क्या भारतीय मौसम में मिल सकती है कोरियन जैसी ग्लास स्किन? डॉक्टर ने बताई सच्चाई

The CSR Journal Magazine

कोरियन ग्लास स्किन का जादू

आजकल सोशल मीडिया पर कोरियन ग्लास स्किन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। चमकती हुई त्वचा और एंटी-एजिंग प्रोडक्ट्स की भरमार है। लेकिन क्या हर किसी को इन महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत है? क्या घर के अंदर भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है? डॉ. जुश्या सरीन ने स्किन केयर और लाइफस्टाइल से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर बात की।

सनस्क्रीन: एंटी-एजिंग का सबसे बड़ा हथियार

डॉ. जुश्या ने बताया कि “सनस्क्रीन ही दुनिया की सबसे बेहतरीन एंटी-एजिंग क्रीम है!” उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने को तो रोका नहीं जा सकता, लेकिन ‘हेल्दी एजिंग’ जरूर किया जा सकता है। 85% स्किन एजिंग धूप यानी UV रेडिएशन के कारण होती है। इसलिए, सनस्क्रीन लगाना सबसे बड़ी एंटी-एजिंग थेरेपी है। इसे 15 साल की उम्र से लेकर किसी भी पड़ाव पर शुरू किया जा सकता है।

घर के अंदर सनस्क्रीन का महत्व

घर के अंदर सनस्क्रीन लगाने के बारे में डॉ. जुश्या ने बताया कि यदि आपको पिगमेंटेशन की समस्या है, तो घर में या किचन की हीट और विजिबल लाइट से बचने के लिए भी सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। यह आपकी त्वचा को सुरक्षित रखने में मदद करता है।

क्या भारत में ‘कोरियन ग्लास स्किन’ पाना संभव है?

ग्लास स्किन के ट्रेंड पर बात करते हुए डॉ. जुश्या ने समझाया कि ‘ग्लास’ वह होता है जो लाइट को रिफ्लेक्ट करता है। कोरिया में ठंड बहुत ज्यादा होती है, इसलिए वहां नमी बनाए रखने के लिए 10-लेयर स्किन केयर रूटीन की जरूरत पड़ती है। लेकिन भारत एक ह्यूमिड कंट्री है, इसलिए हमें उतनी लेयर्स की जरूरत नहीं है।

स्किन टेक्सचर और चमक

रंग चाहे कोई भी हो, अगर आपकी स्किन का टेक्सचर स्मूथ और ईवन है, तो लाइट रिफ्लेक्ट होगी और आपकी स्किन भी चमकदार दिखेगी। इसे आप इंडियन या कोरियन कोई भी नाम दे सकते हैं।

क्रॉनिक स्ट्रेस का असर

डॉ. जुश्या ने बताया कि मानसिक और शारीरिक तनाव आपकी त्वचा पर असर डालता है। तनाव के कारण शरीर में कॉर्टिसोल हॉर्मोन रिलीज होता है, जिसके रिसेप्टर्स स्किन में होते हैं। यही क्रोनिक स्ट्रेस स्किन में मेलेनिन का उत्पादन बढ़ाकर डलनेस लाता है।

बोटॉक्स और फिलर्स का सच

बोटॉक्स को लेकर लोगों में अक्सर डर रहता है। डॉ. जुश्या ने स्पष्ट किया कि बोटॉक्स कोई डरावनी चीज नहीं है, बल्कि यह एक मसल रिलैक्सेंट है। यह 4 से 6 महीने तक असर दिखाता है। वहीं, डर्मा फिलर्स का इस्तेमाल चेहरे की खोई हुई वॉल्यूम को भरने के लिए किया जाता है। हमेशा किसी एक्सपर्ट डर्मेटोलॉजिस्ट की देखरेख में ही कराना चाहिए।

सोशल मीडिया ट्रेंड्स

रेड लाइट थेरेपी, माइक्रोन्यूलिंग और गुआ शा जैसे ट्रेंड्स स्किन को रिजुवेनेट करने में मदद करते हैं। माइक्रोन्यूलिंग कोलेजन-बूटेबल तकनीक है, जो त्वचा में छोटे-छोटे माइक्रो-इंजरी देकर प्राकृतिक रूप से कोलेजन बनाती है।

अच्छी त्वचा के लिए गोल्डन रूल्स

महंगे सीरम खरीदने से पहले अपनी बेसिक लाइफस्टाइल को सुधारें। रात में अच्छी नींद लेने से डीएनए और स्किन सेल्स खुद को रिपेयर करते हैं। चेहरे के योग के बजाय फुल बॉडी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। खट्टे फल, बेरीज, नट्स और विटामिन-सी व ई से भरपूर आहार लें। चीनी और मैदे से परहेज करें।

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