तेल निर्यातक देशों का एक समूह, जिसमें सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं, ने हाल ही में बैठक की। इस बैठक में तय किया गया कि नवंबर में तेल के उत्पादन को वर्तमान स्तर पर ही बनाए रखा जाएगा। यह फैसला एक ऐसे वक्त में आया है जब ईरान के साथ संघर्ष के चलते ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गया है। 1 नवंबर को एक बार फिर इन देशों की बैठक होगी, जिसमें वे बाजार की स्थिति पर विचार करेंगे।
ईरान के संघर्ष का प्रभाव
ईरान और अन्य देशों के बीच जारी युद्ध ने तेल की सप्लाई में रुकावट डाल दी है, जिससे कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। ईरान से जुड़ी यह लड़ाई फरवरी के अंत में शुरू हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने हमले किए थे। इस कारण दुनिया भर में तेल की मांग और आपूर्ति में असंतुलन पैदा हो गया है। विशेषज्ञ का कहना है कि ब्रेंट क्रूड के दाम का 100 डॉलर के पार जाना वैश्विक तेल बाजार के लिए एक चरम स्थिति है।
जी7 का संकल्प
इस बीच, जी7 देशों ने भी इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने का निर्णय लिया है। उन्होंने शुक्रवार को घोषणा की कि वे आने वाले हफ्तों में 100 मिलियन बैरल तेल और ईंधन उत्पाद बाजार में लाएंगे, जिसकी शुरुआत डीजल से होगी। जी7 देशों का दावा है कि वे अगले 20 दिनों में डीजल की बड़ी मात्रा बाजार में प्रवाहित करेंगे।
अमेरिका में डीजल का दाम बढ़ रहा है
अमेरिका में डीजल की कीमतें हाल ही में रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गई हैं, जिससे देश के किसानों, ट्रक चालकों और आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता बढ़ गई है। यह लोग इस ईंधन पर निर्भर हैं और महंगाई उनके लिए बड़ी समस्या बन गई है। पूरी दुनिया की नजर इस समय OPEC+ देशों और जी7 के निर्णयों पर है।
क्या होगा 1 नवंबर को?
अब सभी की निगाहें 1 नवंबर की बैठक पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि ओपेक प्लस देशों द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का क्या असर होगा। उत्पादन स्थिर रखने का यह निर्णय कई देशों के लिए चुनौती बनता जा रहा है, खासकर उन देशों के लिए जहाँ ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है।
जैसे-जैसे हालात बदलते हैं, तेल के दामों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। एक तरफ OPEC+ देशों ने उत्पादन को स्थिर रखा है, वहीं, जी7 देश बाजार में अतिरिक्त तेल लाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में, यह देखना होगा कि वैश्विक बाजार इन बदलावों पर कैसे प्रतिक्रिया देता है।
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