RailOne का नया शेयरेबल सीजन टिकट, फोटो और QR कोड अनिवार्य, नहीं तो लगेगा जुर्माना

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RailOne का नया सीजन टिकट नियम: अब फोटो और QR कोड के बिना यात्रा नहीं, दूसरे व्यक्ति के लिए टिकट बुक करने की सुविधा

मुंबई की लोकल ट्रेनों समेत भारतीय रेलवे की उपनगरीय यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए RailOne ऐप से जुड़े सीजन टिकट को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। रेलवे ने शेयरेबल सीजन टिकट की सुविधा शुरू की है, जिसके तहत RailOne पर पंजीकृत यात्री अपने अलावा परिवार के सदस्यों या अन्य लोगों के लिए भी सीजन टिकट बुक कर सकता है। हालांकि, इस सुविधा के साथ टिकट की वैधता और जांच को लेकर कुछ कड़े नियम भी लागू किए गए हैं। अब यात्रा के दौरान प्रस्तुत किए जाने वाले डिजिटल सीजन टिकट में यात्री की तस्वीर और स्पष्ट, पढ़ने योग्य QR कोड होना जरूरी होगा। रेलवे जांच के दौरान इन्हीं माध्यमों से टिकट और यात्री की पहचान की पुष्टि कर सकेगा। यह नई व्यवस्था 2 सितंबर 2026 से शुरू की गई शेयर करने योग्य सीजन टिकट सुविधा का हिस्सा है। इसे रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद लागू किया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को टिकट बुकिंग में अधिक सुविधा देना है, लेकिन साथ ही टिकट के गलत इस्तेमाल, टिकट की अनधिकृत कॉपी या किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा उसका इस्तेमाल किए जाने की संभावना को कम करना भी है।

एक यात्री अपने अलावा पांच लोगों के लिए बुक कर सकता है टिकट

नई सुविधा का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि RailOne पर पंजीकृत उपयोगकर्ता अपने लिए एक और अधिकतम पांच अन्य लोगों के लिए सीजन टिकट बुक कर सकता है। यानी एक पंजीकृत उपयोगकर्ता के माध्यम से कुल छह सीजन टिकट बुक किए जा सकते हैं। इनमें परिवार के सदस्य या अन्य लाभार्थी शामिल हो सकते हैं। इससे उन परिवारों को सुविधा मिलने की उम्मीद है जिनमें हर सदस्य के पास अलग-अलग डिजिटल टिकट बुकिंग की सुविधा या प्रक्रिया संभालने का समय नहीं होता। खासकर मुंबई जैसे शहर में, जहां रोजाना लाखों यात्री लोकल ट्रेनों से कार्यालय, कारोबार, शिक्षा और अन्य कामों के लिए यात्रा करते हैं, सीजन टिकट नियमित यात्रियों के लिए काफी उपयोगी होता है। हालांकि, दूसरे व्यक्ति के लिए टिकट बुक करने की सुविधा का अर्थ यह नहीं है कि टिकट को मनमाने ढंग से किसी भी व्यक्ति को दिया जा सकता है। टिकट जिस यात्री के नाम पर जारी होगा, उसकी तस्वीर और टिकट की डिजिटल जानकारी ही यात्रा के दौरान जांच का आधार बनेगी।

टिकट में यात्री की फोटो होना अनिवार्य

नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण शर्त यात्री की फोटो को लेकर है। शेयर किए जाने वाले डिजिटल सीजन टिकट पर संबंधित यात्री का पासपोर्ट आकार का फोटो दिखाई देना चाहिए। इसके साथ टिकट का QR कोड भी स्पष्ट और पढ़ने योग्य होना जरूरी है। टिकट को मोबाइल में PDF के रूप में रखा जा सकता है या उसकी वैध प्रति प्रिंट करके भी साथ रखी जा सकती है, लेकिन उसमें आवश्यक टिकट विवरण और फोटो स्पष्ट रूप से मौजूद होना चाहिए। रेलवे की नई व्यवस्था में QR कोड महज एक औपचारिकता नहीं है। यह टिकट की डिजिटल जानकारी और यात्री की फोटो से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रमाणीकरण माध्यम है। टिकट जांच के दौरान रेलकर्मी QR कोड स्कैन करके टिकट की जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसमें मौजूद फोटो की तुलना सामने मौजूद यात्री से कर सकते हैं।

QR कोड खराब हुआ तो टिकट पर उठ सकता है सवाल

यात्रियों को इस नियम का खास ध्यान रखना होगा कि उनके मोबाइल में मौजूद टिकट का QR कोड साफ और स्कैन करने योग्य हो। यदि QR कोड फटा हुआ, धुंधला, बदला हुआ, क्षतिग्रस्त या किसी तरह से छेड़छाड़ किया हुआ दिखाई देता है और उसकी डिजिटल प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हो पाती, तो टिकट को वैध यात्रा दस्तावेज नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में यात्री को बिना वैध टिकट यात्रा करने वाला माना जा सकता है और रेलवे के लागू नियमों के तहत कार्रवाई या जुर्माना हो सकता है। इसलिए यात्रियों के लिए बेहतर होगा कि वे यात्रा शुरू करने से पहले RailOne में अपने सीजन टिकट की स्थिति जांच लें और यह सुनिश्चित करें कि टिकट का पूरा विवरण, फोटो और QR कोड साफ दिखाई दे रहा है।

बुकिंग रसीद या UTS की पुरानी कॉपी काम नहीं आएगी

रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि इनवॉइस, बुकिंग रसीद या पुराने UTS पेपर टिकट की कॉपी को शेयर करने योग्य सीजन टिकट के वैध यात्रा दस्तावेज के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यात्रियों को वही वैध टिकट प्रस्तुत करना होगा जिसमें संबंधित यात्री की तस्वीर और QR कोड मौजूद हो। यह नियम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल टिकट की केवल भुगतान रसीद या बुकिंग का प्रमाण यह साबित नहीं करता कि यात्रा करने वाला व्यक्ति वही है जिसके नाम पर टिकट जारी किया गया है। फोटो और QR कोड दोनों को टिकट की पहचान और सत्यापन प्रक्रिया से जोड़ने का उद्देश्य इसी अंतर को दूर करना है।

टिकट जांच कर्मचारी QR कोड स्कैन करेंगे

नई व्यवस्था लागू होने के बाद टिकट जांच करने वाले कर्मचारियों को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। रेलवे के टिकट जांच कर्मचारियों, स्टेशन स्टाफ और जांच दस्तों को ऐसे हैंड हेल्ड टर्मिनल (HHT)उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें शेयर करने योग्य सीजन टिकट का QR कोड स्कैन करने की सुविधा मौजूद हो। जांच के दौरान कर्मचारी पहले टिकट पर दिखाई देने वाली तस्वीर को यात्री के चेहरे से मिलाकर देख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर QR कोड स्कैन कर टिकट में उपलब्ध डिजिटल जानकारी और फोटो की पुष्टि की जा सकती है। इससे टिकट के फर्जी इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

खुद के लिए और दूसरे व्यक्ति के लिए टिकट में अंतर

नई व्यवस्था में टिकट की वैधता शुरू होने के नियम भी अलग हैं। यदि कोई पंजीकृत उपयोगकर्ता अपने लिए सीजन टिकट बुक करता है तो सफल भू-सीमा यानी जियो-फेंसिंग सत्यापन के बाद उसकी वैधता उसी दिन से शुरू हो सकती है। वहीं, यदि सीजन टिकट किसी दूसरे व्यक्ति के लिए बुक किया गया है, तो उसकी वैधता बुकिंग के अगले दिन से शुरू होगी। इसलिए यात्रियों को टिकट बुक करने के बाद उसकी वैधता की तारीख ध्यान से देखनी चाहिए। केवल टिकट बुक हो जाने का अर्थ यह नहीं है कि वह तुरंत यात्रा के लिए वैध हो गया है, खासकर तब जब टिकट किसी दूसरे लाभार्थी के लिए बुक किया गया हो।

उम्र की भी तय की गई सीमा

शेयर करने योग्य सीजन टिकट व्यवस्था में उम्र से जुड़े नियम भी निर्धारित किए गए हैं। अपने लिए सीजन टिकट बुक करने वाले उपयोगकर्ता की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष रखी गई है। वहीं, जिस व्यक्ति के लिए टिकट बुक किया जा रहा है, उसकी न्यूनतम उम्र 5 वर्ष होनी चाहिए। इसका उद्देश्य बुकिंग प्रक्रिया में यात्री की पहचान और पात्रता को स्पष्ट रखना है। परिवार के किसी बच्चे या अन्य सदस्य के लिए टिकट बुक करने वाले व्यक्ति को टिकट में दर्ज यात्री की जानकारी सही भरनी होगी।

क्या टिकट मोबाइल में दिखाया जा सकता है?

हां। शेयर करने योग्य सीजन टिकट को मोबाइल में PDF के रूप में रखा जा सकता है या उसकी प्रिंट कॉपीभी साथ रखी जा सकती है। लेकिन दोनों ही स्थिति में जरूरी टिकट विवरण, यात्री की फोटो और QR कोड स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। हालांकि यात्रियों को केवल किसी संदेश, रसीद या सामान्य फोटो के भरोसे यात्रा करने से बचना चाहिए। रेलवे ने डिजिटल टिकट के दूसरे मामलों में भी स्पष्ट किया है कि केवल स्क्रीनशॉट या WhatsApp पर भेजी गई कॉपी को मूल डिजिटल टिकट के बराबर नहीं माना जाता। RailOne से बुक किए गए सामान्य अनारक्षित टिकट के लिए भी रेलवे ने रजिस्टर्ड मोबाइल पर उपलब्ध मूल डिजिटल टिकट दिखाने की आवश्यकता स्पष्ट की है।

पुराने UTS से RailOne तक बदली व्यवस्था

RailOne ऐप को रेलवे की विभिन्न यात्री सेवाओं को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसके जरिए टिकट बुकिंग सहित कई रेल सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जा रहा है। Google Play पर RailOne के आधिकारिक विवरण में भी Shareable Season Ticket सुविधा को ऐप के नए फीचर के रूप में दर्ज किया गया है। ऐप को Centre for Railway Information Systems यानी CRIS ने विकसित किया है। इससे पहले UTS व्यवस्था के तहत भी मोबाइल से पेपरलेस सीजन टिकट की सुविधा उपलब्ध थी। पुराने UTS नियमों के अनुसार सीजन टिकट की वैधता, नवीनीकरण और यात्रा के दौरान टिकट दिखाने से जुड़े अलग प्रावधान थे। अब RailOne के नए शेयर करने योग्य टिकट फीचर में यात्री की तस्वीर और QR आधारित सत्यापन को ज्यादा प्रमुख बनाया गया है।

मुंबई लोकल यात्रियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

मुंबई की उपनगरीय रेल व्यवस्था में बड़ी संख्या में यात्री मासिक और त्रैमासिक सीजन टिकट का इस्तेमाल करते हैं। नियमित यात्रियों के लिए हर दिन अलग टिकट खरीदने की तुलना में सीजन टिकट सुविधाजनक और कई मामलों में किफायती विकल्प होता है। ऐसे में RailOne के जरिए दूसरे परिवार के सदस्यों के लिए टिकट बुक करने की सुविधा यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। लेकिन इसके साथ टिकट जांच की प्रक्रिया भी अधिक डिजिटल हो रही है। अब यात्रियों को केवल यह सुनिश्चित नहीं करना होगा कि टिकट की अवधि चालू है, बल्कि यह भी देखना होगा कि टिकट पर सही यात्री की तस्वीर है और QR कोड ठीक से काम कर रहा है।इससे टिकट की अदला-बदली और अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। रेलवे के लिए भी यह व्यवस्था टिकट जांच को तेज और अधिक विश्वसनीय बनाने का माध्यम बन सकती है।

यात्रियों के लिए जरूरी सावधानियां

यात्रा से पहले RailOne पर सीजन टिकट की वैधता जांचना सबसे जरूरी है। टिकट में नाम, फोटो और यात्रा मार्ग सही है या नहीं, यह भी देखना चाहिए। मोबाइल में रखी PDF या प्रिंट कॉपी में QR कोड स्पष्ट होना चाहिए। यदि टिकट किसी दूसरे व्यक्ति के लिए बुक किया गया है तो यात्रा करने वाले व्यक्ति की तस्वीर टिकट में मौजूद तस्वीर से मेल खानी चाहिए। इसके अलावा केवल बुकिंग रसीद, इनवॉइस, पुराने UTS टिकट की फोटो या उसकी कॉपी लेकर यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें शेयर करने योग्य सीजन टिकट के वैध यात्रा दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नियमित यात्रियों के लिए नई सुविधा

कुल मिलाकर, RailOne की शेयर करने योग्य सीजन टिकट सुविधा नियमित यात्रियों के लिए एक नई सुविधा लेकर आई है, लेकिन इसके साथ टिकट सत्यापन के नियम भी पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और कड़े किए गए हैं। अब टिकट केवल बुक होना पर्याप्त नहीं होगा; यात्रा के समय वैध टिकट, सही यात्री की फोटो और पढ़ने योग्य QR कोड भी जरूरी होगा। रेलवे का यह कदम डिजिटल टिकटिंग को सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ टिकट के दुरुपयोग और फर्जी यात्रा पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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