मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में बूम, 2018 के बाद 9 महीनों की सबसे बड़ी बिक्री, प्रीमियम मकानों की मांग ने बढ़ाया बाजार
मुंबई महानगर क्षेत्र के आवासीय रियल एस्टेट बाजार ने वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच मुंबई में 72,804 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई। यह 2018 के बाद किसी भी वर्ष के पहले नौ महीनों में दर्ज सबसे अधिक बिक्री है। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनियों की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बिक्री में करीब 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। खास बात यह है कि बाजार में केवल सस्ते या किफायती घरों की मांग ही नहीं बनी हुई है, बल्कि ₹1 करोड़ से ऊपर कीमत वाले घरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
तीसरी तिमाही में बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड
मुंबई के आवासीय बाजार में वर्ष की शुरुआत से बिक्री लगातार बढ़ती गई। जनवरी-मार्च यानी पहली तिमाही में 23,185 घर बिके, जबकि अप्रैल-जून की दूसरी तिमाही में बिक्री बढ़कर 24,170 इकाइयों पर पहुंच गई। जुलाई-सितंबर की तीसरी तिमाही में बिक्री और तेज हुई तथा 25,449 घरों की बिक्री दर्ज की गई। यह 2018 के बाद किसी एक तिमाही में मुंबई में दर्ज सबसे ऊंची बिक्री है। तीसरी तिमाही की बिक्री पिछले वर्ष की चौथी तिमाही के आंकड़े से भी मामूली रूप से अधिक रही। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि मुंबई में घर खरीदने की गतिविधियां केवल किसी एक महीने या त्योहारी अवधि तक सीमित नहीं हैं। पूरे वर्ष बाजार में मांग बनी रही और तिमाही-दर-तिमाही बिक्री में सुधार देखने को मिला।
नए घरों की आपूर्ति भी बढ़ी
बिक्री के साथ-साथ नए घरों की पेशकश में भी तेजी आई है। जनवरी से सितंबर के दौरान मुंबई में डेवलपर्स ने करीब 72,673 नई आवासीय इकाइयां लॉन्च कीं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 13 प्रतिशत अधिक है। यानी बाजार में नई आपूर्ति और बिक्री के बीच काफी हद तक संतुलन बना हुआ है। पहली तिमाही में 25,491, दूसरी तिमाही में 23,670 और तीसरी तिमाही में 23,512 नए घर बाजार में आए। बिक्री और नई आपूर्ति लगभग बराबर रहने से बाजार में उपलब्ध बिना बिके घरों के दबाव में भी कमी आई है। सितंबर के अंत तक मुंबई में बिना बिके आवासीय घरों की संख्या सालाना आधार पर करीब 2 प्रतिशत घटकर 1,55,473 रह गई।
₹1 करोड़ से महंगे घरों की मांग बढ़ी
मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में सबसे बड़ा बदलाव खरीदारों की पसंद में दिखाई दे रहा है। ₹1 करोड़ से कम कीमत वाले घर अभी भी कुल बिक्री का बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन उनकी बिक्री की रफ्तार कमजोर हुई है। इसके विपरीत ₹1 करोड़ से अधिक कीमत वाले घरों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। ₹1 करोड़ से ₹2 करोड़ कीमत वाले घरों की बिक्री जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान 16,296 इकाइयों तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 9 प्रतिशत अधिक है। ₹2 करोड़ से ₹5 करोड़ कीमत वाले घरों की बिक्री 9,861 इकाइयों रही और इसमें सालाना आधार पर 11 प्रतिशत वृद्धि हुई। दोनों श्रेणियों को मिलाकर ₹1 करोड़ से ₹5 करोड़ के घरों ने मुंबई की कुल आवासीय बिक्री में लगभग 36 प्रतिशत हिस्सेदारीहासिल की। इसका अर्थ है कि मुंबई के आवासीय बाजार में खरीदार धीरे-धीरे अधिक कीमत वाले घरों की ओर बढ़ रहे हैं। बेहतर आय, पेशेवर वर्ग की मजबूत क्रय क्षमता और शहर में उच्च आय वाले रोजगार के अवसर इस बदलाव के प्रमुख कारणों में माने जा रहे हैं।
किफायती घरों की बिक्री में हल्की गिरावट
हालांकि मुंबई में किफायती आवास की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ₹50 लाख से कम कीमत वाले घर अभी भी सबसे बड़ा व्यक्तिगत बिक्री वर्ग हैं। जनवरी-सितंबर के दौरान इस श्रेणी में 26,136 घर बिके, जो कुल बिक्री का करीब 36 प्रतिशत है। हालांकि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस श्रेणी की बिक्री में 6 प्रतिशत की कमी आई है। इसी तरह ₹50 लाख से ₹1 करोड़ के बीच कीमत वाले घरों की बिक्री 17,601 इकाइयों रही और इसमें करीब 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज हुई। यानी ₹1 करोड़ से कम कीमत वाले घर अभी भी बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहे हैं, लेकिन वृद्धि का मुख्य आधार अब अधिक कीमत वाले आवास बन रहे हैं।
लग्जरी और अल्ट्रा-लग्जरी बाजार में जोरदार उछाल
मुंबई के उच्च श्रेणी के आवासीय बाजार में तेजी और भी स्पष्ट है। ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ के बीच कीमत वाले घरों की बिक्री 2,012 इकाइयों तक पहुंची, जो सालाना आधार पर 16 प्रतिशत अधिक है। ₹10 करोड़ से ₹20 करोड़ के बीच के घरों की बिक्री 526 इकाइयों रही, जिसमें 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ₹20 करोड़ से ₹50 करोड़ के बीच कीमत वाले घरों की बिक्री भी करीब 35 प्रतिशत बढ़कर 331 इकाइयोंपर पहुंच गई। सबसे खास बात यह है कि देश के आठ प्रमुख आवासीय बाजारों में जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान ₹50 करोड़ से अधिक कीमत वाले कुल 53 घर बिके, जिनमें से 41 सौदे मुंबई में हुए। इससे पता चलता है कि देश के महंगे और अल्ट्रा-लग्जरी आवासीय बाजार में मुंबई की पकड़ कितनी मजबूत है।
मुंबई का देश के आवासीय बाजार में सबसे बड़ा हिस्सा
देश के आठ प्रमुख आवासीय बाजारों में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कुल 2,58,238 घरों की बिक्रीहुई। इनमें अकेले मुंबई की हिस्सेदारी करीब 28 प्रतिशत रही। इस लिहाज से मुंबई देश का सबसे बड़ा आवासीय बाजार बना हुआ है। मुंबई के बाद बेंगलुरु में 43,140 और पुणे में 36,402 घर बिके। दिल्ली-एनसीआर को छोड़कर अधिकांश प्रमुख शहरों में आवासीय मांग स्थिर या सकारात्मक रही। एनसीआर में बिक्री 11 प्रतिशत घटकर 35,574 इकाइयों पर आ गई, जबकि बेंगलुरु में बिक्री 5 प्रतिशत बढ़ी। इससे भी मुंबई की स्थिति मजबूत दिखाई देती है।
कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी
बिक्री बढ़ने के साथ मुंबई में घरों की कीमतें भी ऊपर जा रही हैं। 2026 की तीसरी तिमाही में मुंबई में आवासीय संपत्तियों की भारित औसत कीमत करीब ₹37,064 प्रति वर्ग फुट रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। वहीं ठाणे में कीमत करीब ₹15,005 और नवी मुंबई में करीब ₹13,847 प्रति वर्ग फुट रही। कीमतों में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि को रिपोर्ट ने उपभोक्ता महंगाई के आसपास बताया है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल कीमतों में वृद्धि बहुत तेज या असामान्य स्तर पर नहीं है, बल्कि बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति बनी हुई है।
बिना बिके घरों का दबाव भी घटा
रियल एस्टेट बाजार की सेहत समझने के लिए केवल बिक्री के आंकड़े ही महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि यह भी देखना जरूरी होता है कि बाजार में कितने घर बिना बिके पड़े हैं। मुंबई में इस मोर्चे पर भी स्थिति में सुधार हुआ है। सितंबर 2026 तक बिना बिके आवासीय घरों का स्टॉक करीब 1.55 लाख इकाइयों पर आ गया। पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 2 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं ‘क्वार्टर्स टू सेल’ यानी मौजूदा बिक्री की रफ्तार से उपलब्ध बिना बिके घरों को बेचने में लगने वाला अनुमानित समय 6.4 तिमाहियों रह गया, जो एक साल पहले 6.6 तिमाही था। 2025 की पहली तिमाही में यह 7.1 तिमाही था। कम समय का मतलब है कि उपलब्ध मकानों की बिक्री अपेक्षाकृत तेजी से हो रही है।
बुनियादी ढांचा बना मांग का बड़ा आधार
मुंबई में रियल एस्टेट की मजबूत मांग के पीछे शहर में चल रही बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भी महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार, नए पुल और सड़क परियोजनाएं, पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों में बेहतर संपर्क, मुंबई महानगर क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं का विस्तार और हवाई अड्डे के आसपास विकसित हो रहे नए वाणिज्यिक केंद्रों ने कई इलाकों की आवासीय मांग को मजबूत किया है। हाल की बाजार रिपोर्टों में भी मुंबई की मजबूत आवासीय मांग के पीछे बुनियादी ढांचे और बेहतर कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। विशेषकर ऐसे इलाकों में खरीदारों की रुचि बढ़ रही है जहां मेट्रो, सड़क या अन्य परिवहन सुविधाओं के विस्तार के कारण यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है। इससे पहले अपेक्षाकृत दूर माने जाने वाले उपनगर भी खरीदारों और डेवलपर्स के लिए अधिक आकर्षक हो रहे हैं।
बाजार में ‘प्रीमियमाइजेशन’ का दौर
मुंबई के आंकड़े एक व्यापक बदलाव की ओर भी इशारा करते हैं। देश के प्रमुख शहरों में ₹1 करोड़ से अधिक कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। जनवरी-सितंबर 2026 में आठ प्रमुख शहरों में कुल आवासीय बिक्री में ₹1 करोड़ से अधिक कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत रही, जबकि एक वर्ष पहले यह करीब 50 प्रतिशत थी। 2018 में यह हिस्सा केवल 16 प्रतिशत के आसपास था। मुंबई में यह बदलाव और ज्यादा स्पष्ट दिखाई देता है। शहर की आर्थिक संरचना, वित्तीय सेवाओं और कॉरपोरेट क्षेत्र में उच्च आय वाली नौकरियों तथा सीमित जमीन की उपलब्धता के कारण महंगे घरों की मांग लंबे समय से मजबूत रही है। अब यह मांग शहर के प्रमुख उपनगरों और मुंबई महानगर क्षेत्र के चुनिंदा हिस्सों तक भी फैल रही है।
त्योहारी मौसम से आगे भी उम्मीद
सितंबर तक के मजबूत आंकड़ों के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र की नजर अब वर्ष की अंतिम तिमाही पर है। भारत में आमतौर पर त्योहारी अवधि के दौरान घर खरीदने की गतिविधियां बढ़ती हैं। डेवलपर्स भी इस दौरान नए प्रोजेक्ट, विशेष योजनाएं और खरीदारों के लिए विभिन्न प्रोत्साहन पेश करते हैं। हालांकि, बाजार के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। लगातार बढ़ती संपत्ति कीमतें मध्यम आय वर्ग के खरीदारों के लिए घर खरीदना कठिन बना सकती हैं। खासकर मुंबई जैसे शहर में जमीन की सीमित उपलब्धता, निर्माण लागत और प्रीमियम इलाकों में ऊंची कीमतें किफायती आवास की आपूर्ति पर दबाव डालती हैं। फिर भी मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि मुंबई का आवासीय बाजार फिलहाल मंदी की स्थिति में नहीं है। 72,804 घरों की नौ महीने की बिक्री, 72,673 नए घरों की लॉन्चिंग, घटता बिना बिका स्टॉक और ₹1 करोड़ से ऊपर के घरों की बढ़ती मांग बाजार में मजबूत लेकिन बदलती हुई मांग का संकेत देती है।
कुल मिलाकर, मुंबई का रियल एस्टेट बाजार अब केवल बिक्री की मात्रा के आधार पर ही मजबूत नहीं दिख रहा, बल्कि खरीदारों की पसंद में भी बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। किफायती श्रेणी में बिक्री की गति कुछ धीमी होने के बावजूद प्रीमियम, लग्जरी और अल्ट्रा-लग्जरी घरों की मांग ने बाजार को मजबूती दी है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बढ़ती कीमतों और नए आवासीय प्रोजेक्टों के बीच मांग कितनी देर तक इसी गति से बनी रहती है।
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