दिल्ली-वाराणसी के बीच दौड़ेगी देश की दूसरी स्लीपर वंदे भारत, 12 अक्टूबर को मिल सकती है हरी झंडी

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दिवाली से पहले पटरी पर उतर सकती है देश की दूसरी स्लीपर वंदे भारत, 12 अक्टूबर को PM मोदी दिखा सकते हैं हरी झंडी

भारतीय रेलवे देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस शुरू करने की तैयारी में तेजी से जुटा है। प्रस्तावित ट्रेन नई दिल्ली और वाराणसी के बीच प्रयागराज और कानपुर के रास्ते चलेगी। रेलवे का लक्ष्य इसे दीपावली से पहले यात्रियों के लिए शुरू करने का है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 12 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके संचालन को हरी झंडी दिखा सकते हैं, हालांकि कार्यक्रम की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है। यह ट्रेन इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह दिन के बजाय रात्रिकालीन यात्रा के लिए तैयार की जा रही है। यानी यात्री रात में वाराणसी या दिल्ली से सफर शुरू कर सकेंगे और सुबह अपनी मंजिल पर पहुंच जाएंगे। इससे खास तौर पर वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और दिल्ली के बीच रात में यात्रा करने वाले यात्रियों को नया विकल्प मिलेगा।

पहले से प्रस्तावित समय में किया गया बदलाव

ट्रेन की समय-सारणी को लेकर भी बदलाव सामने आया है। शुरुआती प्रस्ताव में वाराणसी से ट्रेन के रात 9:20 बजे रवाना होने और सुबह करीब 5 बजे नई दिल्ली पहुंचने की योजना थी। नए प्रस्तावित समय के अनुसार वाराणसी से ट्रेन को रात 8:40 बजे रवाना किया जा सकता है। इसके बाद यह करीब रात 10:05 बजे प्रयागराज और 11:50 बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी। इसके बाद रातभर का सफर पूरा करते हुए ट्रेन करीब सुबह 4:50 बजे नई दिल्ली पहुंच सकती है। वापसी में नई दिल्ली से ट्रेन के रात 11:25 बजे रवाना होने का प्रस्ताव है। यह ट्रेन तड़के करीब 3:30 बजे कानपुर, सुबह 5:38 बजे प्रयागराज और लगभग 7:35 बजे वाराणसी पहुंच सकती है। हालांकि इन समयों को अंतिम मानने से पहले रेलवे की आधिकारिक समय-सारणी और अधिसूचना का इंतजार करना जरूरी है। इस बदलाव का सीधा फायदा उन यात्रियों को हो सकता है जो रात में सफर करके सुबह दिल्ली या वाराणसी पहुंचना चाहते हैं। वाराणसी से रात 8:40 बजे रवाना होने के बाद सुबह करीब 4:50 बजे दिल्ली पहुंचने का प्रस्तावित समय लगभग 8 घंटे 10 मिनट का सफर दर्शाता है।

किन शहरों को मिलेगा फायदा?

नई दिल्ली-वाराणसी स्लीपर वंदे भारत का मार्ग केवल दोनों प्रमुख शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रेन को प्रयागराज और कानपुर में भी ठहराव देने की योजना है। ऐसे में चार बड़े शहर सीधे तौर पर इस सेवा से जुड़ेंगे। प्रयागराज के यात्रियों के लिए यह सेवा विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है। वर्तमान में दिल्ली और प्रयागराज के बीच दिन और रात दोनों समय कई रेल सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन स्लीपर वंदे भारत का प्रस्तावित समय यात्रियों को रात में आराम से सफर कर सुबह दिल्ली पहुंचने का विकल्प देगा। इसी तरह दिल्ली से देर रात रवाना होकर सुबह वाराणसी पहुंचने की सुविधा भी यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

16 डिब्बों की होगी ट्रेन

रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित स्लीपर वंदे भारत में कुल 16 वातानुकूलित डिब्बे होंगे। इनमें एक प्रथम श्रेणी वातानुकूलित डिब्बा, चार द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित डिब्बे और 11 तृतीय श्रेणी वातानुकूलित डिब्बेशामिल होने की जानकारी सामने आई है। ट्रेन में लगभग 823 यात्रियों के बैठने-सोने की क्षमता बताई जा रही है। स्लीपर व्यवस्था होने के कारण इस ट्रेन को लंबी दूरी की रात की यात्रा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यात्रियों को सोने के लिए बर्थ, व्यक्तिगत पढ़ने की रोशनी और मोबाइल तथा लैपटॉप चार्ज करने जैसी सुविधाएं मिलने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य तेज यात्रा के साथ यात्रियों को रातभर के सफर में बेहतर सुविधा देना है।

130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक रफ्तार

ट्रेन की अधिकतम रफ्तार को लेकर भी रेलवे की तैयारियां महत्वपूर्ण हैं। शुरुआती परिचालन में 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति रखे जाने की संभावना है। रेलवे की पटरियों और संकेत व्यवस्था में आवश्यक सुधार के बाद इसे 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाने का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि किसी भी ट्रेन की वास्तविक गति केवल ट्रेन की क्षमता पर निर्भर नहीं करती। ट्रैक की स्थिति, संकेत प्रणाली, मार्ग की क्षमता, मोड़, पुल, समपार और अन्य परिचालन परिस्थितियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए 160 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति को तत्काल पूरे मार्ग पर मिलने वाली नियमित परिचालन गति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

ट्रायल की तैयारी तेज

रेलवे ने इस ट्रेन के लिए 16 डिब्बों वाला रैक तैयार कर लिया है और परीक्षण परिचालन की तैयारी की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार परीक्षण इसी महीने शुरू किए जाने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद सुरक्षा और परिचालन संबंधी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। रेलवे के लिए परीक्षण चरण बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि नई सेवा शुरू करने से पहले यह देखा जाएगा कि निर्धारित मार्ग पर ट्रेन की गति, ठहराव, समय-सारणी और अन्य परिचालन व्यवस्थाएं व्यावहारिक हैं या नहीं।

देश की दूसरी स्लीपर वंदे भारत

भारतीय रेलवे ने वंदे भारत के स्लीपर संस्करण को लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्रा के लिए विकसित किया है। सरकारी जानकारी के अनुसार 12 मार्च 2026 तक हावड़ा-कामाख्या मार्ग पर एक वंदे भारत स्लीपर सेवा संचालित हो रही थी। नई दिल्ली-वाराणसी सेवा शुरू होने पर यह देश की दूसरी स्लीपर वंदे भारत सेवा होगी। इससे वंदे भारत नेटवर्क में दिन के साथ-साथ रात की लंबी दूरी की यात्रा का हिस्सा भी बढ़ेगा।

दिवाली से पहले शुरू करने का लक्ष्य

रेलवे इस सेवा को ऐसे समय शुरू करने की तैयारी कर रहा है जब दीपावली और उसके आसपास रेल यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। रिपोर्टों में दिवाली से पहले सेवा शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है। 2026 में दीपावली 8 नवंबर को है, इसलिए अक्टूबर में प्रस्तावित शुरुआत से त्योहारों के दौरान यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। हालांकि यात्रियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 12 अक्टूबर की हरी झंडी और नियमित संचालन की तारीख की अंतिम आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। प्रधानमंत्री के अंतिम कार्यक्रम संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

किराया और टिकट बुकिंग पर क्या स्थिति?

ट्रेन की शुरुआत की खबर के बाद सबसे ज्यादा रुचि किराये और टिकट बुकिंग को लेकर है। लेकिन फिलहाल उपलब्ध जानकारी में अंतिम किराया, ट्रेन संख्या और नियमित टिकट बुकिंग की आधिकारिक सूचना स्पष्ट रूप से जारी नहीं हुई है। इसलिए सोशल मीडिया या अनौपचारिक स्रोतों में बताए जा रहे किराये को अंतिम मानना उचित नहीं होगा। रेलवे की ओर से ट्रेन का संचालन कार्यक्रम, ठहराव, किराया और आरक्षण संबंधी जानकारी आधिकारिक रूप से जारी होने के बाद ही यात्रियों को अंतिम विवरण मिलेगा।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?

नई दिल्ली-वाराणसी स्लीपर वंदे भारत के शुरू होने से इस महत्वपूर्ण रेल गलियारे पर यात्रियों को रात में यात्रा का एक और विकल्प मिलेगा। खास बात यह है कि प्रस्तावित समय ऐसा है जिसमें वाराणसी से रात में निकलकर सुबह जल्दी दिल्ली पहुंचने और दिल्ली से देर रात निकलकर सुबह वाराणसी पहुंचने की सुविधा मिल सकती है। प्रयागराज और कानपुर के यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा। कारोबार, नौकरी, शिक्षा, धार्मिक यात्रा और अन्य कामों से दिल्ली या वाराणसी जाने वाले यात्री रात का समय यात्रा में इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे दिन के समय का उपयोग अपने काम के लिए किया जा सकता है।

अंतिम सूचना का करें इंतजार

कुल मिलाकर, नई दिल्ली-वाराणसी स्लीपर वंदे भारत को लेकर रेलवे की तैयारियां अंतिम चरण की ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। 16 डिब्बों वाली इस ट्रेन को रात में चलाने की योजना है और प्रस्तावित मार्ग में नई दिल्ली, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी प्रमुख स्टेशन होंगे। 12 अक्टूबर को हरी झंडी दिखाए जाने की खबर सामने आई है, लेकिन अंतिम पुष्टि और नियमित संचालन की आधिकारिक समय-सारणी का इंतजार है।

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