महाराष्ट्र में हाउसिंग सोसायटी के नियमों में बड़ा बदलाव, 5 सदस्यों से बनेगी सोसायटी, नॉमिनी को मिलेगा वोटिंग अधिकार
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सहकारी हाउसिंग सोसायटियों (Co-operative Housing Societies) के संचालन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सदस्य-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी नियमों (Maharashtra Co-operative Societies Rules) में व्यापक संशोधन लागू किए हैं। इन बदलावों का सीधा असर मुंबई, ठाणे, पुणे, नवी मुंबई, नागपुर सहित पूरे राज्य की लाखों हाउसिंग सोसायटियों और करोड़ों फ्लैट मालिकों पर पड़ेगा। नए नियमों के तहत सोसायटी गठन, सदस्य अधिकार, नॉमिनी की भूमिका, पार्किंग, मेंटेनेंस, समिति के अधिकार, ऑनलाइन बैठक, पुनर्विकास तथा वित्तीय पारदर्शिता जैसे अनेक विषयों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही विवादित व्यवस्थाओं को समाप्त करना, सदस्यों के अधिकारों को मजबूत करना तथा सोसायटियों में मनमानी और अनावश्यक विवादों को कम करना है।
केवल पांच सदस्यों से भी बन सकेगी हाउसिंग सोसायटी
नए नियमों के अनुसार अब छोटी आवासीय परियोजनाओं में भी सहकारी हाउसिंग सोसायटी का गठन आसान हो गया है। पहले कई मामलों में न्यूनतम सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण छोटे अपार्टमेंट या इमारतों को सोसायटी बनाने में कठिनाई आती थी। अब केवल पांच पात्र सदस्यों के साथ भी सोसायटी का पंजीकरण संभव होगा, जिससे छोटे प्रोजेक्टों के निवासियों को भी कानूनी ढांचा और लोकतांत्रिक प्रबंधन मिल सकेगा।
नॉमिनी को मिलेगा मतदान का अधिकार
सबसे चर्चित बदलावों में से एक नॉमिनी (Nominee) से जुड़ा है। पहले किसी सदस्य की मृत्यु के बाद नॉमिनी को कई मामलों में मतदान या सदस्यता संबंधी अधिकारों को लेकर अस्पष्टता रहती थी। अब नियमों में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित शर्तों के अनुसार नॉमिनी को मतदान का अधिकार दिया जा सकेगा। इससे उत्तराधिकार से जुड़े विवाद कम होने की संभावना है तथा मृत सदस्य के परिवार को सोसायटी के निर्णयों में भागीदारी मिल सकेगी।
पार्किंग विवादों पर स्पष्ट व्यवस्था
हाउसिंग सोसायटियों में पार्किंग को लेकर सबसे अधिक विवाद देखने को मिलते हैं। नई व्यवस्था में पार्किंग आवंटन और उसके उपयोग से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट बनाया गया है। सोसायटियों को पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी होगी तथा उपलब्ध पार्किंग का आवंटन निर्धारित नियमों के अनुसार करना होगा। किसी समिति या पदाधिकारी की व्यक्तिगत इच्छा के आधार पर पार्किंग देने या रोकने जैसी शिकायतों पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है।
मेंटेनेंस शुल्क और ब्याज के नियम भी बदले
मेंटेनेंस शुल्क जमा न करने पर पहले कई सोसायटियां अत्यधिक दंडात्मक ब्याज वसूलती थीं। नए नियमों के अनुसार विलंबित मेंटेनेंस भुगतान पर ब्याज की अधिकतम सीमा 12 प्रतिशत वार्षिक तय की गई है। इससे फ्लैट मालिकों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और सभी सोसायटियों में एक समान व्यवस्था लागू होगी।
अध्यक्ष और सचिव की मनमानी पर लगेगी रोक
सरकार ने सोसायटी प्रबंधन समितियों की जवाबदेही बढ़ाने पर भी जोर दिया है। अध्यक्ष, सचिव या अन्य पदाधिकारी अब अपनी मनमर्जी से निर्णय नहीं ले सकेंगे। महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए निर्धारित प्रक्रिया, रिकॉर्ड और समिति की स्वीकृति आवश्यक होगी। इससे वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक मनमानी पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है।
मॉडल उपविधियों को मिलेगी कानूनी मजबूती
अब सरकार द्वारा स्वीकृत मॉडल बायलॉ (Model Bye-laws) को अधिक कानूनी महत्व दिया गया है। इसका अर्थ है कि हाउसिंग सोसायटियों को स्वीकृत उपविधियों का पालन करना होगा और वे मनमाने नियम बनाकर सदस्यों के अधिकारों को सीमित नहीं कर सकेंगी। इससे राज्यभर में कार्यप्रणाली में एकरूपता आने की उम्मीद है।
ऑनलाइन AGM और डिजिटल भागीदारी
डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देते हुए अब कई परिस्थितियों में ऑनलाइन वार्षिक आम सभा (AGM) और डिजिटल भागीदारी की अनुमति भी दी गई है। इससे दूसरे शहर या विदेश में रहने वाले सदस्य भी बैठक में शामिल होकर मतदान और चर्चा में भाग ले सकेंगे।
स्वयं पुनर्विकास (Self Redevelopment) होगा आसान
मुंबई और अन्य शहरों में पुरानी इमारतों के पुनर्विकास को गति देने के लिए स्वयं पुनर्विकास की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। नियमों में वित्तीय प्रक्रिया, ऋण व्यवस्था और प्रशासनिक मंजूरियों को अधिक स्पष्ट किया गया है ताकि सोसायटियां बिल्डर पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना भी पुनर्विकास का विकल्प अपना सकें।
वित्तीय पारदर्शिता पर विशेष जोर
नई व्यवस्था के तहत सोसायटियों को लेखा-जोखा, खर्च, निधियों के उपयोग तथा समिति के निर्णयों का उचित रिकॉर्ड रखना होगा। इससे सदस्यों को वित्तीय जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
फ्लैट मालिकों को क्या होगा लाभ?
इन संशोधनों से फ्लैट मालिकों को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है—
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सोसायटी गठन आसान होगा।
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नॉमिनी के अधिकार स्पष्ट होंगे।
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पार्किंग विवाद कम होंगे।
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मनमाना मेंटेनेंस ब्याज नहीं लगाया जा सकेगा।
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समिति के पदाधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी।
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ऑनलाइन बैठकों में भाग लेना आसान होगा।
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पुनर्विकास की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
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सदस्यों को निर्णय प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता मिलेगी।
विशेषज्ञों की राय
सहकारी कानून के जानकारों का मानना है कि यह संशोधन महाराष्ट्र की सहकारी हाउसिंग सोसायटियों में पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा प्रशासनिक सुधार है। इससे सोसायटियों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी, मुकदमों की संख्या कम हो सकती है और फ्लैट मालिकों के अधिकार पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित होंगे। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि नियमों का वास्तविक प्रभाव उनके प्रभावी क्रियान्वयन और सदस्यों की जागरूकता पर निर्भर करेगा।
पार्किंग से वोटिंग तक सब कुछ बदला
महाराष्ट्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए हाउसिंग सोसायटी नियम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं हैं, बल्कि सहकारी आवास व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और सदस्य-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। नॉमिनी को अधिकार देने, छोटे समूहों को सोसायटी बनाने की सुविधा, पार्किंग और मेंटेनेंस के स्पष्ट नियम, डिजिटल बैठकों की अनुमति तथा पदाधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने जैसे प्रावधान भविष्य में लाखों फ्लैट मालिकों के दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करेंगे। यदि इन नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया गया तो महाराष्ट्र की सहकारी हाउसिंग सोसायटियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक भागीदारी का नया अध्याय शुरू हो सकता है।
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