हैदराबाद में मिलावटी मसालों का बड़ा खुलासा, पुराने और एक्सपायर्ड मसालों को नए पैकेट में भरकर बेचने का आरोप
खाने-पीने की चीजों में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई के बीच हैदराबाद में मिलावटी मसालों के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने गुरुवार, 19 अगस्त को शहर में दो अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में मिलावटी और एक्सपायर्ड मसाले बरामद किए। पुलिस के अनुसार, दोनों ठिकानों से जब्त किए गए सामान का कुल वजन करीब 11,220 किलोग्राम है। कार्रवाई के दौरान दो लोगों को हिरासत में लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोप सामने आया है कि पुराने और एक्सपायर्ड मसालों को नए पैकेट में भरकर दोबारा बाजार में बेचने की तैयारी की जा रही थी। इस प्रक्रिया में मसालों की गुणवत्ता और उनकी वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए पैकेजिंग बदली जा रही थी। आरोप है कि मसालों को देखने में अधिक आकर्षक बनाने के लिए उनमें कृत्रिम फूड कलर भी मिलाया जा रहा था।
मिर्च पाउडर में लकड़ी का आरा चूरा मिलाने का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा मिर्च पाउडर को लेकर हुआ है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान चिली पाउडर में आरा चूरा यानी लकड़ी काटने से निकलने वाला बारीक कचरा मिलाए जाने की बात सामने आई। कथित तौर पर इसका इस्तेमाल मसाले की मात्रा बढ़ाने और लागत कम करने के लिए किया जा रहा था। मिर्च पाउडर में लकड़ी का चूरा मिलाने का आरोप खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा पदार्थ खाद्य सामग्री का हिस्सा नहीं होना चाहिए और इसे मिलाकर उपभोक्ताओं को बेचना स्वास्थ्य तथा खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला हो सकता है। हालांकि, जब्त नमूनों में वास्तव में कौन-कौन से पदार्थ मौजूद हैं और उनकी मात्रा कितनी है, इसकी अंतिम पुष्टि संबंधित खाद्य सुरक्षा जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट से होगी।
हल्दी, धनिया समेत कई मसालों में मिलावट की आशंका
पुलिस की कार्रवाई केवल मिर्च पाउडर तक सीमित नहीं रही। जांच में कथित तौर पर हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर और अन्य मसाला पाउडर भी बरामद किए गए। पुलिस को आशंका है कि इन मसालों को भी मिलावटी तरीके से तैयार कर बाजार में भेजने की तैयारी थी। आरोपियों द्वारा पुराने अथवा एक्सपायर्ड मसालों को नए पैकेट में भरकर बेचने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है। यदि यह आरोप जांच में सही साबित होता है, तो इसका मतलब होगा कि उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक उम्र, गुणवत्ता और स्थिति की जानकारी दिए बिना उन्हें बाजार में उतारने की कोशिश की जा रही थी।
फूड कलर डालकर मसालों को आकर्षक बनाने का आरोप
मसालों की मिलावट में एक और तरीका कथित तौर पर अपनाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, मसालों का रंग अधिक गहरा और आकर्षक दिखाने के लिए उनमें फूड कलर मिलाया जा रहा था। सामान्य तौर पर उपभोक्ता मसालों की गुणवत्ता का अंदाजा उनके रंग और पैकेजिंग से भी लगाते हैं। ऐसे में रंग बदलकर उत्पाद को बेहतर दिखाने की कोशिश उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है। खाद्य पदार्थों में किसी भी रंग या अन्य पदार्थ का इस्तेमाल निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। अनधिकृत या गैर-अनुमोदित पदार्थों का इस्तेमाल उपभोक्ताओं के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
11,220 किलो सामान की बरामदगी ने बढ़ाई चिंता
दो स्थानों से कुल 11,220 किलोग्राम संदिग्ध मसालों और संबंधित सामग्री की बरामदगी इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है। इतनी बड़ी मात्रा में सामान मिलने से यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह सामग्री कितनी मात्रा में बाजार तक पहुंच सकती थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद मसाले कहां तैयार किए जा रहे थे, इनका कच्चा माल कहां से आता था और इन्हें किन इलाकों या दुकानों में सप्लाई किया जाना था। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि कथित तौर पर तैयार किए गए मसालों की पैकेजिंग किस ब्रांड या नाम से की जा रही थी।
दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ
छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे मसालों की खरीद, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बिक्री से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि इस गतिविधि में और कितने लोग शामिल हैं। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है और जब्त किए गए खाद्य पदार्थों की प्रयोगशाला जांच में क्या सामने आता है।
स्वास्थ्य के लिए क्यों गंभीर है खाद्य मिलावट?
मसालों में मिलावट केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ा है। रोजमर्रा के भोजन में इस्तेमाल होने वाले मिर्च, हल्दी और धनिया जैसे मसाले बड़ी संख्या में लोगों के घरों तक पहुंचते हैं। यदि किसी मिलावटी उत्पाद की बड़े पैमाने पर सप्लाई होती है, तो उसका असर बहुत से उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। विशेष रूप से तब चिंता बढ़ जाती है जब खाद्य पदार्थ में ऐसा पदार्थ मिलाने का आरोप हो जो मूल खाद्य सामग्री का हिस्सा ही नहीं है। इस मामले में लकड़ी के आरा चूरे के इस्तेमाल का आरोप सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
पैकेट देखकर ही गुणवत्ता की गारंटी नहीं
यह मामला उपभोक्ताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। केवल आकर्षक पैकेट, चमकीला रंग या कम कीमत देखकर मसाले खरीदना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। पैकेट पर निर्माण तिथि, एक्सपायरी/बेस्ट-बिफोर तारीख, बैच नंबर, निर्माता का विवरण और संबंधित खाद्य सुरक्षा जानकारी देखना जरूरी है। उपभोक्ताओं को संदिग्ध गंध, असामान्य रंग, पैकेजिंग में छेड़छाड़ या असामान्य रूप से कम कीमत वाले खाद्य उत्पादों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर उसे इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा अथॉरिटी के पास शिकायत करना बेहतर है।
आगे की जांच में खुल सकते हैं बड़े राज
हैदराबाद में हुई इस कार्रवाई ने मसालों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 11,220 किलो संदिग्ध सामग्री की बरामदगी के बाद अब जांच का फोकस इस बात पर रहेगा कि कथित मिलावटी मसालों का नेटवर्क कितना बड़ा था और इनकी सप्लाई कहां तक की जानी थी। फिलहाल पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है और जब्त सामग्री की जांच की जा रही है। प्रयोगशाला रिपोर्ट और आगे की पुलिस जांच से यह स्पष्ट होगा कि बरामद मसालों में कौन-कौन से पदार्थ मिलाए गए थे, कितनी मात्रा में मिलावट की गई थी और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं।
सतर्कता जरूरी
खाद्य पदार्थों में मिलावट का यह मामला एक बार फिर बताता है कि मसालों जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों की गुणवत्ता पर निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में केवल छापेमारी ही नहीं, बल्कि मिलावटी उत्पादों की सप्लाई चेन तक पहुंचकर प्रभावी कार्रवाई करना भी जरूरी है।
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