FOMO, Detox और Instagrammable: Gen Z के नए स्लैंग्स ने बदली टूरिज्म इंडस्ट्री की परिभाषा

The CSR Journal Magazine

Gen-Z ट्रैवल की दुनिया में लाए नए ‘स्लैंग्स’, ट्रैवल का नया नजरिया

पर्यटन (टूरिज्म) की दुनिया में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आज से एक दशक पहले तक यात्रा या वेकेशन का मतलब होता था महीनों पहले से ट्रेनों की बुकिंग, सूटकेस में कपड़ों की पैकिंग, और किसी मशहूर हिल स्टेशन पर जाकर गिने-चुने ‘व्यू पॉइंट्स’ पर तस्वीरें खिंचवाना। लेकिन आज की युवा पीढ़ी, जिसे हम Gen-Z कहते हैं, उसने इस पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इस नई पीढ़ी के लिए ट्रैवल अब सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाना या चंद मशहूर स्मारकों को देखना भर नहीं है। इनके लिए सफर एक State of Mind, एक नया नजरिया और खुद को तलाशने का जरिया है। खास बात यह है कि जेन-जी ने अपने इस नए ट्रैवल कल्चर को बयां करने के लिए बिल्कुल अनोखे और ट्रेंडी ‘स्लैंग्स’ (शब्दावली) को भी जन्म दिया है, जो आज के टूरिज्म मार्केट को दिशा दे रहे हैं।

जब सफर बन गया ‘Mood और Experience’

आज के युवाओं के लिए ट्रैवलिंग उनके मूड और पर्सनल एक्सपीरियंस से जुड़ी हुई है। वे भेड़चाल का हिस्सा बनने के बजाय ‘Offbeat’ यानी कम जानी-पहचानी जगहों पर जाना पसंद करते हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह यह है कि GenZ अनुभवों को संपत्ति से ज्यादा तवज्जो देती है। उनके लिए किसी महंगे होटल में रुकने से ज्यादा जरूरी यह अनुभव है कि उन्होंने किसी दूरदराज के गांव में स्थानीय लोगों के साथ रहकर क्या सीखा या किसी अनछुए झरने को खोजने में उन्हें कितना रोमांच मिला। ट्रैवल इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि यह पीढ़ी ‘Slow Travel ‘पर यकीन रखती है। वे एक ही दिन में दस जगहें घूमने की आपाधापी में नहीं रहते, बल्कि किसी एक कैफे में बैठकर घंटों वहां की संस्कृति को महसूस करना चाहते हैं।

डर से जन्मा नया ट्रेंड: FOMO और सोशल मीडिया का प्रभाव

Gen Z की ट्रैवल डिक्शनरी का सबसे बड़ा और लोकप्रिय शब्द है—”FOMO” (फियर ऑफ मिसिंग आउट यानी कुछ छूट जाने का डर)। सोशल मीडिया के इस दौर में जब कोई युवा अपने दोस्तों या इंफ्लुएंसर्स को किसी खूबसूरत डेस्टिनेशन पर रील्स बनाते या तस्वीरें पोस्ट करते देखता है, तो उसके भीतर भी वहां जाने की तीव्र इच्छा पैदा होती है। इसी ‘FOMO’ के चलते आज कई ऐसे नए टूरिस्ट स्पॉट्स उभरकर सामने आए हैं, जिनका नाम पहले किसी ट्रैवल गाइड में नहीं होता था। युवा ऐसी जगहों की तलाश में रहते हैं जो उनके सोशल मीडिया फीड को दूसरों से अलग और आकर्षक बना सकें। अब पर्यटन सिर्फ व्यक्तिगत आनंद के लिए नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का भी एक माध्यम बन चुका है।

रील्स का दौर और ‘Instagrammable’ स्पॉट्स की दीवानगी

यदि कोई जगह बेहद खूबसूरत है लेकिन वहां मोबाइल नेटवर्क या तस्वीरें खींचने के लिए अच्छा बैकग्राउंड नहीं है, तो आज का युवा वहां जाने से कतरा सकता है। जेन-जी ने ट्रैवल की दुनिया को एक नया शब्द दिया है—”Instagrammable” (इंस्टाग्रामेबल)। इसका सीधा सा मतलब है—ऐसी जगह या नजारा जो इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने के लिए बिल्कुल परफेक्ट हो। आजकल होमस्टे, होटल्स और यहां तक कि कैफे भी खुद को ‘इंस्टाग्राम-फ्रेंडली’ बनाने के लिए अपने इंटीरियर को खास लुक दे रहे हैं। नियॉन लाइट्स, पेस्टल कलर्स, बोहो-शिल्प और पहाड़ों के बैकग्राउंड वाले झूले, ये सब इसी नई पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए तैयार किए जा रहे हैं। युवाओं के लिए सफर की सफलता इस बात से भी तय होती है कि उनकी तस्वीरों पर कितने लाइक्स और कमेंट्स आए।

स्क्रीन से दूरी: ‘Digital Detox’ की बढ़ती मांग

एक तरफ जहां सोशल मीडिया की दीवानगी है, वहीं दूसरी तरफ इसी पीढ़ी ने मानसिक शांति की अहमियत को भी बखूबी समझा है। इसी समझ से निकला है एक और नया ट्रैवल ट्रेंड जिसे “Digital Detox” (डिजिटल डिटॉक्स) कहा जा रहा है। दिनभर लैपटॉप, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन से घिरे रहने वाले युवा अब जानबूझकर ऐसे सफर पर निकल रहे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क न के बराबर हो। वे कुछ दिनों के लिए इंटरनेट की आभासी दुनिया से पूरी तरह कट जाना चाहते हैं। हिमाचल प्रदेश के सुदूर गांव, केरल के शांत बैकवॉटर्स या उत्तराखंड के जंगलों में बने मड-हाउसेस (मिट्टी के घर) आजकल डिजिटल डिटॉक्स के लिए युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं। यहां वे प्रकृति के करीब रहकर अपनी मानसिक थकान को दूर करते हैं और खुद को रीचार्ज करते हैं।

सोलो ट्रैवल और ‘Freedom’ का नया मायना

Gen Z ने अकेले यात्रा करने यानी ‘Solo Travelling’ को भी एक नया स्टेटस सिंबल बना दिया है। पहले अकेले यात्रा करने को मजबूरी या असुरक्षा से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आज की युवा लड़कियां और लड़के आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता का जश्न मनाने के लिए अकेले सफर पर निकल रहे हैं। इसके लिए ‘Backpacking’ और ‘Youth Hostel’ का चलन तेजी से बढ़ा है, जहां कम पैसों में रहने की जगह मिलती है और दुनिया भर से आए नए लोगों से दोस्ती करने का मौका मिलता है।

Set-Jetting (सेट-जेटिंग) – ‘रील्स और स्क्रीन’ से सीधे जमीन पर

यह शब्द ‘जेट-सेटिंग’ (अमीरों की तरह घूमना) का एक मजेदार रूप है। इसका अर्थ है—अपने पसंदीदा टीवी शो, वेब सीरीज या फिल्मों की शूटिंग लोकेशन्स पर जाकर छुट्टियां मनाना। जेन-जी ट्रैवल गाइड्स के बजाय नेटफ्लिक्स, एमेजॉन प्राइम या एचबीओ के शो देखकर अपनी अगली ट्रिप प्लान करती है। आंकड़े बताते हैं कि 60% से अधिक युवा स्क्रीन पर देखी गई जगहों से प्रेरित होकर बुकिंग करते हैं। वेब सीरीज Emily in Paris के नए सीजन के बाद रोम की सर्च में 35% का उछाल आया, जबकि The White Lotus शो की वजह से हवाई और सिसिली के होटलों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भारत में भी पंचायत या मिर्जापुर जैसी सीरीज के बाद लोग उन वास्तविक गांवों को देखने निकल पड़ते हैं।

Soloist (सोलोइस्ट) – अकेले सफर का नया ‘स्वैग’

पहले अकेले यात्रा करने वालों को ‘सोलो ट्रैवलर’ कहा जाता था, लेकिन जेन-जी ने इसे अपग्रेड करके “Soloist” नाम दिया है। यह शब्द संगीत के ‘सोलोइस्ट’ (अकेले परफॉर्म करने वाले मुख्य कलाकार) से प्रेरित है। इस पीढ़ी के लिए अकेले घूमना मजबूरी या अकेलेपन की निशानी नहीं है, बल्कि यह खुद को जानने और अपनी मर्जी से जीने का सबसे बड़ा जरिया है। ‘सोलोइस्ट’ बिना किसी के दबाव के अपना खुद का शेड्यूल तय करते हैं, स्थानीय लोगों से दोस्ती करते हैं और अपनी शर्तों पर दुनिया तलाशते हैं। सोशल मीडिया पर 83% से ज्यादा युवा लड़कियां सोलो फीमेल ट्रैवल कंटेंट से प्रेरित होकर इस राह पर चल पड़ी हैं।

Dry Tripping (ड्राय ट्रिपिंग) – बिना अल्कोहल का ‘Wellness सफर’

‘ड्राय ट्रिपिंग’ का मतलब है ऐसी यात्राएं जहाँ पार्टी, शराब और नाइटलाइफ़ से पूरी तरह दूरी बनाई जाती है। पुरानी पीढ़ियां जहाँ छुट्टियों पर जाकर देर रात तक क्लबिंग और ड्रिंक करना पसंद करती थीं, वहीं Gen Z स्वास्थ्य और मानसिक शांति (Wellness) को प्राथमिकता दे रही है। ‘ड्राय ट्रिपिंग’ के दौरान युवा सुबह जल्दी उठते हैं, ट्रैकिंग पर जाते हैं, योग या मेडिटेशन करते हैं, और कैफीन या ताजे स्थानीय खान-पान का लुत्फ उठाते हैं। वे सुबह के सूर्योदय (Sunrises) को रात की पार्टियों से ज्यादा तवज्जो देते हैं।

Room Rotting (रूम रॉटिंग) – महंगे होटल में सिर्फ ‘आलस’ करना

किसी खूबसूरत या आलीशान वेकेशन डेस्टिनेशन पर जाकर पूरा दिन होटल के कमरे या रिसॉर्ट के बिस्तर पर पड़े रहना, वेब सीरीज देखना या बस कुछ न करना—इसे ‘रूम रॉटिंग’ कहा जाता है। पहले इसे समय की बर्बादी माना जाता था, लेकिन आज की अति-व्यस्त और थकी हुई पीढ़ी के लिए यह ‘गिल्ट-फ्री रेस्ट’ (बिना किसी अपराधबोध के आराम) है। युवा भारी-भरकम पैसे खर्च करके पहाड़ों या समुद्र किनारे एक अच्छा विला या होमस्टे बुक करते हैं और वहां से बाहर कदम भी नहीं रखते। उनके लिए होटल की बालकनी से सूर्यास्त देखना ही पूरा वेकेशन है।

Why-cation (वाई-केशन) – “कहाँ जाना है” से ज्यादा “क्यों जाना है”

यह ‘वेकेशन’ शब्द का नया रूप है। जब युवा यात्रा की प्लानिंग करते हैं, तो वे खुद से पूछते हैं—”मैं इस सफर पर क्यों (Why) जा रहा हूँ?” वे केवल डेस्टिनेशन नहीं चुनते, बल्कि अपना मूड और इमोशन चुनते हैं। अगर कोई युवा बहुत तनाव में है, तो वह किसी ऐसी जगह जाएगा जो उसे ‘शांत’ महसूस कराए (चाहे वह कोई गुमनाम गांव हो)। इसे ‘मिरर ट्रिप्स’ (Mirror Trips) भी कहा जाता है, जहाँ आपका सफर आपके व्यक्तित्व का आईना होता है।

ट्रैवल इंडस्ट्री को बदलना होगा अपना रुख

साफ है कि जेन-जी सिर्फ घूम नहीं रही है, बल्कि वह पर्यटन के पूरे अर्थ को नए सिरे से परिभाषित कर रही है। अब ट्रैवल एजेंसियां पुराने ढर्रे के पैकेजेस (जैसे- 3 रात और 4 दिन में 5 शहर) बेचकर इन युवाओं को लुभा नहीं सकतीं। यदि इस नई पीढ़ी को अपनी ओर खींचना है, तो उन्हें कस्टमाइज्ड एक्सपीरियंस, रेंटल बाइक्स, सस्टेनेबल ऑप्शन्स और अनछुए रास्तों की पेशकश करनी होगी। जेन-जी का यह नया तेवर बताता है कि आने वाले समय में सफर और मजेदार, पर्यावरण के अनुकूल और मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त करने वाला बनने जा रहा है।

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