Eli Lilly की Mounjaro बनी भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा, मोटापा और मधुमेह के इलाज ने बदला दवा बाजार
4 नवंबर 2026 को प्रकाशित बाजार संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, Mounjaro भारत में बिक्री मूल्य के आधार पर सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा बन चुकी है। इससे पहले भारतीय दवा बाजार में लंबे समय तक Augmentin जैसे बड़े ब्रांडों का दबदबा रहा था। Mounjaro की सफलता मोटापा प्रबंधन, मधुमेह के उपचार और नई पीढ़ी की दवाओं के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
बिक्री में तेज उछाल, एक साल में 1,736 करोड़ रुपये का कारोबार
Mounjaro की व्यावसायिक सफलता के आंकड़े इसकी बढ़ती लोकप्रियता को स्पष्ट करते हैं। बाजार अनुसंधान कंपनी Pharmarack के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मार्च 2025 में पेश की गई इस दवा की बिक्री वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 923 करोड़ रुपये रही। सितंबर 2026 तक समाप्त हुए पिछले 12 महीनों में इसका बिक्री मूल्य बढ़कर करीब 1,736 करोड़ रुपये पहुंच गया। ये आंकड़े बताते हैं कि अपेक्षाकृत कम समय में Mounjaro ने भारतीय दवा बाजार में मजबूत स्थान बना लिया है। हालांकि, बिक्री मूल्य के आधार पर किसी दवा का शीर्ष स्थान हासिल करना और सबसे अधिक इकाइयों में बिकना दो अलग-अलग बातें हैं। महंगी दवाओं का कारोबार कम इकाइयों की बिक्री पर भी तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए बिक्री मूल्य को मरीजों की कुल संख्या या उपचार पाने वाले लोगों की संख्या के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
Mounjaro क्या है और यह कैसे काम करती है?
Mounjaro में टिर्जेपेटाइड (Tirzepatide) नामक सक्रिय औषधीय तत्व होता है। यह ऐसी दवा है जो शरीर में दो हार्मोन संकेत प्रणालियों—GIP और GLP-1—पर काम करती है। ये प्रणालियां रक्त में शर्करा के नियंत्रण, भूख और भोजन के बाद शरीर की प्रतिक्रिया को प्रभावित करती हैं। यह दवा इंसुलिन के स्राव को रक्त में शर्करा के स्तर के अनुरूप बढ़ाने, भोजन के बाद शर्करा बढ़ने को नियंत्रित करने और पेट खाली होने की गति धीमी करने में मदद कर सकती है। इसके कारण भूख कम लग सकती है और व्यक्ति को पेट भरा होने का एहसास अधिक समय तक रह सकता है। यही वजह है कि इसका उपयोग मधुमेह के उपचार के साथ-साथ वजन प्रबंधन में भी किया जाता है। यह आमतौर पर त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में दी जाती है। हालांकि, इसके उपयोग का उद्देश्य केवल वजन घटाना नहीं है। मरीज की स्वास्थ्य स्थिति, वजन, रक्त शर्करा और दूसरी बीमारियों को ध्यान में रखकर चिकित्सक इसका चुनाव करते हैं।
दुनिया में भी तेजी से बढ़ी मांग
Mounjaro की सफलता केवल भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजार में भी टिर्जेपेटाइड आधारित दवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। मई 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, Mounjaro की बिक्री जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में 8.7 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी। इसी अवधि में Merck की कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवा Keytruda की बिक्री 7.9 अरब डॉलर रही। इस आधार पर Mounjaro ने तिमाही बिक्री मूल्य के मामले में उसे पीछे छोड़ दिया। यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। Mounjaro मधुमेह और वजन प्रबंधन से जुड़ी दवा है, जबकि Keytruda का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार में होता है। दोनों दवाओं की तुलना उनके कारोबार के आधार पर की जा रही है, न कि उनके चिकित्सकीय महत्व या मरीजों को मिलने वाले लाभ के आधार पर। इसके अलावा, Eli Lilly की एक अन्य दवा Zepbound भी टिर्जेपेटाइड पर आधारित है और अमेरिका में मोटापे के उपचार के लिए इस्तेमाल होती है। Mounjaro और Zepbound के संयुक्त कारोबार को एक ही दवा की बिक्री मानना सही नहीं होगा। दोनों अलग-अलग ब्रांड हैं, भले ही उनमें सक्रिय औषधीय तत्व समान हो।
भारत में मोटापा और मधुमेह की बड़ी चुनौती
भारत में ऐसी दवाओं की मांग बढ़ने के पीछे मोटापा और मधुमेह जैसी दीर्घकालिक बीमारियों का बड़ा बोझ भी है। भारतीय वयस्कों में मोटापे और रक्त शर्करा संबंधी समस्याओं को लेकर चिंता बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी, खानपान की आदतें और समय पर बीमारी का पता न चलना इस चुनौती को और गंभीर बना सकते हैं। हालांकि, मोटापे से ग्रस्त प्रत्येक व्यक्ति के लिए Mounjaro उपयुक्त नहीं है। इसी तरह, मधुमेह के हर मरीज को भी इस दवा की जरूरत नहीं होती। चिकित्सक को मरीज की चिकित्सा संबंधी जानकारी और उपचार के संभावित लाभ तथा जोखिम का आकलन करना पड़ता है। Mounjaro की बढ़ती बिक्री यह भी बताती है कि कुछ मरीज अब नई और अपेक्षाकृत महंगी चिकित्सा पर खर्च करने के लिए तैयार हैं। पहले भारतीय दवा बाजार में सस्ती और अधिक मात्रा में बिकने वाली दवाओं का विशेष महत्व था। अब कुछ नई दवाएं कम इकाइयों की बिक्री के बावजूद ऊंचे मूल्य के कारण बाजार में शीर्ष स्थान हासिल कर रही हैं।
सस्ती दवाओं से बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
Mounjaro के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक समान उपचार क्षेत्र में उपलब्ध दूसरी दवाओं से प्रतिस्पर्धा है। Novo Nordisk की सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) आधारित दवाएं Wegovy और Ozempic भी मधुमेह तथा वजन प्रबंधन के उपचार में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। भारत में मार्च 2026 में सेमाग्लूटाइड के पेटेंट की अवधि समाप्त होने के बाद कई भारतीय दवा कंपनियों ने इसके सस्ते संस्करण पेश किए। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी और कम कीमत पर उपचार पाने के विकल्प भी बढ़े। Pharmarack के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 तक समाप्त हुए 12 महीनों में भारत का GLP-1 दवा बाजार 2,333 करोड़ रुपये का हो गया था। इस अवधि में Mounjaro की बिक्री 1,256 करोड़ रुपये रही, जो पिछले समान अवधि की तुलना में 502 प्रतिशत की वृद्धि थी। अगस्त महीने में ही इसकी बिक्री लगभग 112 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी। बाद के आंकड़े बाजार में बदलाव की ओर भी संकेत करते हैं। सितंबर 2026 में Mounjaro की बिक्री लगभग 133.7 करोड़ रुपये रही। इससे स्पष्ट होता है कि सस्ती वैकल्पिक दवाओं के आने के बावजूद इसकी मांग बनी हुई है। हालांकि, बिक्री मूल्य में वृद्धि का अर्थ यह नहीं कि हर महीने मरीजों की संख्या या बिकने वाली इकाइयां भी उसी अनुपात में बढ़ रही हैं।
कीमत और सुरक्षा पर भी ध्यान जरूरी
Mounjaro की सफलता के साथ इसकी कीमत और सुरक्षित इस्तेमाल का सवाल भी महत्वपूर्ण है। यह सामान्य रूप से इस्तेमाल की जाने वाली सस्ती दवा नहीं है। उपचार का खर्च खुराक, उपलब्ध पैक और चिकित्सकीय योजना के अनुसार बदल सकता है। लंबे समय तक उपचार की जरूरत पड़ने पर मरीज के कुल खर्च में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसके संभावित दुष्प्रभावों में मितली, उल्टी, दस्त, कब्ज और पेट में असहजता शामिल हैं। कुछ मरीजों में अधिक गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। जिन लोगों को अग्न्याशय की बीमारी, पित्ताशय संबंधी परेशानी या दूसरी जटिल स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें चिकित्सक से विशेष सलाह लेनी चाहिए। इस दवा का इस्तेमाल केवल चिकित्सकीय परामर्श और निगरानी में किया जाना चाहिए। तेजी से वजन घटाने के उद्देश्य से इसे स्वयं शुरू करना, खुराक बढ़ाना या किसी दूसरे व्यक्ति की दवा इस्तेमाल करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। दवा के साथ संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय निगरानी भी महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय दवा बाजार के लिए क्या है इसका अर्थ?
Mounjaro का शीर्ष स्थान हासिल करना भारतीय दवा उद्योग में बदलती मांग का संकेत है। यह दिखाता है कि मोटापा और मधुमेह जैसे दीर्घकालिक रोगों के लिए नई चिकित्सा पद्धतियां तेजी से व्यावसायिक महत्व हासिल कर रही हैं। साथ ही, सस्ती वैकल्पिक दवाओं की उपलब्धता से कंपनियों को कीमत, गुणवत्ता और मरीजों तक पहुंच के मामले में प्रतिस्पर्धा करनी होगी। आने वाले समय में इस बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि दवाओं की कीमत कितनी सुलभ होती है, चिकित्सकीय निगरानी कितनी मजबूत रहती है और मरीज लंबे समय तक उपचार जारी रख पाते हैं या नहीं। Mounjaro की सफलता को केवल एक दवा की बिक्री का रिकॉर्ड मानना पर्याप्त नहीं होगा। यह भारतीय स्वास्थ्य बाजार में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां नई चिकित्सा तकनीक, मरीजों की बढ़ती जागरूकता और उपचार के खर्च के बीच संतुलन बनाना पहले से अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
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