हाईकोर्ट की BMC को फटकार, सोशल मीडिया पर वापस लौटेगा दीया मिर्जा का दिवाली संदेश

The CSR Journal Magazine

दीया मिर्जा के दिवाली वीडियो पर विवाद: बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC को दिया फिर से अपलोड करने का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट का बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को कड़ा आदेश: बीजेपी के विरोध के बाद हटाया गया दीया मिर्जा का प्रदूषण मुक्त दिवाली संदेश सोशल मीडिया पर दोबारा अपलोड होगा; अदालत ने कहा- “हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं, पर्यावरण के मुद्दों पर गुटबाजी और संकीर्ण राजनीति के लिए कोई जगह नहीं।”

राजनीति और जनस्वास्थ्य के टकराव पर न्यायपालिका का कड़ा रुख

मुंबई की आबोहवा को प्रदूषण से बचाने के लिए माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू किया गया एक जन-जागरूकता अभियान राजनीतिक खींचतान और सांप्रदायिक रंगत का शिकार हो गया। बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा द्वारा पर्यावरण के अनुकूल, ध्वनि और वायु प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने की अपील वाले एक आधिकारिक वीडियो को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कड़े विरोध के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से हटा दिया था। इस प्रशासनिक घुटने टेकने की नीति और राजनीतिक बयानबाजी पर गंभीर रुख अपनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज (3 नवंबर) न केवल बीएमसी प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई, बल्कि यह आदेश भी दिया कि अभिनेत्री दीया मिर्जा के इस वीडियो क्लिप को तुरंत उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फिर से अपलोड (Re-upload) किया जाए।
जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला के. गोखले की खंडपीठ ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा असंतोष और दुख व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हवा और पर्यावरण सबका साझा है, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि कुछ जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक हस्तियों की संकीर्ण मानसिकता (Petty mindset) के कारण एक गंभीर स्वास्थ्य अभियान को विवादों में घसीटा जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

विवाद की पृष्ठभूमि: कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

दरअसल, मुंबई में हर साल त्योहारों और सर्दियों के मौसम में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। मुंबई में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (Suo motu PIL) और पटाखों से होने वाले प्रदूषण से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीते 26 अक्टूबर को बीएमसी को एक विशेष निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि महानगरपालिका को जनता के पैसे बर्बाद किए बिना (बिना किसी भुगतान के) समाज की जानी-मानी हस्तियों और मशहूर हस्तियों (Celebrities) को इस प्रदूषण विरोधी अभियान से जोड़ना चाहिए ताकि आम नागरिकों तक पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश जा सके।
न्यायालय के इसी आदेश का पालन करते हुए बीएमसी के तत्कालीन प्रशासन और नागरिक निकाय ने दिवाली के दौरान सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे न फोड़ने तथा पर्यावरण-अनुकूल ‘ग्रीन पटाखे’ या बिना पटाखों वाली दिवाली मनाने का संदेश देने के लिए एक अभियान तैयार किया। इस अभियान के तहत बीएमसी ने भारतीय क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे, दिग्गज अभिनेत्री माधुरी दीक्षित, अनुभवी अभिनेत्री निशिगंधा वाड और पर्यावरण कार्यकर्ता व अभिनेत्री दीया मिर्जा को स्वेच्छा से संदेश रिकॉर्ड करने के लिए शामिल किया। गत 1 नवंबर को बीएमसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X और इंस्टाग्राम) पर दीया मिर्जा का वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में दीया मिर्जा ने मुंबईकरों से अपील की थी कि वे माननीय हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों का सम्मान करें और त्योहार के दौरान अत्यधिक आतिशबाजी से बचकर शहर की हवा को सांस लेने योग्य बनाए रखने में योगदान दें।

राजनीतिक घमासान: बीजेपी नेताओं की आपत्ति और बीएमसी का यू-टर्न

वीडियो अपलोड होने के कुछ ही घंटों के भीतर मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष अमित साटम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सीधे तौर पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने बीएमसी को टैग करते हुए तीखे शब्दों में लिखा, “हमें दीया मिर्जा जैसी हस्तियों से यह सीखने की आवश्यकता नहीं है कि दिवाली कैसे मनाई जाए। हमारी परंपराएं हमारी संस्कृति में गहराई से समाहित हैं।” साटम ने आगे आरोप लगाया कि कुछ हस्तियां देश विरोधी ताकतों या समाज में अराजकता फैलाने वाले तत्वों के साथ खड़ी होती हैं और केवल हिंदू त्योहारों पर ही ज्ञान देती हैं। इस राजनीतिक दबाव के तुरंत बाद मुंबई की नवनियुक्त मेयर रितु तावड़े ने भी इस विवाद में कूदते हुए अभिनेत्री पर ‘एंटी-हिंदुत्व’ (हिंदू विरोधी) और सरकार विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने बीएमसी प्रशासन को चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी अभियान के लिए मशहूर हस्तियों के चयन से पहले उनसे लिखित मंजूरी या ‘क्लीयरेंस’ ली जानी चाहिए।
राजनीतिक विवाद को बढ़ता देख और सत्ता पक्ष के दबाव के आगे घुटने टेकते हुए बीएमसी प्रशासन ने रविवार (2 नवंबर) को बिना कोई ठोस कारण बताए, दीया मिर्जा के वीडियो को अपने सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से चुपचाप हटा (Delete) दिया, जबकि क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे और माधुरी दीक्षित के वीडियो पेज पर बरकरार रखे गए। बीएमसी के इस चुनिंदा रवैये (Selective Removal) ने इस मामले को एक बड़े राष्ट्रीय और कानूनी विवाद में तब्दील कर दिया।

महाराष्ट्र की सियासत में तीखी प्रतिक्रियाएं

दीया मिर्जा का वीडियो हटाए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में ‘सनातन बनाम सेक्युलर’ और ‘पर्यावरण बनाम परंपरा’ की बहस छिड़ गई।
सत्ता पक्ष का रुख: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने बीजेपी के रुख का समर्थन करते हुए कहा, “दीया मिर्जा जैसी हस्तियां केवल दिवाली या होली पर पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होती हैं, लेकिन ईद, मुहर्रम या बकरीद जैसे त्योहारों के दौरान वे प्रदूषण या पर्यावरण को लेकर मूकदर्शक बनी रहती हैं। ऐसी मानसिकता सनातन धर्म के खिलाफ है।”
विपक्ष का पलटवार: शिवसेना (UBT) और एनसीप (शरद पवार) के नेताओं ने बीजेपी पर इस संवेदनशील सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे का ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाया। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब संदेश केवल स्वच्छ हवा और माननीय अदालत के आदेशों का पालन करने से जुड़ा था, तो उसमें धर्म और राजनीति को क्यों घसीटा गया?
इस बीच स्वयं अभिनेत्री दीया मिर्जा ने बेहद शालीनता से प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “यह वीडियो मैंने पूरी तरह से जनहित में और माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप रिकॉर्ड किया था। वायु प्रदूषण आज एक गंभीर वैश्विक और स्थानीय चिंता का विषय है, और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े हर सकारात्मक प्रयास का स्वागत होना चाहिए।”

बॉम्बे हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणियां: “सब एक ही हवा में सांस ले रहे हैं”

3 नवंबर (मंगलवार) को जब त्योहारों के दौरान आतिशबाजी प्रदूषण से जुड़ी मुख्य याचिका खंडपीठ के समक्ष आई, तो अदालत का ध्यान दीया मिर्जा के वीडियो को हटाए जाने के विवाद की ओर आकर्षित किया गया। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ बीएमसी के रवैये और राजनीतिक नेताओं की टिप्पणियों पर बेहद असहज और नाराज दिखी। अदालत ने खुले कोर्ट रूम में बीएमसी और मामले से जुड़े नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
संकीर्ण मानसिकता पर प्रहार: खंडपीठ ने कहा, “यह बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यायालय के आदेशों के तहत जनहित और जनस्वास्थ्य के लिए शुरू किए गए एक पवित्र अभियान को कुछ लोगों की संकीर्ण मानसिकता (Knee-jerk reaction) के कारण एक अलग ही रंग दे दिया गया। समाज के व्यापक हित की कीमत पर कुछ लोगों की ऐसी तात्कालिक प्रतिक्रियाओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”
समान वायु का सिद्धांत: जस्टिस गोखले ने बेहद तार्किक बात कहते हुए टिप्पणी की, “जब हम पर्यावरण, स्वास्थ्य और वायु प्रदूषण की बात करते हैं, तो वहां किसी भी प्रकार की गुटबाजी या विभाजन की गुंजाइश नहीं होती। इस देश का हर नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या पंथ से ताल्लुक रखता हो, वह एक ही हवा में सांस ले रहा है। प्रदूषण किसी का मजहब देखकर फेफड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाता।”
धर्मनिरपेक्षता का संवैधानिक पाठ: अदालत ने राजनेताओं की बयानबाजी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा, “हम एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) देश हैं और हमारा संविधान प्रत्येक नागरिक से इसी धर्मनिरपेक्ष भावना को बढ़ावा देने की उम्मीद करता है। हमें कल टिप्पणी करने वाले किसी भी राजनेता या व्यक्ति का ऐसा कोई वीडियो दिखाई नहीं दिया जो जनता के बीच पर्यावरण को लेकर जागरूकता फैला रहा हो।”
बीएमसी कमिश्नर के फैसले का समर्थन: अदालत ने स्पष्ट किया कि बीएमसी कमिश्नर द्वारा इस सामाजिक संदेश के लिए मशहूर हस्तियों का चयन पूरी तरह से सही और विवेकपूर्ण था। मशहूर हस्तियां समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बिना किसी शुल्क के इस अभियान का हिस्सा बनी थीं, ऐसे में उनके खिलाफ की गई अनुचित टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं।
वीडियो पुनः बहाल करने का आदेश: अदालत ने बीएमसी को सीधा और कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि जनता के बीच संविधान और कानून के प्रति विश्वास बहाल करने के लिए यह आवश्यक है कि हटाए गए वीडियो क्लिप को बिना किसी देरी के उनके आधिकारिक पेजों पर वापस (Re-upload) लाया जाए। मुंबई शहर एकजुटता और अपनेपन की भावना पर टिकता है, जिसे ऐसी हल्की टिप्पणियों (Loose comments) से डिगाया नहीं जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया: “यह मेरे स्तर का मुद्दा नहीं”

बॉम्बे हाईकोर्ट के इस कड़े रुख और री-अपलोडिंग के आदेश के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी बयान सामने आया। पत्रकारों द्वारा इस विवाद पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने इसे बेहद मामूली मुद्दा करार दिया। फडणवीस ने कहा, “यह बहुत छोटा विषय है। माननीय उच्च न्यायालय ने अपनी राय व्यक्त की होगी, लेकिन सोशल मीडिया हैंडल पर क्या रखना है और क्या हटाना है, यह पूरी तरह से मुंबई नगर निगम (BMC) के संबंधित डिजिटल अथॉरिटी का विशेषाधिकार है। दीया मिर्जा एक अच्छी अभिनेत्री हो सकती हैं, लेकिन वे देश की कोई बड़ी राजनीतिक हस्ती नहीं हैं। वैसे भी, मुझे लगता है कि ऐसे छोटे विषय मेरे स्तर के नहीं हैं।” मुख्यमंत्री के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक बीएमसी द्वारा उठाए गए कदम के परोक्ष बचाव और अदालती आदेश पर एक सधे हुए राजनीतिक जवाब के रूप में देख रहे हैं।

मुख्य कानूनी व सामाजिक निष्कर्ष

यह पूरा घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र के तीन प्रमुख पहलुओं को रेखांकित करता है:
न्यायपालिका की संप्रभुता: न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब कोई आदेश जनहित में जारी किया जाता है, तो किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा को उसे धार्मिक एजेंडे के तहत हाइजैक करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अधिकारियों का प्रशासनिक रीढ़विहीन होना: मात्र एक राजनीतिक ट्वीट और मेयर की मौखिक आपत्ति के बाद बिना किसी लिखित समीक्षा के जनहित के वीडियो को हटा देना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक निकाय (Civic administration) राजनीतिक दबाव के आगे कितने संवेदनशील और कमजोर हैं।
पर्यावरण बनाम सांप्रदायिकता: भारत के महानगरीय शहरों, विशेष रूप से मुंबई और दिल्ली में वायु प्रदूषण एक आपातकालीन मानवीय संकट बन चुका है। ऐसे समय में जब संपूर्ण समाज को एकजुट होकर स्वच्छ पर्यावरण के लिए काम करना चाहिए, तब भी स्वास्थ्य सुधार के संदेशों को ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’ या ‘सनातन बनाम गैर-सनातन’ के चश्मे से देखना जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से खतरनाक संकेत है।

बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट का यह ऐतिहासिक हस्तक्षेप न केवल दीया मिर्जा के व्यक्तिगत और सामाजिक प्रयासों को न्याय प्रदान करता है, बल्कि देश भर के उन सभी पर्यावरण कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का हौसला बढ़ाता है जो अक्सर राजनीतिक ट्रोलिंग और संकीर्ण टिप्पणियों के डर से चुप रह जाते हैं। बीएमसी द्वारा वीडियो को दोबारा अपलोड किए जाने की प्रक्रिया अब शुरू कर दी गई है और यह अदालती आदेश आने वाले समय में त्योहारों और पर्यावरण के बीच संतुलन साधने वाले अभियानों के लिए एक बड़ा कानूनी सुरक्षा कवच बनेगा।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos