आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए Raghav Chadha ने अपने फैसले पर उठ रहे सवालों का विस्तार से जवाब दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर बताया कि यह निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि लंबे समय से चल रही परिस्थितियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उन्हें हजारों संदेश मिले, जिनमें लोगों ने उनके फैसले पर सवाल भी उठाए और समर्थन भी जताया।
AAP अब पहले जैसी नहीं रही’
Aam Aadmi Party को लेकर राघव चड्ढा ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जिस सोच और आदर्शों के साथ उन्होंने पार्टी जॉइन की थी, अब वह पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का अंदरूनी माहौल अब “टॉक्सिक” हो गया है, जहां नेताओं को खुलकर बोलने और काम करने की आजादी नहीं है।
‘चंद भ्रष्ट लोगों का बढ़ा प्रभाव’
राघव ने कहा कि पार्टी अब कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में सिमटकर रह गई है, जिनका प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों के कारण न केवल पार्टी की कार्यशैली प्रभावित हुई, बल्कि ईमानदार नेताओं के लिए काम करना भी मुश्किल हो गया। संसद में अपनी बात रखने तक में बाधाएं आने लगी थीं, जिससे उनका मनोबल टूटने लगा।
तीन विकल्प और एक बड़ा फैसला
अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए राघव चड्ढा ने बताया कि उनके सामने तीन रास्ते थे—राजनीति छोड़ देना, पार्टी में रहकर बदलाव की कोशिश करना या फिर किसी नए प्लेटफॉर्म के साथ सकारात्मक राजनीति करना। उन्होंने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक दूसरे विकल्प पर काम किया, लेकिन हालात नहीं बदले। अंततः उन्होंने तीसरा रास्ता चुना और नई शुरुआत का निर्णय लिया।
‘सात लोग गलत नहीं हो सकते’
राघव ने यह भी कहा कि केवल उन्होंने ही नहीं, बल्कि कई अन्य नेताओं ने भी पार्टी छोड़ने का फैसला लिया है। उनका मानना है कि एक या दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन जब कई लोग एक जैसी शिकायतें करें, तो समस्या कहीं गहरी होती है। उन्होंने इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बताया।
जनता के मुद्दों पर काम जारी रखने का भरोसा
अंत में राघव चड्ढा ने जनता को भरोसा दिलाया कि पार्टी बदलने के बावजूद उनका फोकस नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि वे पहले की तरह लोगों की समस्याओं को उठाते रहेंगे, बल्कि अब उन्हें समाधान तक पहुंचाने की कोशिश भी करेंगे। उनके अनुसार, नई राजनीतिक पारी का मकसद सिर्फ राजनीति करना नहीं, बल्कि प्रभावी तरीके से बदलाव लाना है।