महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, यूनियनों ने आंदोलन की दी चेतावनी

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महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, 20 अगस्त से वीडियो निगरानी, यूनियनों ने आंदोलन की दी चेतावनी

महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के ‘व्यावहारिक ज्ञान’ को अनिवार्य करने का फैसला अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि 20 अगस्त 2026 से नए ऑटो-रिक्शा और टैक्सी बैज जारी करने के दौरान मराठी भाषा के ज्ञान की जांच की पूरी प्रक्रिया वीडियो रिकॉर्ड की जाएगी। सरकार का कहना है कि वीडियो रिकॉर्डिंग का उद्देश्य जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और बैज जारी करने में किसी भी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार की संभावना को रोकना है। दूसरी ओर, इस नियम को लेकर ऑटो और टैक्सी यूनियनों में असंतोष भी सामने आया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि भाषा नियम के नाम पर यदि चालकों को लंबे समय तक बैज या परमिट से वंचित किया गया अथवा उनसे आर्थिक वसूली की कोशिश हुई, तो इसका सीधा असर उनके परिवारों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा। मुंबई टैक्सीमेन एसोसिएशन ने आर्थिक शोषण की स्थिति में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

1989 से मौजूद प्रावधान, अब सख्ती से लागू

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी के व्यावहारिक ज्ञान की आवश्यकता कोई बिल्कुल नया प्रावधान नहीं है। सरकार का कहना है कि यह शर्त महाराष्ट्र में वर्ष 1989 से नियमों में मौजूद रही है, लेकिन इसका प्रभावी तरीके से पालन नहीं कराया गया। अब मोटर वाहन नियमों में किए गए हालिया संशोधन के बाद इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने अगस्त 2026 में महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी के ‘वर्किंग नॉलेज’ यानी रोजमर्रा के कामकाज के स्तर का ज्ञान आवश्यक किया है। नए प्रावधान के तहत चालक को यात्रियों से सामान्य बातचीत और कामकाज के लिए आवश्यक मराठी समझने-बोलने में सक्षम होना होगा। सरकार का तर्क है कि ऑटो और टैक्सी चालक सीधे आम जनता से जुड़े होते हैं। ऐसे में यात्रियों के साथ स्थानीय भाषा में संवाद करने की क्षमता सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नए बैज के लिए अब सीधे होगी भाषा परीक्षा

20 अगस्त से शुरू होने वाली प्रक्रिया में नए ऑटो-रिक्शा और टैक्सी बैज के आवेदकों की मराठी भाषा की क्षमता की जांच आरटीओ अधिकारी सीधे बातचीत के माध्यम से करेंगे। अधिकारी यह देखेंगे कि आवेदक को रोजमर्रा के यात्री परिवहन से जुड़े संवाद के लिए आवश्यक मराठी आती है या नहीं।सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इस पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। परिवहन विभाग ने आरटीओ अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने और भाषा परीक्षण के दौरान वीडियो रिकॉर्ड करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री सरनाईक के मुताबिक, इससे यह पता चल सकेगा कि आवेदक का परीक्षण किस तरह किया गया और उसे बैज देने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया। सरकार का मानना है कि रिकॉर्डिंग से अधिकारी और आवेदक दोनों की जवाबदेही तय होगी। यदि भविष्य में कोई व्यक्ति यह शिकायत करता है कि उसका भाषा परीक्षण सही तरीके से नहीं हुआ या बैज जारी करने में अनियमितता हुई, तो रिकॉर्ड किए गए वीडियो की मदद से प्रक्रिया की जांच की जा सकेगी।

बैज जारी करने में भ्रष्टाचार रोकने की कोशिश

मंत्री सरनाईक ने कहा है कि वीडियो रिकॉर्डिंग का एक प्रमुख उद्देश्य बैज जारी करने की प्रक्रिया में होने वाली कथित अनियमितताओं पर रोक लगाना है। परिवहन विभाग को बैज और परमिट से संबंधित फर्जी दस्तावेजों की शिकायतें भी मिली हैं। विभाग ने फर्जी डोमिसाइल प्रमाणपत्र के इस्तेमाल की शिकायतों की जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र में अब तक करीब 9.65 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट तथा बैज जारी किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में व्यावसायिक यात्री वाहनों से जुड़े दस्तावेजों और पात्रता की जांच को पारदर्शी बनाना परिवहन विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

मराठी नहीं आने पर पहले मिलेगा मौका

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल मराठी नहीं बोल पाने के कारण तत्काल किसी चालक की रोजी-रोटी छीनने का उद्देश्य नहीं है। जिन चालकों में आवश्यक ‘वर्किंग नॉलेज’ नहीं पाया जाएगा, उन्हें पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। इस अवधि में उन्हें मराठी सीखने और निर्धारित आवश्यकता पूरी करने का अवसर मिलेगा। यदि नोटिस अवधि के बाद भी चालक आवश्यक भाषा ज्ञान हासिल नहीं करता है, तो उसके बैज पर कार्रवाई हो सकती है। परिवहन विभाग के अनुसार, बैज को तीन महीने तक निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर बैज और परमिट रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बिंदु भी सामने आया है। मंत्री की ओर से लाइसेंस निलंबन या रद्द करने की बात कही गई है, जबकि एक सेवानिवृत्त आरटीओ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि इस आधार पर परिवहन विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से बैज या परमिट तक सीमित हो सकती है। इसलिए नियम के व्यावहारिक क्रियान्वयन में संबंधित कानूनी अधिकारों की स्पष्टता भी महत्वपूर्ण होगी।

1.65 लाख से अधिक चालकों ने लिया मराठी प्रशिक्षण

सरकार ने नियम लागू करने से पहले चालकों को मराठी सीखने का अवसर देने के लिए अभियान भी चलाया। 105 दिन के ‘हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ के तहत बड़ी संख्या में गैर-मराठी भाषी ऑटो और टैक्सी चालकों को प्रशिक्षण दिया गया। परिवहन मंत्री के अनुसार, इस अभियान में महाराष्ट्र के 1,65,601 गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक मराठी प्रशिक्षण के लिए आगे आए। इनमें से बड़ी संख्या में चालकों ने प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में काम करने वाले लोगों को स्थानीय भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है।

करीब छह लाख चालकों पर पड़ेगा असर

परिवहन विभाग की यह पहल खास तौर पर मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के लिए महत्वपूर्ण है, जहां देश के अलग-अलग राज्यों से आए बड़ी संख्या में लोग ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाकर अपनी आजीविका कमाते हैं। सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र में करीब छह लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने की पहल के दायरे में लाया जाएगा। वहीं यूनियन नेताओं का दावा है कि व्यावसायिक यात्री परिवहन क्षेत्र में गैर-महाराष्ट्रीयन चालकों की संख्या काफी बड़ी है। इस वजह से भाषा का यह नियम केवल प्रशासनिक फैसला नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा संबंध रोजगार, प्रवासी श्रमिकों, मुंबई की बहुभाषी पहचान और स्थानीय भाषा की भूमिका से भी जुड़ गया है।

यूनियनों को सबसे ज्यादा चिंता रोजी-रोटी की

टैक्सी और ऑटो यूनियन नेताओं ने नियम के पीछे सरकार की मंशा पर सीधे सवाल उठाने के बजाय उसके क्रियान्वयन को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि भाषा की कमी के कारण किसी चालक का बैज लंबे समय के लिए निलंबित कर दिया जाता है, तो वह अपनी आय का मुख्य साधन खो सकता है। मुंबई टैक्सीमेन एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम सिंह ने कहा कि मुंबई के अधिकांश गैर-महाराष्ट्रीयन टैक्सी चालक मराठी को समझते हैं, हालांकि कुछ चालक उसे बोलने में सहज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कई चालक नियमों का पालन करने के लिए मराठी सीखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक लाइसेंस या बैज निलंबित करना उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकता है। यूनियन का सवाल है कि यदि किसी चालक का बैज तीन महीने के लिए निलंबित हो जाता है तो वह अपने परिवार का खर्च, बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरी जरूरतें कैसे पूरी करेगा।

भ्रष्टाचार हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

भाषा परीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग के पीछे सरकार का एक उद्देश्य भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है, लेकिन यही मुद्दा यूनियनों की चिंता का भी कारण बन गया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि यदि अधिकारियों या बिचौलियों द्वारा मराठी परीक्षण पास कराने, प्रमाणपत्र दिलाने या बैज बचाने के नाम पर चालकों से पैसे मांगे गए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रेम सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मराठी नियम लागू करने के नाम पर टैक्सी चालकों का आर्थिक शोषण पाया गया तो यूनियन आंदोलन शुरू करेगी। सेवा सारथी ऑटो रिक्शा, टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता डी.एम. गोसावी ने फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाने की बात कही है। यानी यूनियनें पहले देखना चाहती हैं कि नए नियम को जमीनी स्तर पर किस तरह लागू किया जाता है।

सरकार बनाम यूनियन: असली चुनौती होगी निष्पक्ष अमल

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अब यह है कि ‘व्यावहारिक मराठी ज्ञान’ को मापने का पैमाना क्या होगा। यदि किसी चालक को मराठी समझ में आती है, लेकिन वह धाराप्रवाह नहीं बोल पाता, तो क्या उसे असफल माना जाएगा? इसी तरह अलग-अलग आरटीओ कार्यालयों में भाषा परीक्षण का स्तर समान कैसे रखा जाएगा, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। वीडियो रिकॉर्डिंग से पारदर्शिता बढ़ सकती है, लेकिन केवल वीडियो बनाना पर्याप्त नहीं होगा। परीक्षण के लिए स्पष्ट प्रश्न, समान मानदंड, प्रशिक्षित अधिकारी और शिकायत निवारण की व्यवस्था भी जरूरी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि नियम का उद्देश्य भाषा ज्ञान की जांच तक सीमित रहे और किसी चालक को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।

सरकार का दावा—किसी की नौकरी छीनना उद्देश्य नहीं

प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य किसी की आजीविका छीनना नहीं है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र ने देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों का स्वागत किया है, लेकिन राज्य में काम करने वाले लोगों को यहां की भाषा और संस्कृति का सम्मान भी करना चाहिए।सरकार की ओर से पहले ही प्रशिक्षण अभियान चलाया जाना इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसलिए प्रशासन का जोर पहले भाषा सीखने का अवसर देने और उसके बाद नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर है।

आगे क्या होगा?

20 अगस्त से शुरू होने वाला अभियान पूरे महाराष्ट्र में चलेगा। अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ को इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है और आरटीओ की फ्लाइंग स्क्वॉड को जांच के निर्देश दिए गए हैं। नए बैज के लिए आवेदन करने वाले चालकों को अब मराठी भाषा की व्यावहारिक क्षमता साबित करनी होगी। वहीं पुराने चालकों के मामले में पहले से उपलब्ध प्रमाणपत्र, प्रशिक्षण और भाषा ज्ञान की जांच की जा सकती है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमाणपत्र होने के बावजूद कुछ चालकों से मौखिक परीक्षण किया जा सकता है, हालांकि अभियान के दौरान उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की जाएगी।

कागजों से बाहर हकीकत

महाराष्ट्र सरकार का मराठी भाषा नियम अब कागजों से निकलकर जमीनी स्तर पर लागू होने जा रहा है। 20 अगस्त से नए बैज के लिए मराठी सत्यापन की वीडियो रिकॉर्डिंग इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की कोशिश है। सरकार इसे स्थानीय भाषा, यात्री संवाद और नियमों के पालन से जोड़ रही है, जबकि ऑटो-टैक्सी यूनियनें आर्थिक नुकसान, बैज निलंबन और संभावित भ्रष्टाचार को लेकर सतर्क हैं।

ऑटो-टैक्सी चालकों का विरोध

अब इस नियम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि RTO अधिकारी इसे कितनी निष्पक्षता और समान मानकों के साथ लागू करते हैं। यदि भाषा सीखने का अवसर, स्पष्ट परीक्षा मानदंड, वीडियो रिकॉर्डिंग और शिकायत निवारण की व्यवस्था प्रभावी रही तो नियम को लागू करना आसान हो सकता है। लेकिन यदि इसका इस्तेमाल अनावश्यक दबाव या आर्थिक वसूली के लिए हुआ, तो महाराष्ट्र की सड़कों पर चलने वाले हजारों ऑटो और टैक्सी चालकों का विरोध तेज होना तय माना जा रहा है।

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