‘राम सिया राम…’ नेत्रहीन रविंद्र जैन की वो धुन, जो 51 साल बाद भी है हिट

The CSR Journal Magazine
राम का नाम आए और संगीत में भक्ति की मिठास घुल जाए, तो वो धुन कभी पुरानी नहीं होती। कुछ ऐसा ही हुआ रविंद्र जैन की बनाई उस धुन के साथ, जिसे सुनते ही आज भी जुबां पर आ जाता है- ‘राम सिया राम, सिया राम जय जय राम’। करीब 51 साल पहले, 1975 में फिल्म ‘गीत गाता चल’ के लिए तैयार हुआ भक्ति गीत आज भी लोगों के बीच उतना ही लोकप्रिय है। खास बात ये है कि अब ‘रामायण’ से जुड़े नए गाने ‘जय जय राम’ में इस पुराने भक्ति संगीत की झलक दिख रही है। इस गीत के पीछे दो महत्वपूर्ण नाम हैं, संगीतकार रविंद्र जैन और गायक जसपाल सिंह।

रविंद्र जैन का अद्वितीय सफर

रविंद्र जैन वे संगीतकार हैं, जिन्होंने अपनी नेत्रहीनता को कभी अपनी रचनात्मकता का बाधा नहीं बनने दिया। जन्म से नेत्रहीन होने के बावजूद, उन्होंने संगीत की दुनिया में वो मुकाम हासिल किया, जो आज भी लोगों की यादों में जिंदा है। संगीत का उन पर गहरा असर था, जो भक्ति और धार्मिक धुनों से शुरू होकर धीरे-धीरे फिल्मों तक पहुंचा। उनकी विशेषता यह थी कि वे सरल धुनों में मिठास भर देते थे, जिससे गाने सीधे लोगों के दिलों में उतर जाते थे।

भक्ति संगीत से गहरा रिश्ता

रविंद्र जैन ने ‘रामायण’ के संगीत में भी अपने हुनर का लोहा मनवाया। जब रामानंद सागर की ‘रामायण’ जैसे विधा में उनका योगदान आया, तो उन्होंने रामकथा को संगीत के जरिए एक विशेष भाषा दी। फिल्म ‘गीत गाता चल’ में बनाई गई धुन “राम सिया राम” ने इतने सालों बाद भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखी है।

जसपाल सिंह: आवाज का जादूगर

जसपाल सिंह हिंदी सिनेमा के उन गायक थे, जिनकी आवाज में अद्वितीय मिठास थी। उनके गाए गाने 70 और 80 के दशक में विशेष रूप से लोकप्रिय रहे। ‘गीत गाता चल’ के साथ उन्होंने ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ जैसे भक्ति गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी आवाज में कोई भारीपन नहीं था, जिससे उनके गाने लोगों के दिलों तक आसानी से पहुंच जाते थे।
1987 में ‘रामायण’ के टेलीविजन पर आने के बाद इस धुन की असली सफलता मिली। रविंद्र जैन के संगीत ने घर-घर में रामायण के गानों को एक नई पहचान दी। इस धुन के जरिए भक्ति की एक नई लहर बही, जिसने देशभर में बहुतों के दिलों को छुआ। अब हर सुबह की पूजा या मंदिर में, यह धुन सुनाई देती थी।

विरासत का जादू 2023 में

अब 2023 में ‘आदिपुरुष’ में भी “मंगल भवन अमंगल हारी” का नया संस्करण पेश किया गया है। नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में “जय जय राम” ने एक बार फिर पुराने भक्ति संगीत की यादें ताजा कर दी हैं। यह गाना ए. आर. रहमान ने कंपोज किया है और इसे अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने गाया है।
51 साल बाद भी अगर कोई धुन नई पीढ़ी को अपनी ओर खींच रही है, तो यह रविंद्र जैन का संगीत केवल एक गीत नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय संगीत और रामभक्ति की एक अनमोल विरासत बन चुका है, जिसे वक्त भी पुराना नहीं कर पाया।

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