म्यूजिक कॉन्सर्ट का डबल मजा, मिलेगा सुरों के साथ सुरा का आनंद

The CSR Journal Magazine
क्या म्यूजिक कॉन्सर्ट में शराब परोसी जा सकती है? इस सवाल का जवाब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले के जरिए दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस शोर प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के तहत किसी कॉन्सर्ट में शराब परोसने पर रोक नहीं लगा सकती। यह फैसला लखनऊ पुलिस द्वारा लगाए गए एक प्रतिबंध के खिलाफ आया है, जिसमें लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट में शराब परोसने की अनुमति नहीं दी गई थी।

पुलिस का अधिकार और शर्तें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस केवल उसी कानून के तहत शर्तें लगा सकती है, जिसमें उसे अनुमति दी गई है। शोर प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नियमों का उपयोग शराब की बिक्री या सेवन पर रोक लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने Atlani Brothers Live v.State of U.P. मामले में यह फैसला सुनाया।

लखनऊ का कॉन्सर्ट और विवाद, पुलिस की अनुमति में शर्तें

यह मामला लखनऊ के गोमती नगर में होने वाले एक लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट से जुड़ा है। कार्यक्रम का आयोजन Atlani Brothers Live द्वारा किया जाना था, जिसकी प्रायोजक कंपनी Casa Bacardi थी। कार्यक्रम 10 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे से रात 9:45 बजे तक आयोजित होना था। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में शराब की बिक्री की योजना थी और इसके लिए आवश्यक लाइसेंस भी लेने की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी। लखनऊ के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने 30 सितंबर 2026 को कार्यक्रम के लिए अनुमति दी थी। इस अनुमति में कुल 18 शर्तें लगाई गई थीं। इनमें से एक शर्त के तहत कॉन्सर्ट में शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ को परोसने और इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई थी। आयोजकों ने इस शर्त को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

आयोजकों की दलीलें, अदालत का निर्णय

आयोजकों ने अदालत में कहा कि Noise Pollution Rules, 2000 के तहत पुलिस को केवल शोर प्रदूषण से जुड़े नियम लागू करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि जुलाई 2026 में हुए Papon Live कॉन्सर्ट को बिना ऐसी शर्त के अनुमति दी गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर गई है। इस मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि Noise Pollution Rules, 2000 का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में शोर के स्तर को नियंत्रित करना है। इन नियमों में शराब या अन्य नशीले पदार्थों को परोसने की अनुमति देने या रोकने की शक्ति नहीं दी गई है। इसलिए पुलिस द्वारा अनुमति पत्र में लगाई गई शर्त संख्या 18 को अदालत ने गैरकानूनी और अधिकार क्षेत्र से बाहर माना।

भेदभाव का मुद्दा, नए आदेश का निर्देश

अदालत ने पाया कि समान प्रकार के दूसरे कार्यक्रमों में शराब परोसने पर ऐसी रोक नहीं लगाई गई थी। इसलिए आयोजकों के साथ अलग व्यवहार को अदालत ने भेदभावपूर्ण माना और संविधान के अनुच्छेद 14 से जुड़े समानता के सिद्धांत को महत्वपूर्ण बताया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2026 के अनुमति पत्र को रद्द कर दिया। अदालत ने लखनऊ के संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) को शर्त संख्या 18 हटाकर नया आदेश जारी करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि शराब बेचने या परोसने के लिए आयोजकों को जरूरी लाइसेंस, शुल्क और अन्य कानूनी शर्तों का पालन करना होगा।

लाइसेंस और वैधानिक शर्तें

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि अब हर कॉन्सर्ट में बिना लाइसेंस शराब बेची या परोसी जा सकती है। आयोजकों को आबकारी कानूनों के तहत जरूरी लाइसेंस लेना और सभी वैधानिक शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। इस फैसले ने सरकारी अधिकारियों की कानूनी शक्तियों की सीमा को भी स्पष्ट किया है।

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