Diwali के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों बढ़ सकते हैं? जानें पूरी जानकारी

The CSR Journal Magazine
दिवाली के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है। एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने कहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सरकार और सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने बिज़नेस टुडे टीवी को बताया कि दिवाली के बाद और क्रिसमस से पहले घरेलू ईंधन की कीमतों में बदलाव हो सकता है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भारत में भी देखने को मिल सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि हो सकती है।

क्या है कच्चे तेल की वर्तमान स्थिति?

तनेजा ने बताया कि वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतें $140 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। 23 अक्टूबर की एक्सिस बैंक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत $110 प्रति बैरल से ऊपर जा चुकी है। ऐसे में, भारतीय रिफाइनर जो असल कीमत चुकाते हैं, वह ग्लोबल मार्केट में बताई गई कीमत से अधिक हो सकती है। माल ढुलाई, मरीन इंश्योरेंस और टैंकर-मैनिंग की लागत बढ़ने से यह स्थिति और गंभीर हो रही है।

आयात की कीमतों में तेजी

भारत के क्रूड ऑयल इंपोर्ट बास्केट की औसत कीमत अक्टूबर में लगभग 4% बढ़कर $120.46 प्रति बैरल हो गई है। यह मार्च 2012 के बाद का सबसे अधिक महीने का औसत है। सितंबर में यह कीमत $116.77 प्रति बैरल थी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और मरीन इंश्योरेंस प्रीमियम में वृद्धि हुई है, जिससे आयात की लागत में इजाफा हुआ है। 26 अक्टूबर को भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत $123.72 प्रति बैरल तक पहुंच गई।

महंगाई का बोझ कौन उठा रहा है?

केंद्र और राज्य सरकारें, पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियां और RBI मिलकर इस महंगाई के बोझ को झेल रहे हैं। एक्सिस बैंक रिसर्च ने अनुमान लगाया है कि अगर कच्चे तेल की औसत कीमतें $100 प्रति बैरल रहती हैं, तो हर $10 की बढ़ोतरी से GDP पर 20 बेसिस पॉइंट्स का बोझ बढ़ेगा। अप्रैल-सितंबर के दौरान भारत का कच्चे तेल का इंपोर्ट बिल साल-दर-साल 46.3% बढ़कर $90.6 बिलियन हो गया है।

क्या कर सकती है सरकार?

तनेजा ने चेतावनी दी कि सरकार और तेल कंपनियाँ कंज्यूमर्स की फाइनेंशियल हेल्थ को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें हमेशा के लिए बचा नहीं सकतीं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत को क्रूड सप्लाई में डायवर्सिफाई करने और लंबे समय की सप्लाई पक्की करने के लिए विदेशी तेल और गैस एसेट्स में इन्वेस्ट करने की जरूरत है।
एक्सिस बैंक रिसर्च का अनुमान है कि ज्यादा ड्यूटी और इकोनॉमिक स्टेबिलाइज़ेशन फंड जैसे फ़ाइनेंशियल उपायों से GDP के 0.6% के बराबर जगह बन सकती है। इससे FY27 में केंद्र की फ़ाइनेंशियल गिरावट को GDP के 20-30 बेसिस पॉइंट तक सीमित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, लंबे समय तक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें लागत का अधिक हिस्सा कंज्यूमर्स पर डाल सकती हैं।

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