प्रयागराज से सीधे हरिद्वार: गंगा एक्सप्रेसवे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विस्तार को योगी सरकार की हरी झंडी

The CSR Journal Magazine

दो महाकुंभ नगरियों का ऐतिहासिक मिलन: प्रयागराज से हरिद्वार तक बनेगा गंगा एक्सप्रेसवे, योगी कैबिनेट की बड़ी मंजूरी

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने प्रयागराज और हरिद्वार के बीच तेज और नियंत्रित कनेक्टिविटी विकसित करने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तार देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस ₹10,761 करोड़ की महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड परियोजना पर मुहर लगाई गई। इस ऐतिहासिक फैसले से देश की दो सबसे बड़ी कुंभ नगरियां—प्रयागराज और हरिद्वार—एक हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए सीधे जुड़ जाएंगी।

मेरठ से हरिद्वार तक 130 किलोमीटर का नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर

उत्तर प्रदेश को ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ बनाने की दिशा में राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक और बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड की पावन धार्मिक नगरी हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी देते हुए राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि इस विस्तार के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि देश के दो सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों—प्रयागराज और हरिद्वार—के बीच सीधा और निर्बाध संपर्क स्थापित हो जाएगा। कैबिनेट की इस मंजूरी के तुरंत बाद अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

एक्सप्रेसवे का नया स्वरूप: मेरठ से प्रयागराज का सफर अब सीधे हरिद्वार तक

वर्तमान में गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से शुरू होकर प्रयागराज (इलाहाबाद) में समाप्त होता है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 594 किलोमीटर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस मूल खंड का पूर्व में सफल क्रियान्वयन किए जाने के बाद, अब सरकार इसके दूसरे चरण यानी विस्तार खंड पर काम कर रही है। कैबिनेट से स्वीकृत नए प्रस्ताव के अनुसार, एक्सप्रेसवे को मेरठ से आगे बढ़ाते हुए बिजनौर के रास्ते सीधे हरिद्वार (उत्तराखंड) से जोड़ा जाएगा। मेरठ से हरिद्वार के बीच बनने वाले इस नए कॉरिडोर की अनुमानित लंबाई लगभग 130 किलोमीटर होगी। इस विस्तार के जुड़ने के साथ ही गंगा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई बढ़कर 724 किलोमीटर हो जाएगी, जो इसे देश के सबसे शानदार और लंबे एक्सप्रेसवे गलियारों में से एक बना देगा।

परियोजना की भौगोलिक रूपरेखा और रूट मैप

अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेरठ-हरिद्वार विस्तार खंड का निर्माण पूरी तरह से ‘ग्रीनफील्ड’ (नए सिरे से निर्मित सड़क) के रूप में किया जाएगा। लगभग 100 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर और बिजनौर जिलों से होकर गुजरेगा। बिजनौर सीमा को पार करने के बाद यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड राज्य में प्रवेश करेगा, जहां रुड़की के पास से होते हुए हरिद्वार तक इसका लगभग 30 किलोमीटर का हिस्सा निर्मित किया जाएगा। यह नया एक्सप्रेसवे उत्तराखंड में सीधे ‘चार धाम राजमार्ग’ (Char Dham Highway) और ‘चार धाम रेलवे नेटवर्क’ से जुड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप, दक्षिण और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा के लिए एक एकीकृत और तेज परिवहन ढांचा मिल सकेगा।

यूपी सरकार खुद उठाएगी ₹10,761 करोड़ का पूरा खर्च

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका वित्तीय मॉडल है। राज्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार पर कुल ₹10,761 करोड़ का अनुमानित व्यय-भार आएगा। इस भारी-भरकम बजट में केंद्र सरकार की किसी भी प्रकार की वित्तीय हिस्सेदारी अपेक्षित या प्रस्तावित नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार इस पूरी धनराशि का वहन अपने आंतरिक संसाधनों और बजटीय आवंटन के माध्यम से करेगी। चौंकाने वाली और महत्वपूर्ण बात यह है कि एक्सप्रेसवे का जो 30 किलोमीटर का हिस्सा उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक सीमा के भीतर बनेगा, उसके निर्माण का पूरा खर्च भी उत्तर प्रदेश सरकार ही उठाएगी। इसके बदले में उत्तर प्रदेश सरकार को उत्तराखंड वाले हिस्से में भी टोल टैक्स वसूलने और संचालित करने का पूरा विधिक अधिकार (Toll Collection Rights) प्राप्त होगा।

तीर्थाटन और आध्यात्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा

प्रयागराज और हरिद्वार दोनों ही नदियाँ गंगा के तट पर बसे भारत के सबसे पवित्र और बड़े धार्मिक स्थल हैं, जहाँ हर 12 वर्ष में महाकुंभ और हर 6 वर्ष में अर्धकुंभ का आयोजन होता है। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच सीधे और तेज यातायात के लिए कोई एक्सप्रेसवे विकल्प मौजूद नहीं है। श्रद्धालुओं को मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग का उपयोग करना पड़ता है, जो अत्यधिक ट्रैफिक के कारण काफी समय लेता है। इस एक्सप्रेसवे के बनने से प्रयागराज से हरिद्वार की दूरी महज 7 से 8 घंटे में पूरी की जा सकेगी, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर

इस एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के दोनों तरफ योगी सरकार की योजना विशेष औद्योगिक आर्थिक क्षेत्र (SEZ), लॉजिस्टिक्स पार्क और आधुनिक आवासीय टाउनशिप विकसित करने की है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पाद, जैसे बिजनौर और मुजफ्फरनगर की चीनी और गुड़ उद्योग, तथा मेरठ के खेल उद्योग को सीधे उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

जेवर एयरपोर्ट और वाराणसी से सीधी कनेक्टिविटी

यह एक्सप्रेसवे केवल हरिद्वार को मेरठ से नहीं जोड़ रहा, बल्कि यह अप्रत्यक्ष रूप से उत्तराखंड को दिल्ली-NCR, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी से भी जोड़ देगा। एक्सप्रेसवे नेटवर्क के आपस में जुड़ने से देश-विदेश से आने वाले पर्यटक जेवर हवाई अड्डे पर उतरकर कुछ ही घंटों में सीधे हरिद्वार या प्रयागराज की यात्रा कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश-देश का एक्सप्रेसवे हब

इस नई मंजूरी के साथ उत्तर प्रदेश ने भारत के एक्सप्रेसवे बुनियादी ढांचे में अपनी बादशाहत को और मजबूत कर लिया है। वर्तमान में देश के कुल चालू और कंक्रीट एक्सप्रेसवे नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश के पास है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (341 किमी), बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (296 किमी), और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (302 किमी) के बाद गंगा एक्सप्रेसवे का यह विराट रूप राज्य की परिवहन व्यवस्था का कायाकल्प कर देगा। कैबिनेट के इस दूरगामी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना केवल कंक्रीट और डामर की सड़क नहीं है, बल्कि यह दो राज्यों की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आस्था को आपस में जोड़ने वाली एक आधुनिक जीवन रेखा साबित होगी। आगामी चार महीनों में विस्तृत डीपीआर (DPR) तैयार होने के बाद इसके टेंडर और निर्माण की समय-सीमा तय की जाएगी।

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