महाराष्ट्र: अमृता फडणवीस के कार्यक्रम से पहले विवाद, ASI ने क्यों थमाया नोटिस?

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में अमृता फडणवीस का प्रस्तावित जीर्णोद्धार समारोह चर्चा का विषय बन गया है। 8 सितंबर को होने वाले इस कार्यक्रम से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने लालपेठ स्थित विशाल शिवलिंग के आसपास अवैध निर्माण को लेकर मंदिर समिति को नोटिस जारी किया। इस नोटिस ने आयोजकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिससे समारोह की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अनधिकृत निर्माण के आरोप

ASI ने बताया कि लालपेठ में स्थित विशाल शिवलिंग को राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। इसके आसपास बन रहे निर्माण कार्यों को प्रतिबंधित माना गया है, क्योंकि यह स्थान पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत विशेष सुरक्षा प्राप्त क्षेत्र है। ASI ने मंदिर समिति को निर्देश दिया कि वे सभी निर्माण कार्य तत्काल रोकें और परिसर को पूर्व स्थिति में लाएं।

कानूनी कार्रवाई की तैयारी

ASI के नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में दोषियों को दो साल तक की सजा या ₹1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। इस कार्रवाई के बाद, पुरातत्व विभाग मंदिर समिति के अध्यक्ष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करने पर विचार कर रहा है। यदि यह शिकायत दर्ज होती है, तो मामला कानूनी दिशा में भी बढ़ सकता है।

स्थानीय विधायक की भूमिका

जानकारी के अनुसार, परिसर में हुए निर्माण के लिए स्थानीय बीजेपी विधायक किशोर जोरगेवार ने स्वनिधि से राशि उपलब्ध कराई थी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं। इस संदर्भ में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तविकता में ASI से पूर्व अनुमति प्राप्त की गई थी।

सवालों का ढेर

अमृता फडणवीस की मौजूदगी में होने वाले समारोह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, वहीं ASI की नोटिस ने आयोजन की वैधता पर सवाल उठाए हैं। परिसर में संरक्षित स्मारक से संबंधित सूचना बोर्ड पहले से मौजूद है, लेकिन फिर भी निर्माण कार्य की वैधता नहीं स्पष्ट हो पाई है। आयोजकों को अब यह बताना होगा कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ASI से अनुमति क्यों नहीं ली गई थी।

अगला कदम क्या होगा?

महत्वपूर्ण यह है कि ASI की नोटिस के बाद अगला कदम क्या होगा। क्या आयोजक जल्द ही इस मामले का सटीक हल निकाल पाएंगे? इसके अलावा, यह भी देखने वाली बात होगी कि राजनीति और प्रशासनिक दृष्टिकोण इस विवाद पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। इस पूरे मामले की वास्तविकता और कानूनी कदमों का खुलासा आगे आने वाले समय में ही होगा।

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