति चाहती है कि कोई भी विशेषज्ञ या संबंधित व्यक्ति उनकी मदद के लिए आगे आए।

निलंबन की कार्रवाई: प्रमोद नौटियाल पर खतरा

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तात्कालिक सहायक प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया है। नौटियाल पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जांच समिति ने प्रारंभिक परिणामों को देखकर उनकी कार्रवाई की सिफारिश की थी। जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए उन्हें तत्काल निलंबित किया गया है।

जांच समिति का गठन: अधिकार का दुरुपयोग नहीं

जांच के दौरान समिति को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी संबंधित अधिकारी या विशेषज्ञ से सलाह ले सके। हालांकि, प्रमोद नौटियाल को उनके मौजूदा पद पर बनाए रखने से जांच प्रभावित होने का जोखिम था। इसलिए उन्हें निलंबित किया गया है। यह कदम न केवल अनुशासन को बनाए रखने के लिए, बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया को सही ढंग से संचालित करने के लिए जरूरी था।

पारदर्शिता की दिशा में ठोस कदम

बीकेटीसी ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। अगर दान-चढ़ावे में किसी प्रकार की अनियमितता का मामला सामने आता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में, प्रमोद नौटियाल को जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, लेकिन उन्हें जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई में सहयोग देना अनिवार्य होगा।

भविष्य की ओर: उम्मीदें और चुनौती

इस उच्चस्तरीय समिति का गठन भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए एक आशा की किरण है। हालांकि, क्या यह जांच सच में निष्पक्ष और प्रभावी होगी, यह देखने वाली बात होगी। प्रशासन की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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